कोरोना नहीं, अब धूल से बचने के लिए मास्क पहनें:NCR की हवा में 48 प्रतिशत धूल कर रही बीमार, लंग्स का इंफेक्शन बढ़ा

मेरठ5 महीने पहले

कोरोना के तीन फेज गुजरने के बाद मास्क को अलविदा कहने वाले सतर्क हो जाएं। डॉक्टरों के अनुसार, कोरोना का खतरा अभी गया नहीं है। अब कोरोना के साथ हवा में उड़ती धूल फेफड़ों की जान की दुश्मन है। मेरठ सहित एनसीआर में तेजी से चल रहे निर्माण कार्यों के कारण हवा में धूल का प्रतिशत 48 फीसद हो गया है।

कोरोना के समय जो प्रोजेक्ट वर्क रुक गए थे, वो अब फिर शुरू हो गए हैं। सड़कों पर उठते ये धूल के गुबार कई घातक बैक्टीरिया को फैला रहे हैं। साथ ही ब्लड कैंसर, ब्रोनकाइटिस, अस्थमा, निमोनिया का रोगी बनाकर सांसें घटा रहे हैं।

कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स ने बढ़ा दी धूल

मेरठ टीपीनगर में रोड़ी के ढेर लगे रहने के कारण उड़ती है धूल।
मेरठ टीपीनगर में रोड़ी के ढेर लगे रहने के कारण उड़ती है धूल।

NCR में इन दिनों रैपिड रेल, मेट्रो ट्रेन, एक्सप्रेस वे, गंगा एक्सप्रेस वे, सड़कों, फ्रैट कॉरिडोर सहित तमाम बड़े प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। ऐसे में हवा में PM 2.5, PM 10 का स्तर बढ़ने के साथ डस्ट पार्टिकल बढ़े हैं। पीएम 2.5 में 48 प्रतिशत केवल धूल कणों का है।

गैसों से कई गुना ज्यादा मात्रा धूल कणों की है, जो उखड़ी सड़कों, कंसस्ट्रक्शन साइट, बारिश से कम होने के कारण खेतों से उड़कर वायुमंडल में जमा हो रही है। इन कणों के साथ खतरनाक बैक्टीरिया भी बीमारियों के संवाहक होते हैं। नवंबर-दिसंबर में PM 2.5 बढ़ने के कारण रैपिड, मेट्रो रेल का काम रोक दिया था।

NCR की हवा में 48 प्रतिशत धूल ही धूल

मेरठ के महाराणा प्रताप चौक में नवंबर, दिसंबर के दौरान धूल को रोकने के लिए आर्टिफिशियल रेन कराई गई, ताकि हवा साफ रहे।
मेरठ के महाराणा प्रताप चौक में नवंबर, दिसंबर के दौरान धूल को रोकने के लिए आर्टिफिशियल रेन कराई गई, ताकि हवा साफ रहे।

IIT कानपुर की रिपोर्ट में मेरठ, एनसीआर की हवा में पीएम-2.5 एवं पीएम-10 में 40 प्रतिशत मात्रा धूल कणों की पाई गई थी। नवंबर 2020 में एनवायरमेंट पॉल्यूशन कंट्रोल अथॉरिटी के चेयरमैन रहे भूरे लाल ने मेरठ-दिल्ली रोड एवं मेरठ-हापुड़ रोड पर धूल की मात्रा ज्यादा मिलने पर अर्थदंड लगाया था।

उन्होंने मेरठ की उखड़ी सड़कों, अनियंत्रित निर्माण, पॉलीथिन एवं ठोस कचरा दहन और औद्योगिक इकाइयों से उड़ने वाली काली राख के मद्देनजर प्रशासन को फटकारा था। इसके बाद भी मेरठ में एयर क्वालिटी इंडेक्स 200 से ज्यादा है।

ये धूल जिंदगी के लिए इन तरीकों से बन रही खतरा

फेफड़ों को कर रही खराब- ग्लोबल बर्डेन ऑफ डिसीज की रिपोर्ट बताती है कि औद्योगिक चिमनियों, जनरेटरों, ईंट भठ्ठों, डीजल से चलने वाले पुराने वाहनों और प्लास्टिक कचरा जलाने से कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फर डाई ऑक्साइड, ओजोन, नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड, अमोनिया, कार्बन डाई ऑक्साइड जैसी खतरनाक गैसें फेफड़ों में पहुंचकर बीमार कर रही हैं।

