मेरठ में धरने पर बैठे युवा किसान की मौत:7 सालों से चल रहे धरने में 21वां किसान शहीद

मेरठएक महीने पहले
सुबह किसानों को धरना स्थल पर ही मृत मिला युवक

मेरठ के शताब्दीनगर में पिछले 7 सालों से जमीन के मुआवजे के लिए चल रहे धरने में सोमवार देर रात युवा किसान राहुल, पुत्र कृष्णपाल, निवासी कंचनपुर घोपला की मौत हो गई। युवक पिछले 7 सालों से यहां धरना स्थल पर रोज रात को धरना देने आता था। सोमवार को युवक हीटर जलाकर रात को धरनास्थल पर बैठ गया। सुबह किसानों ने देखा कि युवक के शरीर में कोई हलचल नहीं है। शरीर झुका हुआ पड़ा है। काफी वक्त गुजरने के बाद भी जब युवक के शरीर में हरकत नहीं हुई तो किसानों को शक हुआ जब युवक के शरीर को हिलाया तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।

दिन में काम रात को धरना

पिछले 7 सालों से हर रात युवक यहां धरना देने आता था
पिछले 7 सालों से हर रात युवक यहां धरना देने आता था

किसानों ने बताया राहुल 7 सालों से लगातार हर रात यहां धरना स्थल पर आ जाता था। दिन में युवक घर, खेत के काम करता था, रात को यहां धरने पर आ जाता। पिछले सात सालों से हमारा धरना चल रहा है इसलिए कई युवा किसान शिफ्ट में धरने पर आते रहते हैं। राहुल भी ऐसे ही आता था। सोमवार को भी राहुल देर रात धरना स्थल पर बैठने आया। उसके आते ही दूसरे किसान सोने चले गए। युवक हीटर जलाकर धरने पर बैठ गया। सुबह देखा तो युवक का शरीर जमीन पर झुका पड़ा था। अधिक ठंड के कारण युवक की मौत हो गई।

मौत की खबर सुनते ही मचा कोहराम

किसानों ने कहा जब तक न्याय नहीं मिलेगा हम लड़ते रहेंगे, भले कितनी कुर्बानी देनी पड़े
किसानों ने कहा जब तक न्याय नहीं मिलेगा हम लड़ते रहेंगे, भले कितनी कुर्बानी देनी पड़े

मंगलवार सुबह जैसे ही किसानों ने युवक के शरीर को छूकर देखा तब तक युवक मर चुका था। सांसें बंद थी, शरीर ठंडा हो गया था। किसानों ने बताया कि युवक बैठे-बैठे ही जमीन पर झुका पड़ा था। युवक की मौत की खबर सुनकर किसानों में कोहराम मच गया। युवक के परिजनों को सूचित किया गया। युवक के पिता और पूरा परिवार रोते हुए धरना स्थल पर पहुंचा।

टिकैत के आने पर ही अंतिम संस्कार
धरनारत किसानों ने कहा कि राकेश टिकैत या उनके बेटे गौरव टिकैत के आने के बाद ही शहीद किसान का अंतिम संस्कार करेंगे। किसानों ने मृतक की पत्नी के लिए सरकारी नौकरी, आर्थिक सहायता और मुआवजे की मांग की है। किसानों का कहना है टिकैत के आने पर ही आगे का फैसला होगा।

न्याय के लिए 700 सालों तक चलाएंगे धरना

धरने पर बैठे किसान विजयपाल घोपला ने कहा कि 4 जून 2014 को किसानों ने शताब्दीनगर में धरना शुरू किया था। अब तक इस आंदोलन से जुड़े 20 आंदोलनकारियों की मौतें हो चुकी है आज संख्या 21 हो गई। मामला 640 एकड़ जमीन के मुआवजे से जुड़ा है। किसान नई अधिग्रहण नीति के अनुसार मुआवजा मांग रहे हैं। लेकिन उनकी समस्या अब तक हल नहीं हुई है। किसानों का कहना है कि वो 700 साल भी धरना चलाना पड़ा तो किसान पीछे नहीं हटेंगे।

मुआवजे को लेकर है विवाद
शताब्दी नगर में एमडीए ने कॉलोनी विकसित करने के लिए किसानों से जमीन ली थी। कुछ गांव के किसानों ने तो प्रशासन की मनमानी चलने दी और उसी रेट पर जमीन देकर मुआवजा ले लिया। मगर 6 गांव के किसान इस पर राजी नहीं हुए और धरने पर बैठ गए। इसमें जयंतपुर, घोपला, रिठानी और अचरोंडा व 2 गांव के किसानों की 640 एकड़ जमीन पर विवाद है। किसानों की मांग है कि नई अधिग्रहण नीति के अनुसार जमीन देकर मुआवजे की है। जिसे प्रशासन मान नहीं रहा। किसान भी जमीन नहीं दे रहे हैं।