ज्वैलर्स को हॉलमार्क स्वीकार मगर यूआईडी का विरोध:एशिया की सबसे बड़ी सोना मंडी मेरठ से उठी एचयूआईडी खत्म करने की मांग, ज्वैलर्स छेड़ेंगे मुहिम

मेरठ4 महीने पहले
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मेरठ के सांसद राजेंद्र अग्रवाल को यूआईडी बंद कराने के लिए मांगपत्र देते मेरठ के ज्वेलर्स - Dainik Bhaskar
मेरठ के सांसद राजेंद्र अग्रवाल को यूआईडी बंद कराने के लिए मांगपत्र देते मेरठ के ज्वेलर्स

केंद्र सरकार द्वारा गोल्ड ज्वेलरी पर हॉलमार्क अनिवार्यता के बाद गहने की यूनिक आईडेंटिटी नंबर का विरोध शुरू हो गया है। एशिया की सबसे बड़ी सोना मंडी मेरठ के सराफा कारोबारी एचयूआईडी के विरोध में उतरे हैं। ज्वैलर्स के अनुसार प्रत्येक गोल्ड ज्वेलरी पर यूनिक आईडेंटिफिकेशन नंबर डालना अनिवार्य किया गया है, कारोबारी के लिए ये सब करना काफी कठिन और अव्यवहारिक है। सरकार इस नियम को वापस ले। ज्वैलर्स के अनुसार सोने के जेवर पर हॉलमार्क कानून के अंतर्गत अघोषित एवं अप्रत्यक्ष रूप से लगाए गए कानून की विसंगतियां दूर हो। हमें हॉलमार्क नीति से आपत्ति नहीं है, लेकिन हॉलमार्क के साथ जो अप्रत्यक्ष रूप से यूआईडी की प्रक्रिया को शामिल किया जा रहा है यह अनुचित होने के साथ कारोबारी के समय, श्रम और धन को बर्बाद करने वाली है।

हॉलमार्क सेंटर खोले फिर यूआईडी की सोचें
मेरठ बुलियन ट्रेडर्स एसो. के महामंत्री विजयआनंद अग्रवाल कहते हैं ज्वैलर्स को बीआईएस से चार मोहर वाले गहने के पुराने स्टॉक के डिक्लेरेशन के लिए नोटिस मिला है। जबकि हॉलमार्किंग कानून की किसी भी धारा में इसका प्रावधान नहीं है। देश के 256 जिलों में ही हॉलमार्क सेंटर हैं, जबकि यूआईडी के लिए हर जिले में 10 हॉलमार्क सेंटर की जरूरत है। मेरठ के सराफा कारोबारी आकाश मांगलिक के अनुसार गहनों पर यूआईडी ग्राहक, विक्रेता की निजता भंग करता है। एचयूआईडी के लिए जो इंफ्रास्ट्रक्चर, हॉलमार्क सेंटर चाहिए वो नहीं हैं। विश्व के किसी भी देश में एचयूआईडी लागू नहीं हैं तो फिर भारत में ये नियम क्यों लागू हो रहा है। पहले सभी ज्वैलर्स को हॉलमार्किंग पंजीयन के दायरे में लाया जाए उसके बाद यूआईडी लागू हो।

एकतरफा सजा के प्रावधान, ज्वैलर्स का उत्पीड़न
मेरठ में सोने की थोकमंडी नीलगली सराफा व्यापार एसो. के महामंत्री दिनेश रस्तोगी कहते हैं सरकार ने यूआईडी के जो नियम बनाए हैं वो एकतरफा हैं। नियम में सजा के सारे प्रावधान केवल ज्वैलर पर लागू हो रहे हैं। जबकि हॉलमार्क सेंटर की जिम्मेदारी भी तय होना चाहिए। बीआईएस एक्ट में सराफा कारोबारी पर सजा का प्रावधान किया है उसे हटाया जाए। ज्वैलर की गलती साबित होने पर व्यावहारिक जुर्माना लगाकर दंडित किया जाए। मेरठ सदर सराफा बाजार के अध्यक्ष राजकुमार कहते हैं अगर गलती हॉलमार्क सेंटर की है तो कार्यवाही भी हॉलमार्क सेंटर के पर हो न कि ज्वैलर के खिलाफ एक्शन लिया जाए। मेरठ बुलियन ट्रेडर्स एसो. के अध्यक्ष प्रदीप जैन के अनुसार ज्वैलर्स के स्टॉक की जब्ती का प्रावधान होना गलत है। सरकार स्टॉक को गलाकर सजा दे सकती है मगर स्टॉक जब्त न करे। पुराने स्टॉक की डिक्लेरेशन की शर्त भी खत्म होनी चाहिए। हॉलमार्क सेंटर से जो गलती होती है, उस पूरे नुकसान की भरपाई हॉलमार्क सेंटर पर दी गई ज्वैलरी और वापस मिली ज्वैलरी के बीच वजन के अंतर पर लेनदेन की जिम्मेदारी तय हो।

हॉलमार्क का यह नया नियम लागू
सोने के गहनों की खरीदारी में धोखाधड़ी रोकने के लिए केंद्र सरकार ने गोल्ड हॉलमार्किंग को अनिवार्य कर दिया है। देश में अब BIS-भारतीय मानक ब्यूरो की हॉलमार्किंग (Gold Hallmarking)वाली गोल्ड ज्वैलरी ही बिकेगी।

नियम नहीं माना तो मिलेगी सजा
BIS एक्ट, 2016 की धारा 29 के तहत हॉलमार्किंग नियमों का उल्लंघन करने पर एक साल की जेल की सजा हो सकती है या न्यूनतम एक लाख रुपये का जुर्माना हो सकता है। जुर्माने की रकम बेचे गए गहनों की कीमत की पांच गुना से कम नहीं होनी चाहिए, हालांकि अगस्त तक कोई पेनाल्टी नहीं लगेगी।

क्या है गहनों पर यूआईडी
सरकार के नए नियम के तहत अब 1 जुलाई से हर नग की विशिष्ट पहचान (यूआईडी) बनवाना अनिवार्य है। इसमें ज्वैलर का कोड और नग की पहचान की डिटेल दर्ज होने का नियम बन चुका है। इससे ज्वेलरी कब और कहां से खरीदी गई इसकी पूरी जानकारी मिल जाएगी। इस यूआईडी (UID) को बीआईएस द्वारा बनाए जा रहे मोबाइल एप में फीडकर गहनों से संबंधित सभी डिटेल्स को चेक किया जा सकता है। इससे गहने चोरी के तो नहीं या नकली-असली की सच्चाई भी सामने आ जाएगी। यूआईडी के जरिए दुकानदार जान सकेंगे कि इस यूआईडी की ज्वेलरी उन्होंने किस ग्राहक को बेची थी।

मुख्य बिंदु
मेरठ में 2000 से अधिक सराफा कारोबारी
रोजाना 10 करोड़ रुपए का स्वर्ण कारोबार
एशिया की सबसे बड़ी सोना मंडी के नाम से मशहूर है मेरठ का स्वर्ण कारोबार
हाथ से सोने के गहने बनाने के लिए विश्वप्रसिद्ध है मेरठ
सोने की चेन, ठोस जेवर और निवेश के पक्के जेवर देशभर में सप्लाई
बंगाल, महाराष्ट्र के 30 हजार कारीगर मेरठ में हाथ से बनाते हैं गहने

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