यूपी में अदालत के बंटवारे पर विवाद:आगरा-मेरठ ने मांगा हाईकोर्ट, प्रयागराज की ना; वेस्ट यूपी में तेज हुआ वकीलों का आंदोलन

लखनऊ/ मेरठ/ प्रयागराज6 महीने पहले

उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। आगरा और मेरठ के वकीलों ने वहां बेंच बनाने की मांग तेज कर दी है। केंद्रीय विधि और न्याय मंत्री किरण रिजिजू ने वेस्ट यूपी में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना पर विचार किए जाने की बात कहकर उनकी मांग को और तूल दे दिया है। उधर, प्रयागराज के वकीलों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है। वकील तीन हिस्सों में बंट गए हैं।

यूपी के 3 हिस्सों की अलग-अलग राय

  • वेस्ट यूपी के वकीलों का तर्क 50%केस वेस्ट के, 600 किमी दूर है हाईकोर्ट
  • इलाहाबाद के वकीलों का तर्क- सरकार न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाए, बेंच बनने से कुछ नहीं होगा
  • लखनऊ खंडपीठ- मुकदमों का दायरा बढ़ाया जाए

त्रिकोणीय विवाद में फंसी है बेंच
वेस्ट यूपी में हाईकोर्ट बेंच के लिए त्रिकोणीय आंदोलन चल रहा है। इलाहाबाद के अधिवक्ता नहीं चाहते कि वेस्ट यूपी में हाईकोर्ट बेंच स्थापित की जाए। अधिवक्ता 'वन स्टेट वन कोर्ट' का तर्क देते हैं। अधिवक्ता कहते हैं कि वेस्ट यूपी में बेंच की स्थापना के बजाय सरकार हाईकोर्ट में तमाम खाली पड़े पदों को भरे। इससे न्याय में तेजी आएगी। उधर वेस्ट यूपी में अंदरखाने आंदोलन ब्रज और पश्चिम दो भागों में बंट चुका है। मेरठ के वकील मेरठ में आगरा के अधिवक्ता आगरा में बेंच चाहते हैं।

1956 से आगरा में उठ रही बेंच की मांग
मेरठ सहित आगरा में 1956 से हाईकोर्ट बेंच की मांग उठ रही थी। नेशनल कान्फ्रेंस लॉयर्स ने खंडपीठ स्थापना की मांग उठाई थी। आगरा के वरिष्ठ अधिवक्ता पीयूष शर्मा कहते हैं बेंच की मांग के लिए वकीलों ने दिल्ली तक पैदल मार्च किया था। इंदिरा गांधी सरकार में 1981 को जसवंत आयोग का गठन किया गया। आयोग ने 1985 में अपनी संस्तुति आगरा के पक्ष में देते हुए रिपोर्ट केंद्र सरकार को दी थी। 26 सितंबर 2001 में खंडपीठ की मांग कर रहे अधिवक्ताओं पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया था। ।

वेस्ट यूपी में हाईकोर्ट बेंच के लिए हुए बड़े आंदोलन
वेस्ट यूपी में हाई कोर्ट बेंच स्थापित कराने के लिए वकील लंबी लड़ाई लड़ रहे हैं। 1978 में वकीलों ने एक महीने की हड़ताल कर मांग को जोरों से उठाया गया। 1981, 1982 में भी बेंच के लिए आंदोलन गरमाया। 1986-87 में वकीलों ने ऋषिकेश से दिल्ली तक पद यात्रा निकाली। तब उत्तराखंड भी यूपी का हिस्सा हुआ करता था। साल 2001, 2014, 2015, 2017 और अब 2021 में भी हाई कोर्ट बेंच की मांग जारी है। आंदोलन के चलते वकील महीने के पहले, तीसरे शनिवार को कचहरी बंद रखते हैं। मेरठ-हापुड़ सांसद राजेंद्र अग्रवाल तीन बार लोकसभा में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना का मुद्दा उठा चुके हैं।

