मेरठ विवि को जन्मदिन मुबारक:56 साल का हुआ CCSU कभी टाट पट्टी से शुरू हुई थी कक्षाएं, 9 जिलों में 5.3 लाख छात्र

मेरठ4 महीने पहले
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सीसीएसयू के 56वें जन्मदिन पर हवन - Dainik Bhaskar
सीसीएसयू के 56वें जन्मदिन पर हवन

वेस्ट यूपी में सबसे बड़ा उच्च शिक्षा का केंद्र चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (CCSU) आज 56 साल का हो गया। कभी टाट पट्टी से छात्रों की पढ़ाई करने वाला विश्वविद्यालय आज हाईटेक आज 222 एकड़ जमीन भू भाग पर फैला हुआ है। जिसके मेरठ और सहारनपुर मंडल के 9 जिलों में 5.3लाख छात्र आज पढ़ाई कर रहे हैं। पूर्व में इसका नाम मेरठ विश्वविद्यालय था।

1 जुलाई 1965 को मेरठ यूनिवर्सिटी की शुरुआत शहर के सबसे बीचोबीच नौचंदी से शुरू हुई थी। राजस्थान के पूर्व गवर्नर रघुकुल तिलक के घर प्रभात प्रेस में पढाई का काम शरू किया गया। और यहां पर टेंट व बांस की बल्लियां लगाकर कक्षाएं चलाने का काम शुरू हुआ। और छात्रों को टाट पट्टी पर बैठाया जाता था। शुरुआत के दौर में 111 छात्रों ने 1 दिन पढ़ाई के लिए जोड़ा गया। लेकिन जैसे-जैसे समय बदलता गया उसके बाद विश्वविद्यालय ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। कैलाश प्रकाश जब उत्तर प्रदेश के शिक्षा मंत्री बने तो उन्होंने मेरठ शहर में डिग्गी गांव के पास विश्वविद्यालय के लिए जमीन प्रस्ताव दिया। उसके बाद मेरठ विश्वविद्यालय यहीं पर स्थापित हुआ। आज यह विश्वविद्यालय प्रदेश के टॉप विश्वविद्यालयों में जाना जाता है, और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में उच्च शिक्षा का सबसे बड़ा केंद्र है। जिसके मेरठ मंडल के 6 जिलों मेरठ, गाजियाबाद, गौतमबुधनगर, हापुड़, बागपत और बुलंदशहर जिले के छात्र उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। वहीं सहारनपुर मंडल के सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और शामली जिलों के छात्र भी पढ़ाई कर रहे हैं। इसके अलावा पूर्वांचल और हरियाणा के छात्र भी यहां से इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे हैं।

26 जनवरी 1994 को मेरठ विश्वविद्यालय से नाम सीसीएसयू हुआ

1994 में जब मुलायम सिंह यादव प्रदेश के मुख्यमंत्री थे, तो उन्होंने मेरठ विश्वविद्यालय का नाम बदलने का निर्णय लिया, और 26 जनवरी 1994 को मेरठ विश्वविद्यालय का नाम पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के नाम पर कर दिया गया। आज मेरठ और सहारनपुर मंडल के 9 जिलों में 5.3 लाख छात्र, छात्राएं चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से संबंधित कॉलेजों में पढ़ाई कर रहे हैं। 1020 कॉलेज विश्वविद्यालय से जुड़े हैं। कुलपति नरेंद्र कुमार तनेजा ने बताया कि विश्व विद्यालय और विश्वविद्यालय से जुड़े कॉलेजों में पढ़ाई कर छात्रों ने देश में नहीं बल्कि विदेशों तक अपना नाम रोशन किया है। और लगातार यहां के पढ़े हुए छात्र अलग-अलग जगह पर सफलता के मुकाम पर पहुंचे हैं। विश्वविद्यालय कैंपस के परिसर में ही सर छोटू राम इंजीनियरिंग कॉलेज के नाम से इंजीनियरिंग का अलग केंद्र है, जो विश्व विद्यालय कैंपस का ही हिस्सा है। स्थापना दिवस के मौके पर आज यहां विश्वविद्यालय का स्थापना दिवस मनाया गया। जिसमें VC एनके तनेजा, रजिस्टर धीरेंद्र कुमार वर्मा और अन्य विभागों के विभाग अध्यक्ष रहे।

दौर बदलता गया और उच्च शिक्षा में पाठ्यक्रम भी बदलते गए

सीसीएसयू विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में इस वर्ष भी कई नए पाठ्यक्रम शामिल किए गए हैं। जैसे-जैसे दौर आता गया विश्वविद्यालय की शिक्षा भी बदलती गई। पिछले 15 माह पहले सीसीएसयू में मार्कशीट, डिग्री, माइग्रेशन, प्रोविजनल, सर्टिफिकेट बनवाने के लिए ऑनलाइन व्यवस्था नहीं थी। लेकिन अप्रैल 2020 से जब लॉक डाउन में छात्रों को परेशानी हुई तो छात्र छात्राओं को प्रमाण पत्र दिए जाने का कार्य जारी रहा। और विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर एनके तनेजा ने यह निर्णय लिया कि यह प्रमाण पत्र ऑनलाइन बनाए जाएं, जिसके बाद छात्रों के प्रमाण पत्र ऑनलाइन बनाकर उनके पते पर डाक द्वारा घर भेजे जा रहे हैं।

222 एकड़ जमीन, 13,500 पेड़

सीसीएसयू का क्षेत्रफल 222 एकड़ भूमि पर फैला हु है। जिसमें 13500 अलग-अलग प्रजातियों के पेड़ हैं। मॉर्निंग, इवनिंग वॉक के लिए अलग से खूबसूरत ट्रैक है तो वही साहित्य कुटीर एक आकर्षण का केंद्र रही है। 40 रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाए गए हैं। एक समय विश्वविद्यालय की यह पहचान थी कि वह अपने छात्रों, हॉस्टल और लाइब्रेरी के लिए 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराता है। आज 75 फीसदी बिजली खपत सोलर ऊर्जा प्लांट से की जा रही है। कैंपस में 52 अलग-अलग विभागों के डिपार्टमेंट हैं।

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