मानसून की बारिश, नगर निगम की खुली पोल:मथुरा में 24 घंटे से हो रही बरसात, चिपचिपी गर्मी से राहत; सड़कें बनी तालाब-घरों में जलभराव

मथुरा4 महीने पहले
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बारिश के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में जलभराव। - Dainik Bhaskar
बारिश के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में जलभराव।

उत्तर प्रदेश में मानसून फिर से लौट आया है। जुलाई की चिपचिप वाली गर्मी से एक तरफ लोगों को राहत का अहसास कराया। वहीं, जलभराव ने लोगों का झिकाया। ऐसा ही कुछ हाल मथुरा के ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरी क्षेत्रों में देखने को मिला। यहां रविवार शाम से शुरू हुई बरसात सोमवार तक जारी रही।

सड़कें तालाब में बदल गईं और घरों में घुटने तक बारिश का पानी भर गया। जलभराव की समस्या से त्रस्त ग्रामीणों ने बल्देव राया रोड जाम कर दिया। मानसून की पहली बरसात ने नगर निगम के सभी दावों की पोल खोलकर रख दी है।

जलभराव के कारण घरों से सामान निकालते ग्रामीण
जलभराव के कारण घरों से सामान निकालते ग्रामीण

घरों में घुसा पानी, परेशान लोगों ने लगाया जाम
गांव कारव में नालों की सफाई न होने के कारण घरों में पानी घुस गया। घुटने तक भरे बारिश के पानी में लोगों को समस्याओं का सामना करना पड़ा। परेशान ग्रामीणों ने बल्देव राया रोड पर गांव के बाहर तक जाम लगा दिया। जाम लगाने की सूचना पर पहुंची पुलिस ने ग्रामीणों को समझाने बुझाने का प्रयास किया। मगर ग्रामीण नहीं माने। ग्रामीण उत्तम चंद ने बताया कि बरसात ऐसी हुई कि घरों में पानी भर गया। पानी निकासी की कोई व्यवस्था नहीं हैं। जिसकी वजह से घरों में पानी भर गया। खाने पीने का समान भीग गया। नुकसान काफी हो गया। जिसके बाद तहसीलदार मौके पर पहुंचे और उन्होंने तत्काल ब्लॉक कार्यालय से पंप सेट मंगाकर जल निकासी शुरू कराई। SDM महावन कृष्णा नंद तिवारी ने बताया कि ग्रामीणों ने जाम लगाया मौके पर ब्लॉक से पंपसेट मंगाकर पानी निकलवाया जा रहा हैं।

मथुरा शहर में भी हुआ जलभराव
रविवार की बीती रात से ही शुरू हुई मानसून की पहली बरसात ने नगर निगम के सभी दावों की पोल खोलकर रख दी है। जिससे जहां सड़कों पर कई-कई फीट पानी हिलोरे मारते हुए नजर आया। कई जगह पर जलभराव के कारण राहगीरों के वाहन फंस गए। जिससे लोगों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। मथुरा के भूतेश्वर रोड चौराहे पर बने रेलवे पुल के नीचे हुए जलभराव में लोगों की गाड़ियां फंस गई। बीएसए कॉलेज के पास भी सड़कोंं पर पानी जमा हो गया है। नालों में सिल्ट जमा होने के चलते जल निकासी नहीं हो सकी। जिसका ख़मियज़ा आम राहगीर और स्थानीय लोगों को उठाना पड़ रहा है ।