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मेरठ में ब्लड क्राइसिस:कोरोना से एनीमिक हुए वेस्ट UP के ब्लड बैंक, घटा रक्तदाताओं का उत्साह; सिजेरियन डिलीवरी में महिलाओं को खून की दिक्कत

मेरठ24 दिन पहले
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थैलीसीमिया के मरीजों और सर्जरी में आ रही दिक्कत। न डोनर मिल रहे और न हो रहा ब्लड एक्सचेंज। - Dainik Bhaskar
थैलीसीमिया के मरीजों और सर्जरी में आ रही दिक्कत। न डोनर मिल रहे और न हो रहा ब्लड एक्सचेंज।

उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के सरकारी अस्पताल खून के संकट से जूझ रहे हैं। पिछले एक साल से अस्पतालों के ब्लड बैंक में खून की किल्लत है। मेरठ सहित वेस्ट यूपी के विभिन्न जिलों के रक्तकोश में खून का खजाना खाली हो चुका है। सरकारी अस्पतालों के रक्तकोशों में रेयर समूह का खून खोजे से भी नहीं मिल रहा। मरीज परेशान होकर वापस लौट रहे हैं। ब्लड बैंकों में खून की किल्लत है अगर तीमारदार अपना डोनर लेकर एक्सचेंज के लिए जाएं तो सेम ग्रुप का ब्लड मुश्किल से मिल रहा है। खून की कमी ने थैलीसीमिया के मरीजों को इलाज में परेशानी हो रही है। आपातकालीन सर्जरी में भी समान ग्रुप का खून जुटाना तीमारदारों के लिए मुसीबत बन रहा है।

कोरोना के कारण रक्तदान से बच रहे लोग
मेरठ के प्यारेलाल शर्मा जिला अस्पताल के रक्तकोश प्रभारी डॉ कौशलेंद्र कहते हैं, कोरोना के कारण रक्तदाताओं का उत्साह खत्म है। लोग कोरोना संक्रमण के खौफ के कारण रक्तदान करने अस्पताल नहीं आ रहे। नियमित रक्तदाता जो हर तीन महीने पर रक्तदान करने खुद आ जाते थे, वो भी इस समय रक्तदान से बच रहे हैं। अस्पताल में आकर रक्तदान करने से कहीं संक्रमण न हो जाए ये डर सता रहा है। सामाजिक दूरी के पालन के कारण हम लोग रक्तदान शिविर का आयोजन नहीं कर पा रहे। जो संस्थाएं पहले खुद हमें बुलाकर रक्तदान कैंप करती थीं। तमाम जयंती, विशेष दिवसों पर रक्तदान शिविर नियमित लगाती थीं, वो संस्थाएं इस समय आयोजन नहीं कर रहीं। हमारी टीम उनसे संपर्क कर रही है कि कैम्प लगा लें लेकिन लोग राजी नहीं हो रहे। सबको महामारी का खौफ है, इसलिए रक्तकोश खाली हो रहे हैं।

आम दिनों में लबालब रहते थे रक्तकोश, अब हैं सूने
जो रक्तकोश आम दिनों में खून से भरे रहते थे वो कोरोना के कारण सूने हैं। कई बार रक्तदान शिविर आयोजित होने पर इन रक्तकोशों में क्षमता से अधिक खून आ जाता था, जो खराब होने पर नष्ट किया जाता था। अब जरूरत पर भी मरीजों को देने लायक खून ब्लडबैंकों में नहीं हैं। निगेटिव एंटीजन और रेयर समूहों के खून की सबसे ज्यादा किल्लत बनी हुई है, ब्लड एक्सचेंज में भी दिक्कत हो रही है। गर्भवती महिलाओं को जिनका प्रसव सरकारी अस्पतालों में सीजेरियन से हो रहा है उनके तीमारदार खून के लिए भटक रहे हैं।

मेरठ ब्लड बैंक में 800 यूनिट स्टोरेज क्षमता खून बचा कुल 150 यूनिट
मेरठ के पीएल शर्मा जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में 800 यूनिट खून स्टोर करने की क्षमता है। वर्तमान में पिछले तीन महीने से ब्लड बैंक में 150 यूनिट से अधिक रक्त नहीं आ पाया है। 100 से 150 का अनुपात ही चल रहा है। इसमें कभी निगेटिव समूह का रक्त नहीं रहता, कभी पॉजिटिव समूह का रक्त नहीं रहता। वर्तमान में ब्लड बैंक में एबी निगेटिव, बी निगेटिव, ओ निगेटिव समूह का रक्त नहीं है।

रेफर करने पड़ रहे मरीज
डॉ कौषलेंद्र कहते हैं हर बुधवार थैलीसीमिया के मरीज आते हैं। हमारे पास 70 मरीज पंजीकृत हैं जो रोस्टर के अनुसार वीकली खून के लिए आते हैं। लेकिन पिछले दो से तीन महीने से उन मरीजों को खून कभी मिलता है कभी नहीं मिल पाता। उनको हम दूसरे ब्लडबैंक में रेफर कर रहे हैं। क्या करें मजबूरी हैं। हमारे पास 2हजार रक्तदाताओं का डेटा है जो रक्तदान करते रहते हैं। वर्तमान में दस फीसद रक्तदाता भी रक्तदान नहीं कर रहे। मेरठ के जिला अस्पताल के इस ब्लडबैंक को प्रदेश में बेस्ट ब्लड बैंक का अवार्ड भी मिल चुका हैं, क्योंकि यहां हमेशा खून की उपलब्धता रहती थी, सबसे ज्यादा कैम्प लगते और सबसे ज्यादा रक्तदान होता था। अब यहीं रक्त की किल्लत हो रही है।

बिजनौर ब्लड बैंक में बचा कुल 48 यूनिट रक्त
बिजनौर के ब्लड बैंक में कुल 48 यूनिट रक्त बचा है, बिजनौर के डिस्ट्रिक्ट ब्लड बैंक में 300 यूनिट खून रखने की क्षमता है, लेकिन कोरोना के कारण यहां कोई कैम्प आयोजित नहीं हुआ, न ही रक्तदाता स्वेच्छा से रक्तदान के लिए आए। कुल 48 यूनिट रक्त ही बचा है। गर्भवती महिलाओं या ऑपरेशन के लिए आपात स्थिति में खून की जरूरत पडती है तो खून का कोई इंतजाम नहीं है।

जिलेवार सरकारी ब्लडबैंक में खून की स्थिति
जिला - उपलब्ध रक्त
मेरठ पीएल शर्मा जिला अस्पताल - 150 यूनिट
मेरठ एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज ब्लड बैंक- 200 यूनिट
बागपत जिला अस्पताल- 37 यूनिट
बुलंदशहर जिला अस्पताल- 72 यूनिट
बिजनौर जिला अस्पताल- 50 यूनिट
गौतमबुद्ध नगर जिला अस्पताल- 17 यूनिट
मुजपफपुरनगर- 150 यूनिट
शामली जिला अस्पताल- 80 यूनिट

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