दिल्ली के सभी बॉर्डर पर किसान मनांएगे विजय दिवस:भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले होंगे शामिल, वेस्ट UP से भी किसान पहुंचेंगे

मेरठ8 दिन पहले
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तीनों कृषि कानूनों को रद्द कराने के लिए सरकार के खिलाफ वेस्ट यूपी, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान सहित देश के तमाम राज्यों के किसान पिछले एक साल से दिल्ली के बॉर्डर पर धरना दे रहे हैं। 26 नवंबर 2020 को शुरू हुए किसान आंदोलन को आज एक साल पूरा हो रहा है। दिल्ली के सभी बॉर्डर पर किसान जुटकर विजय दिवस मनांएगे। वेस्ट यूपी से भारी संख्या में किसान पहुंचेंगे।

गाजीपुर बॉर्डर पर जुटेंगे वेस्ट यूपी के किसान

आज दिल्ली के बॉर्डर पर जुटेंगे किसान, वेस्ट यूपी से जाएंगे गाजीपुर बॉर्डर
आज दिल्ली के बॉर्डर पर जुटेंगे किसान, वेस्ट यूपी से जाएंगे गाजीपुर बॉर्डर

किसान आंदोलन के एक साल पूरे होने पर आज 26 नवंबर को वेस्ट यूपी के सभी जिलों से भारी संख्या में किसान गाजीपुर बॉर्डर पहुंचेंगे। विभिन्न जिलों से किसान जत्थों में गाजीपुर बॉर्डर के किसान क्रांति गेट पर रवाना होंगे। वहां राकेश टिकैत की अगुआई में किसान आंदोलन के एक साल को मनाया जाएगा। संयुक्त किसान मोर्चा के आव्हान पर किसान गाजीपुर पहुंचेंगे जहां किसान महापंचायत होगी। आंदोलन के एक साल को किसान विजय दिवस के रूप में मनाएंगे।

मेरठ सिवाया टोल पर पहुंचेंगे किसान

5 सितंबर को मुजफ्फरनगर में हुई किसान महापंचायत में बनी आगे की रणनीति
5 सितंबर को मुजफ्फरनगर में हुई किसान महापंचायत में बनी आगे की रणनीति

मेरठ के सिवाया टोल प्लाजा पर किसानों ने एकजुट होनें का आव्हान किया है। भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले किसान यहां मिनी गाजीपुर पर एकत्र होकर पंचायत करेंगे। पिछले तीन महीनों से मेरठ और आसपास के जिलों के किसान बड़ी संख्या में इस टोल प्लाजा पर धरने पर बैठे हैं। संयुक्त किसान मोर्चा के सभी बड़े चेहरे इस टोल प्लाजा पर आकर किसानों से मिल चुके हैं।

राकेश टिकैत के आंसुओं ने आंदोलन से फिर खड़ा हुआ आंदोलन

26 जनवरी के बाद जब आंदोलन कमजोर पड़ने लगा तो राकेश टिकैत हुए भावुक
26 जनवरी के बाद जब आंदोलन कमजोर पड़ने लगा तो राकेश टिकैत हुए भावुक

आंदोलन को भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत के आंदोलन ने मूल धार दी। 26 जनवरी की हिंसा के बाद आंदोलन ढीला पड़ने लगा तो राकेश टिकैत 28 जनवरी को बातचीत के दौरान भावुक हो गए। किसान मसीहा बाबा महेंद्र सिंह टिकैत के बेटे राकेश टिकैत से जुड़ी किसानों की संवेदनाएं जाग उठी और थोड़ी देर में दिल्ली के बॉर्डर पर किसानों का जमघट लगने लगा। आंदोलन फिर खड़ा हो गया।

1साल चले आंदोलन में आए कई पड़ाव किसानों ने महापंचायतें की, जाम लगाए इसमें 700 किसानो ंकी मौत भी हुई
1साल चले आंदोलन में आए कई पड़ाव किसानों ने महापंचायतें की, जाम लगाए इसमें 700 किसानो ंकी मौत भी हुई

