महामारी से लोगों को मिल रही राहत:मेरठ में कोरोना की दवाइयों के नहीं मिल रहे खरीददार, 2500 दुकानों पर कोविड की 50 करोड़ से अधिक की दवाइयां स्टॉक में रुकीं

मेरठ3 महीने पहले
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उत्तर प्रदेश में कोरोना का असर जैसे जैसे कम हो रहा है वैसे वैसे मेडिकल स्टोरों में कोविड की दवाइयों का स्टॉक भी रुका हुआ है। फिलहाल मौजूद स्थिति को देखते हुए दवाइयों के थोक व फुटकर दुकानदार मुसीबत में फंसते नजर आ रहे हैं कि ऐसे समय में आखिर क्या किया जाए। मेरठ में करीब 50 करोड़ रुपये से अधिक कीमत की दवाइयां ऐसी हैं, जिनमें मेडिकल स्टोर व थोक स्टोरों में स्टॉक भरा हुआ है।

उधर, मरीजों की संख्या नहीं के बराबर रह गई है। वेस्ट यूपी में मेरठ अस्पतालों का हब बना हुआ है। जिले में 300 नर्सिंग होम/ अस्पताल हैं जबकि मेडिकल स्टोरों की बात करें तो शहर व देहात में दवाइयों की 5 हजार दुकान हैं। जिनमें 3 हजार दुकाने दवाइयों की फुटकर दुकानें हैं, जबकि 2000 ऐसी दुकानें हैं जिन से दवाइयां थोक में सप्लाई की जाती हैं।

अकेले खैरनगर मार्केट में ही 650 थोक की दुकानें हैं। दवाई कंपनियों ने यह कहकर हाथ खड़े कर दिए हैं कि जो भी कोविड की दवाइयां हैं उन्हें वापस नहीं लिया जाएगा। कोरोना की दवाइयों को छोड़कर अन्य सभी दवाइयों की वापसी है। ऐसे में कोविड की दवाइयां मेडिकल स्टोर पर ही स्टॉक में रुकी हुई हैं।

दवा की 2500 मुख्य दुकानें

खैर नगर दवा व्यापार मार्केट के महामंत्री रजनीश कौशल का कहना है कि सभी मेडिकल स्टोर व थोक की दुकानों पर कोरोना की दवाइयों का स्टॉक बचा हुआ है। दवा अब बिक नहीं रही हैं। दवाइयों की डिमांड भी खत्म हो चुकी है। जिले में करीब 2500 दुकानें ऐसी हैं जिनमें प्रत्येक दुकान पर औसतन 2 लाख रुपए से अधिक की कीमत की कोरोना की दवाई रुकी हुई है। यदि 2500 दुकानों का 2 लाख रुपये के हिसाब से औसत निकाले तो इन दवाइयों की कीमत 50 करोड़ रुपए पहुंच रही है। जबकि खैर नगर मार्केट में थोक की दुकानों पर इससे भी ज्यादा कीमत की दवाइयां स्टॉक में बची हुई हैं।

इन दवाइयों का स्टॉक

कोविड की जिन दवाइयों का स्टॉक मेडिकल स्टोर और थोक की दुकानों पर रुका हुआ है। उनमें रेमडेसीवीर, फेबी फ्लू, आइवरमैकटिन, डॉक्सीसाइक्लिन, जिंक, एजीथ्रोमाइसिन, यूटानिन पॉसकोनाज़ोल, हाइड्राक्सीक्लोरोक्वीन, एनोक्सापैरिन हैं।

अचानक से कम हुए कोरोना के मरीज

कोरोना की दूसरी लहर में ऐसा हाल रहा कि कोरोना की दवाइयों की कालाबाजारी भी खूब हुई। जिनमें रेमडेसीवीर इंजेक्शन ही सबसे ज्यादा ब्लैक में बेचा गया। पुलिस प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग ने छापेमारी भी की। अप्रैल व मई 2021 में कोरोना के ज्यादा मरीज मिले।

जहां 1 दिन में मेरठ में कोरोना के मरीजों की संख्या 2 हजार के पार पहुंचती थी। लेकिन जून माह में कोरोना के मरीजों की संख्या में अचानक से कमी आई है, इस समय मेरठ में कोरोना के 88 केस एक्टिव हैं। और हर रोज औसतन 3 मरीज मिल रहे हैं।

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