महंत बोले- विलुप्त होने के कगार पर रासलीला विधा:सुरक्षित रखने में आचार्यों का करें सहयोग, 'ब्रज के रासाचार्य' पुस्तक का विमोचन

वृंदावन2 महीने पहले
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वृंदावन में 'ब्रज के रासाचार्य' पुस्तक का विमोचन करते महंत। - Dainik Bhaskar
वृंदावन में 'ब्रज के रासाचार्य' पुस्तक का विमोचन करते महंत।

गांधी मार्ग स्थित हित आश्रम में बुधवार को 'ब्रज के रासाचार्य' पुस्तक का विमोचन संत एवं धर्माचार्यों ने किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महंत हित कमल दास महाराज ने की। महाराज ने बताया कि पुस्तक का संपादन दिल्ली के संजय शर्मा ने किया है।श्रीधाम वृंदावन की प्राचीनतम संस्कृति प्रिया प्रियतम की रास विधा धीरे-धीरे विलुप्त के कगार पर है।

वृंदावन की रासलीला, यमुना, देवालय एवं गोवर्धन पर्वत बृज की प्रमुख पहचान हैं। रास स्थली जहां पर कभी रासाचार्य विभिन्न प्रसंगों पर रासलीला किया करते थे। वह स्थली आज या तो बेच दी गई या उपेक्षित पड़ी है, जो बहुत ही दुखद है। आवश्यकता है कि हम सभी बृजवासी अपनी इस रास विधा को सुरक्षित रखने में रास के आचार्यों का सहयोग करें।

डॉ. राजेश शर्मा ने रासलीलाओं पर दिया व्याख्यान

वृंदावन शोध संस्थान के शोध विभाग के डॉ. राजेश शर्मा ने रास विधा पर निंबार्क संप्रदाय, श्रृंगार और रास लीलाओं पर व्याख्यान दिया। उन्होंने 17वीं शताब्दी में रासाचार्य के द्वारा की गई वृंदावन की रासलीला का उल्लेख किया। डॉ. मनोज मोहन शास्त्री ने स्वामी मेघश्याम शर्मा के रचित काव्य रचना का वाचन किया।

भगवत किशोर ने पुस्तक की भूमिका पर डाला प्रकाश

रवि शंकर बबेले ने रासलीला के महत्त्व को बताया। बरसाने से आए गोपाल ने गोवर्धन वाले बाबा पंडित गया प्रसाद के रास से ठाकुर जी के साक्षात्कार का वर्णन किया। भगवत किशोर व्यास ने पुस्तक की भूमिका पर प्रकाश डाला। अनूप शर्मा एवं संजय शर्मा ने अतिथियों का माल्यार्पण कर स्वागत किया। इस अवसर पर संजय शर्मा, श्याम सखा, राधाकांत, मोहन, किशोर, गोवर्धन शर्मा, गोपाल व्यास, लक्ष्मी नारायण तिवारी आदि उपस्थित थे।

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