एक साल में आंदोलन के अहम पड़ाव
14 सितंबर 2020 कृषि कानूनों पर केंद्र ने अध्यादेश संसद में लाया।
17 सितंबर को लोकसभा में अध्यादेश पास हुआ।
3 नवंबर को कृषि कानून के खिलाफ देशभर में नाकेबंदी हुई।
25 नवंबर को पंजाब और हरियाणा में किसान संघों ने 'दिल्ली चलो' आंदोलन की हुंकार भरी। कोरोना के कारण किसानों को दिल्ली में प्रवेश नहीं मिला तो किसानों ने दिल्ली की सीमओं पर डेरा जमा दिया।
26 नवंबर को दिल्ली पुलिस ने किसानों को भगाने का प्रयास किया मगर किसान नहीं गए तो उत्तर-पश्चिम दिल्ली के निरंकारी मैदान में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के लिए दिल्ली में प्रवेश करने की अनुमति दी।
3 दिसंबर को सरकार ने किसानों, कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर के साथ दिल्ली के विज्ञान भवन में बैठक हुई इसमें 40 किसान नेता शामिल हुए थे। किसानों ने तीनों कानून रद्द करने का प्रस्ताव रखा मगर बात नहीं बनी।
8 दिसंबर को किसानों ने भारत बंद का आह्वान किया। देशभर में कई जगहों पर भारत बंद हुआ।
7 जनवरी 2021 नए कृषि कानूनों का मामला देश की सर्वोच्च अदालत में पहुंचा । सुप्रीम कोर्ट 11 जनवरी को नए कानूनों और विरोध के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई के लिए तैयार हुआ।
26 जनवरी को किसानों ने ट्रेक्टर रैली निकाली और दिल्ली के आईटीओ, लालकिला, नांगलोई आदि इलाकों में पहुंचे, लाल किले पर धार्मिक झंडा फहराया इससे काफी विवाद हुआ और किसानों पर मुकदमे दर्ज हुए।
6 फरवरी को किसानों ने तीन घंटे के लिए देशव्यापी चक्का जाम और सड़क नाकाबंदी की।
5 सितंबर को राकेश टिकैत के गृह जनपद यूपी के मुजफ्फरनगर में किसान महापंचायत बुलाई गई। देश की पहली महापंचायत थी जिसमें भारी भीड़ पहुंची। महापंचायत में दक्षिण भारत, पश्चिम बंगाल, पूर्वोत्तर, उत्तर भारत, मध्य भारत के राज्यों से किसान पहुंचे।
9 सितंबर को किसान बड़ी संख्या में करनाल पहुंचे और मिनी सचिवालय का घेराव किया।
11 सितंबर को किसानों और करनाल जिला प्रशासन के बीच पांच दिवसीय गतिरोध को समाप्त करते हुए, हरियाणा सरकार ने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश द्वारा 28 अगस्त को किसानों पर पुलिस लाठीचार्ज की जांच करने पर सहमति व्यक्त की।
15 सितंबर को किसान आंदोलन के कारण बंद पड़े सिंघु बॉर्डर पर रास्ता खुलवाने के लिए सरकार ने एक प्रदेश स्तरीय समिति का गठन किया था। इसमें दो आईएएस और दो आईपीएस को शामिल किया गया । हरियाणा गृह विभाग की तरफ से समिति में चार सदस्यों का नाम राज्यपाल को भेजा गया है।
17 सितंबर 2021 को शिरोमणि अकाली दल ने तीन कृषि कानूनों के अधिनियमन के एक वर्ष पूरा होने पर काला दिवस मनाया।
21 अक्तूबर को बंद सड़के खुलवाने के लिए दायर याचिका पर सुनवाई हुई, सुप्रीम कोर्ट ने फटकार लगाई।