22 जिलों की बड़ी आबादी को सस्ता न्याय

वेस्ट यूपी के 22 जिलों से पिछले 30 सालों से भी अधिक समय से हाईकोर्ट बेंच की मांग उठ रही है। मेरठ, बिजनौर, गाजियाबाद, शामली, बागपत, मुजफ्फरनगर, हापुड़, अलीगढ़, हाथरस, आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद, एटा, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर, सहारनपुर, बुलंदशहर सहित तमाम जिलों की बड़ी आबादी को पश्चिमी यूपी में बेंच आने से न्याय पाने में सुविधा होगी।

न्याय के लिए 700 किमी का सफर
मेरठ बार एसोसिएशन के पूर्व महामंत्री एडवोकेट रामकुमार शर्मा कहते हैं पिछले 30 सालों से हम हाईकोर्ट बेंच की मांग उठा रहे हैं। चुनावी दल घोषणा पत्र में बेंच का वादा करते हैं, वादा पूरा कभी नहीं हुआ। अंजाम जनता और वकील भुगत रहे हैं। मेरठ से प्रयागराज की दूरी 700 किमी है, न्याय के लिए आम जनता इतना लंबा सफर करती है। इससे आर्थिक नुकसान के साथ समय की बरबादी होती है। इलाहाबाद हाईकोर्ट में वेस्ट यूपी के 2008 के आंकड़ों के हिसाब से सिविल के 6 लाख से ज्यादा मुकदमे, क्राइम के करीब 3 लाख मुकदमे पेंडिंग हैं। हाई कोर्ट में 50% से ज्यादा काम वेस्ट यूपी का होता है।

समस्या के मूल में जाएं...

इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के निवर्तमान अध्यक्ष अमरेंद्र नाथ सिंह का कहना है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट की पश्चिमी बेंच की मांग आज की नहीं है। आगरा, मेरठ, सहारनपुर जैसे नगर के अधिवक्ता 66 साल से लगातार यह मांग करते रहे हैं। समस्या हाईकोर्ट में मुकदमो की पेंडेंसी है। यह पेंडेंसी जजों के पद रिक्त होने से है। सरकार को पहले रिक्त पदों को भरना चाहिए।इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के निवर्तमान महासचिव प्रभाशंकर मिश्र का कहना है कि जिस जसवंत सिंह कमीशन की रिपोर्ट के आधार पर केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने पश्चिमी बेंच के गठन को लेकर बयान दिया है वह उत्तराखंड के गठन के बाद एग्जीक्यूट हो चुकी है। अब उसपर बयानबाजी बेकार है। हम किसी कीमत पर हाईकोर्ट के दो टुकड़े नहीं होने देंगे। उनका कहना है कि पश्चिम के अधिवक्ता चाहते हैं कि उनके घर में कोर्ट हो। अब हर आदमी चाहे कि सुप्रीम कोर्ट उनके शहर में हो जाए ताकि उन्हें दिल्ली न जाना पड़े तो क्या यह संभव है?

लखनऊ के वकीलेां ने उठायी क्षेत्राधिकार बढ़ाने की मांग

लखनऊ खंडपीठ की अवध बार एसोसियेशन ने जसवंत सिंह कमीशन की रिपोर्ट के आधार पर लखनऊ खंडपीठ का क्षेत्राधिकार बढ़ाने की मांग की है। उक्त रिपेार्ट में बरेली व मुरादाबाद डिवीजन को लखनऊ खंडपीठ से जोड़ने की संस्तुति की गयी थी। इसके अलावा राजधानी से नजदीकी के आधार पर कानपुर , बस्ती, आजमगढ़ व गेारखपुर डिविजनों को भी लखनऊ से जोड़ने की मांग की गई है। अध्यक्ष राकेश चौधरी की अध्यक्षता में मंगलवार को बार की आपातकालीन बैठक हुई।

महामंत्री अमरेंद्र नाथ त्रिपाठी ने बताया कि तय हुआ है कि अपनी मांगो के समर्थन में वरिष्ठ अधिवक्ताओं का एक प्रतिनिधिमंडल स्थानीय सांसद व केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय कानून मंत्री किरण रिजिजू से शीघ्र ही मिलेगा।

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