ब्लड कैंसर का बना रही रोगी- हवा में घुला PM 2.5 और इसमें मौजूद धूल ब्लड कैंसर का रोगी बना रही है। छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. वीएन त्यागी के अनुसार, धूल के महीन कण फेफड़ों में जाकर चिपक जाते हैं। खून की बारीक नलियों के ऊपर डस्ट पार्टिकल जमा होकर परत बनाने लगते हैं। इससे खून का प्रवाह कम होने लगता है। कैडमियम, क्रोमियम, मालिब्डेनम, बेंजीन, निकिल, पारा, जिंक, आयरन एवं सेलेनियम के पार्टिकल ब्लड कैंसर को बढ़ा रहे हैं।

केवल मास्क ही सड़कों पर उड़ती धूल के गुबार से कर सकता है बचाव
केवल मास्क ही सड़कों पर उड़ती धूल के गुबार से कर सकता है बचाव

धूल से बच्चे ज्यादा बीमार- मेरठ मेडिकल कॉलेज में विभागाध्यक्ष डॉ. विजय जायसवाल कहते हैं कंस्ट्रक्शन साइट्स और हवा में उड़ती धूल, प्रदूषण की चपेट में सबसे ज्यादा बच्चे हैं। भारत में प्रति एक हजार बच्चों में सबसे ज्यादा भारत में जान गंवा रहे हैं। बच्चे जल्दी-जल्दी सांस लेते हैं, ऐसे में धूल के कण और उनके साथ तमाम घातक बैक्टीरिया चिपककर सांस के जरिए फेफड़े तक जाते हैं। यह झिल्ली को कमजोर करते हैं और निमोनिया, अस्थमा और दूसरी बीमारियां पैदा करते हैं।

यूपी में खराब हवा से लगातार मौतें- यूपी में प्रदूषित हवा से प्रति दस हजार आबादी में 112 की मौत हुई, जो देश में छत्तीसगढ़ के बाद दूसरी सबसे ज्यादा है। 2022 की स्टेट ऑफ इंडियाज एनवायरमेंट रिपोर्ट के अनुसार, भारत में प्रदूषित हवा से औसत उम्र 5.9 वर्ष तक घटी है। हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक, सांस के अटैक, सीओपीडी, छाती का संक्रमण, निमोनिया, किडनी में खराबी, रक्त, बोन और लंग्स कैंसर से लोग जान गंवा रहे हैं।

टीबी, सांस रोगियों में बढ़ रही दवा की डोज- जो पहले से सांस रोगी हैं, उनकी दवाओं की डिमांड बढ़ रही है। हवा के फिल्टर के काम करने की क्षमता गिर रही है। सांस रोगियों को भारी हवा इनहेल करनी पड़ रही है।

मेरठ कैंट क्षेत्र सहित शहर में तमाम जगह टूटी, उखड़ी सड़क के कारण बढ़ रहा धूल का स्तर।
मेरठ कैंट क्षेत्र सहित शहर में तमाम जगह टूटी, उखड़ी सड़क के कारण बढ़ रहा धूल का स्तर।

अब जानें इस धूल बढ़ने की वजह क्या है

  1. कोरोना के समय बंद हुए निर्माण कार्य, प्रोजेक्ट वर्क फिर से पूरी तरह चालू हो चुके हैं।
  2. पूरे एनसीआर में इस साल बारिश कम होने के कारण धूल सड़कों पर उड़ रही है। वरना धूल और प्रदूषण बारिश की बूंदें पड़ने से मिटटी में दब जाता है।
  3. सड़कों पर बढ़ा वाहनों का लोड।
  4. खुले में बिकते सीमेंट, रेत, ईंट, गिट्‌टी दिनभर उड़कर हवा को भारी बनाकर घातक कर रही है।

हवा को फिल्टर कर हल्का करेगा मास्क

डॉ. वीएन त्यागी का कहना है कि मास्क लगाकर प्रदूषण की समस्या से काफी हद तक बचा जा सकता है।
डॉ. वीएन त्यागी का कहना है कि मास्क लगाकर प्रदूषण की समस्या से काफी हद तक बचा जा सकता है।

वरिष्ठ छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. वीएन त्यागी के अनुसार, नॉर्थ इंडिया का पीएम लेवल बहुत ज्यादा है। इससे सांस लेने में दिक्कत आती है। ऐसे में मास्क बहुत जरूरी है। यह प्रदूषण, धूल और भारी हवा तीनों से बचाता है। मास्क हवा को फिल्टर कर उसकी हैवीनेस कम करके स्मूथ बनाता है इससे सांस लेने में अधिक ताकत नहीं लगानी पड़ती।

मास्क से हवा में मौजूद तमाम खराब बैक्टीरिया, पार्टिेकल मेटर, हैवी मेटल्स को बाहर ही रोक देता है, जो शरीर में अंदर नहीं पहुंचते और बीमार होने से बचाते हैं। सांस के रोगी, बुजुर्ग, मरीजों को शुद्ध हवा मिलती रहती है।