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मेरठ में कैप्टन श्रेयांश का अंतिम संस्कार:सिक्किम में थे तैनात, हार्ट अटैक से थमीं सांसें, पिता ने दी मुखाग्नि; बहन बोली- अब कौन कराएगा मेरी विदाई

19 दिन पहले
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सिक्किम में तैनात मेरठ के कैप्टन श्रेयांश कश्यप का हृदय गति रुकने से हुआ था निधन। - Dainik Bhaskar
सिक्किम में तैनात मेरठ के कैप्टन श्रेयांश कश्यप का हृदय गति रुकने से हुआ था निधन।

कैप्टन श्रेयांश कश्यप को रविवार सुबह अंतिम विदाई दी तो पूरा गांव रो पड़ा। मेरठ के मटौर गांव स्थित श्मशान घाट पर सेना ने सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। यहां आसपास के कई गांवों के लोग भी मौजूद थे। दरअसल, मेरठ निवासी कैप्टन श्रेयांश कश्यप (24) की हृदय गति रुकने से मृत्यु हो गई। उनकी पार्थिव देह को गांव लाया गया। वह उत्तरी सिक्किम की 15 हजार फीट की चोटी पर तैनात थे। इससे पहले 2019 में 108 इंजीनियर रेजीमेंट की बॉम्बे सैपियर्स में उन्हें आठ जून 2019 को पहली पोस्टिंग मिली थी।

श्रेयांश के पिता मूलत: बनारस के टिकरी गांव निवासी हैं। करीब 16 साल पहले जब उनकी पावर ग्रिड कारपोरेशन ऑफ इंडिया में नौकरी लगी तो वे मेरठ में रहने लगे। उनके बड़े बेटे श्रेयांश ने मोदीपुरम स्थित दयावती मोदी एकेडमी स्कूल से पढ़ाई की। उसके बाद गाजियाबाद के इंजीनियरिंग कॉलेज से पढ़ाई की। श्रेयांश का सपना था कि वह सेना में ही अफसर बनकर रहेगा। सेना में चयन होने के बाद IMA देहरादून गए थे, वहां भी अपना नाम रोशन किया। शादी की बात छिड़ी तो श्रेयांश ने कहा कि पहले मैं अपनी बड़ी बहन की शादी पहले करूंगा। इसके बाद बहन की शादी तय कर दी गई थी।

परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल।
परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल।

रविवार रात मेरठ पहुंची पार्थिव देह
कैप्टन श्रेयांश 108 इंजीनियर रेजिमेंट के साथ सिक्किम के विभिन्न क्षेत्रों में 15 हजार तक की ऊंचाइयों पर विभिन्न आउटपोस्ट को दुरुस्त करने के कार्य में जुटे थे। 27 मई 2021 को ड्यूटी के दौरान उन्हें सीने में दर्द उठा। हालत में सुधार नहीं हुआ तो उन्हें छंगथांग के 327 अस्पताल ले जाया गया। 28 मई को रात दस बजे कैप्टन श्रेयांश ने अंतिम सांस ली। सेना के अफसरों के अनुसार कैप्टन श्रेयांश को अधिक ऊंचाई पर निगरानी के वक्त ही सीने में दर्द की शिकायत होने लगी। पिता को 27 मई की शाम को बेटे की हालत नाजुक होने के बारे में बताया। मेरठ से उनके पिता भी पहुंच गए। पिता के सामने दौरा पड़ा जिसमें कैप्टन श्रेयांश की मौत हो गई।

परिवार के सदस्यों ने दी कैप्टन को सलामी।
परिवार के सदस्यों ने दी कैप्टन को सलामी।

बहन बिलख पड़ी, बोली- भैया मुझे अब कौन विदा करेगा
परिवार में बड़ी बहन सृष्टि जिनकी कुछ दिन बाद ही शादी होनी है। दूसरे नंबर के श्रेयांश और सबसे छोटा भाई शिवांश है। परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है। जब घर से कैप्टन श्रेयांश का पार्थिव शरीर को सैन्य अधिकारी लेकर चले तो बहन का रो-रोकर बुरा हाल था। बहन सृष्टि बिलखते हुए कहती रही- भैया अब मुझे कौन विदा करेगा, तुम कहते थे कि मैं सब अपने आप करूंगा। आज तो मैं अकेली रह गई हूं।

कैप्टन के पार्थिव शरीर काे पिता ने दी मुखाग्नि।
कैप्टन के पार्थिव शरीर काे पिता ने दी मुखाग्नि।

पिता ने दी मुखाग्नि
कैप्टन बेटे की पार्थिव देह को मुखाग्नि देते हुए शिव गोविंद सिंह बिलख पड़े। बोले- पूरे तरीके से टूट गया हूं, इतनी मेहनत से बेटे को पढ़ाया। बेटा इतना कमजोर तो नहीं था। बेटे की सांसें भी मेरे सामने ही थमीं, मैं कुछ न कर सका और न ही कह सका। मानो मेरा तो सब कुछ चला गया। गोविंद को सैन्य अधिकारी और परिवार के सदस्य व रिश्तेदार बार-बार संभाल रहे थे।

सैन्य सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार।
सैन्य सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार।

आसपास के ग्रामीण भी पहुंचे

कैप्टन श्रेयांश को आखिरी विदाई में भीड़ उमड़ पड़ी। गांव मटौर और आसपास के गांवों के ग्रामीण भी पहुंचे। लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। घर से जब पार्थिव शरीर को सेना के अफसर लेकर चले तो महिलाएं भी सैल्यूट करती नजर आईं।

श्रेयांश के अंतिम संस्कार के समय आसपास के गांवों के लोग भी पहुंचे।
श्रेयांश के अंतिम संस्कार के समय आसपास के गांवों के लोग भी पहुंचे।
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