मऊ…500 साल पुराना मकर संक्रांति का मेला:गोरखनाथ मठ के बाद यहां लगता है मेला, बांटी जाती है खिचड़ी, 3 दिन चलता है मेला

मऊ6 दिन पहले
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मऊ - Dainik Bhaskar
मऊ

मऊ जिले के ब्रह्म स्थान सहादतपुरा क्षेत्र के मंदिर पर एक बहुत ही पुराना मकर संक्रांति का मेला लगता चला आ रहा है। इस स्थान पर बरम बाबा के मंदिर क्षेत्र के प्रांगण में यह ऐतिहासिक मेला लगता है। यहां पर दूर-दूर से लोग आते हैं। माना जाता है कि यह गोरखनाथ मंदिर मेले के बाद ऐसी ही यह जगह है जहां पर मकर संक्रांति के दिन मेले का आयोजन किया जाता है।

ब्रह्मा बाबा मंदिर का प्रांगण है पवित्र स्थान

जिले के रहने वाले राजेश ने बताया कि ब्रह्मा बाबा मंदिर के प्रांगण पवित्र स्थान पर लगने वाला यह मेला बहुत ही पुराना है। हम लोग अपने बाबा के साथ इस मेले में आते थे और यहां पर अपने व्यवसाय खेती बाड़ी संबंधित अन्य जरूरी चीजें खरीद कर ले जाते थे। यह मेला पहले की अपेक्षा अब बहुत आधुनिक हो गया है। यहां पर जरूरत के सामान के साथ बच्चों के मनोरंजन के लिए बड़े-बड़े झूले आदि लगाए गए हैं। इसका बहुत ही पौराणिक महत्व है। मेरे बाबा के द्वारा बताया जाता था कि इस पवित्र स्थान पर लगने वाला लगभग 500 वर्ष पुराना मेला है। यह मेला 3 दिन चलता है साथ ही यहां पर कीर्तन का वृहद आयोजन शाम के समय किया जाता है।

भू-धरिया बाबा की बनी है समाधि

इस मंदिर के प्रांगण के बगल में एक भू-धरिया बाबा का स्थान है। जहां पर मेला लगता है। बताया जाता है कि कोई भी कार्यक्रम शुरू करने से पहले भू-धरिया बाबा की पूजा बहुत ही आवश्यक और परंपरागत है, कोई भी काम या शुभ कार्य शुरु होने से पहले यहां की पूजा की जाती है। यह बाबा ब्रह्म बाबा के रक्षक होने के साथ उनके हमेशा से निकट अस्त माने जाते हैं। इनके मरने के बाद मंदिर प्रांगण में ही इन्हें समाधि दे दी गई थी। तब से ब्रह्मा बाबा की पूजा करने के पश्चात भू-धरिया बाबा की पूजा आवश्यक माना जाने लगा है। माना जाता है कि अगर ब्रम्ह बाबा की पूजा करने के बाद उनकी पूजा न की जाए तो फलित इच्छा पूर्ण नहीं होती है।

7 दिनों तक मेला, अब होता 3 है का आयोजन

आलोक ने बताया कि इस मेले में वह भी अपने बाबा के साथ ही आना शुरू किए थे और उन्हें उनके बाबा ने ही बताया था कि यह मेला लगभग 500 वर्ष से 600 वर्ष पुराना है। इस स्थान पर लगने वाला मेला यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के मठ पर लगने वाले मेले के ही समान पूर्वांचल में लगने वाला यह दूसरा मेला है। जहां पर की मकर संक्रांति के दिन यह मेला लगता है और यहां पर खिचड़ी प्रसाद के रुप में चढ़ाई जाती है। इस मेले में बहुत दूर-दूर से लोग अपनी जरूरत की चीजें खरीदने आते हैं। हमारे बाबा ने बताया कि यह मेला पहले 7 दिनों तक चलता था जो आज 3 दिन का हो गया है। बहुत सारे परिवर्तन हुए हैं, लेकिन फिर भी इस मेले की महत्व और इस स्थान का पवित्रता आज ही लोगों में आस्था के रूप में देखा और सुना जाता है।

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