रसखान समाधि पर बिखरे कला और संस्कृति के रंग:मथुरा में उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद ने किया आयोजन

मथुरा16 दिन पहले
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8 दिवसीय सांझी महोत्सव का शुभारंभ करते अतिथि - Dainik Bhaskar
8 दिवसीय सांझी महोत्सव का शुभारंभ करते अतिथि

भगवान श्री कृष्ण के भक्त रसखान और ताज बीबी की मथुरा स्थित गोकुल के नजदीक बने समाधि परिसर में ब्रज की पुरातन परंपरा को जीवंत करने वाले सांझी महोत्सव का आयोजन किया गया। सांझी महोत्सव का शुभारंभ भाजपा जिलाध्यक्ष मधु शर्मा और निजी विश्व विद्यालय के प्रति कुलपति प्रो.अनूप कुमार गुप्ता ने दीप प्रज्वलित कर किया। महोत्सव में कला और संस्कृति के अलग अलग रंग देखे गए।

रंगों के अलावा गोबर और फूलों से भी बनाई गई सांझी

ब्रज तीर्थ विकास परिषद और निजी विश्वविद्यालय, मथुरा के संयुक्त तत्वावधान में सांझी महोत्सव 18 से 25 सितंबर तक चलेगा। यह आयोजन पर्यटन विभाग, राजकीय संग्रहालय, मथुरा और ब्रज संस्कृति शोध संस्थान, वृंदावन के सहयोग से हो रहा है। समूचे परिसर में कलाकार सांझी बनाने में जुटे रहे। एक ओर रंगों की सांझी बनाने में महिला और पुरुष कलाकार जुटे रहे वहीं अडींग की पूनम यादव और गोकुल की लक्ष्मी देवी व वृंदावन तथा अन्य स्थानों से पहुंची महिलाओं ने गोबर, फूलों से सांझी बनायी।

महिलाओं ने गोबर, फूलों से सांझी बनायी
महिलाओं ने गोबर, फूलों से सांझी बनायी

भजन गायन से वातावरण हुआ भक्तिमय

राजकीय संग्रहालय की ओर से अलग से गैलरी सजाई गयी, जिसमें इस परंपरा को चित्रों के जरिए समझाया गया। समूचा परिसर केसरिया ध्वज व पट्टिका से अटा पड़ा रहा। रसखान समाधि परिसर में सांझी देखने वाले महिला व पुरुषों की भी कतार लगी रही। सायं काल सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में भजन गायन से परिसर भक्तिमय हो गया।

ऐसे आयोजन ब्रज के संरक्षण में निखार : मधु शर्मा

जिलाध्यक्ष मधु शर्मा ने ब्रज तीर्थ विकास परिषद के प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से ब्रज का संरक्षण तो निखर कर सामने आता ही है, बल्कि वातावरण संस्कृति के रंग में रंग जाता है। सांस्कृतिक कार्यक्रमों से मन को शांति मिलती है। अनूप कुमार गुप्ता ने कहा कि कलाकारों द्वारा विभिन्न तरह को सांझी तैयार कर उनमें रंगों को पिरोया है वह वाकई क़ाबिले तारीफ है। यह हुनर बताता है कि इस ब्रज में कलाकारों की कोई कमी नहीं है, बल्कि उनके निखरने की जरूरत है। वह तभी निखरेंगे जब ऐसे कार्यक्रम आयोजित होंगे। यही सभी कलाकार प्रतिदिन अलग-अलग रंग में सांझी तैयार करेंगे।

महोत्सव में कलाकार प्रतिदिन अलग-अलग रंग में सांझी तैयार करेंगे
महोत्सव में कलाकार प्रतिदिन अलग-अलग रंग में सांझी तैयार करेंगे

यह रहे उपस्थित

महोत्सव के शुभारंभ मौके पर उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद की ओर से डिप्टी सीईओ पंकज वर्मा, पर्यटन अधिकारी डी के शर्मा, राजकीय संग्रहालय के सहायक निदेशक यशवंत सिंह राठौर, परिषद के ब्रज संस्कृति विशेषज्ञ डॉ उमेश चंद्र शर्मा, आर पी सिंह यादव व गीता शोध संस्थान वृंदावन के समन्वयक चंद्र प्रताप सिंह सिकरवार आदि उपस्थित रहे।

सांझी बनाने की परंपरा पुरातन काल से

सांझी महोत्सव में पहले दिन बडे भक्ति भाव से दिन भर कलाकार सांझी के चित्र बनाने में जुटे रहे। सांझी बनाने वाली अडींग निवासी पूनम यादव का कहना है कि सांझी के चित्र बनाना भी एक साधना है। ब्रज के मंदिरों के जग मोहन में सांझी बनाने की परंपरा वैदिक काल से चली आ रही है। अब इस कला का नवाचार हो रहा है। इस अवसर पर कलाकारों ने सांझी महोत्सव मैं बनाई जा रही रंगोली व सांझी मे अंतर भी समझाया। ब्रज में कृष्ण की लीलाएं सांझी में चित्रित किए जाने की परंपरा रही है। बल्लभ संप्रदाय व निम्बार्क संप्रदाय में भी सांझी परंपरा रही है। ये माना जाता है कि सांझी बनाना एक साधना है, रोजगार नही। सभी का यही मत रहा ये पुरातन कला जीवित रहे।