कूड़ा से लेकर नाला सफाई तक में शहर पिछड़ा:गंदगी के ढेर पर खड़े मेरठ को आज मिलेगा स्वच्छता सम्मान, नाले में गिरकर युवक की मौत

मेरठ2 महीने पहले
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मेरठ आज तक स्मार्ट सिटी योजना का हिस्सा नहीं बन सका। 20 लाख की आबादी वाले शहर में कूड़ा निस्तारण से लेकर नाला सफाई में प्रशासन फेल रहा है। जगह-जगह गंदगी का अंबार लगा है। सड़काें के किनारे गंदगी से पटे नाले खुले हैं। इसी नाले में शुक्रवार की देर रात एक युवक की गिरकर मौत हो गई। रोज 900 मीट्रिक टन कूड़ा निकलने वाले शहर में महज 650 टन कूड़ा ही उठ पाता है। 250 टन कूड़ा रोज शहर में पड़ा रहता है। हालात खाराब होने पर भी 20 नवंबर को दिल्ली के विज्ञान भवन में मेरठ को स्वच्छता के पुरस्कार से नवाजा जाएगा।

10 फीट गहरे नाले में गिरा युवक

मेरठ में शुक्रवार की देर रात एक युवक की 10 फीट गहरे नाले में गिरकर मौत हो गई। लिसाड़ीगेट थाना क्षेत्र के श्यामनगर निवासी मोहम्मद चांद (34) पुत्र अनवर ओडियन नाले के रास्ते घर जा रहा था। ब्रह्मपुरी थाने के पास चांद ओडियन नाले में वह गिर गया। इससे उसकी मौत हो गई। दो घंटे बाद पुलिस ने जेसीबी की मदद से उसका शव बाहर निकलवाया। घटना के आसपास के लोगों ने हंगामा किया। कहा आए दिन नालों में गिरकर लोग घायल हो रहे हैं। इसके बाद भी नगर निगम लापरवाह बना है।

रोजाना निकलता है 900 मीट्रिक टन कूड़ा
मेरठ से रोजाना 900 मीट्रिक टन कूड़ा निकलता है। इसमें नगर निगम के पास ताजे कूड़े के प्रबंधन के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। इसको लोहिया नगर सहित शहर में बने ढलाव घरों में डंप किया जाता है। कूड़ा उठाने के लिए मेरठ नगर निगम के पास सिर्फ 160 गाड़ियां हैं। इससे 650 टन कूड़ा ही उठ सकता है। व्यवस्था की कमी के चलते गंदगी से शहर पटा रहता है। 2176 सफाई कर्मी शहर की सफाई में लगे हैं। 50 ट्रैक्टर, 7 बड़े डंपर सफाई के काम में लाए जाते हैं। जबकि शहर के सभी 90 वार्डों में 300 कूड़ा गाड़ियों की डिमांड है।

मेरठ में नाले, डेयरी, मीटेक्स प्लांट वेस्ट, इंडस्ट्रियल वेस्ट के मैनेजमेंट का कोई प्रबंधन नहीं है।
मेरठ में नाले, डेयरी, मीटेक्स प्लांट वेस्ट, इंडस्ट्रियल वेस्ट के मैनेजमेंट का कोई प्रबंधन नहीं है।

NGT की फटकार के बाद बना कूड़ा निस्तारण प्लांट
20 लाख की आबादी और 90 वार्ड वाले मेरठ में जनता कचरे के ढेर पर रहने को मजबूर है। शहर में NGT के हस्तक्षेप के बाद कूड़ा निस्तारण प्लांट शुरू हुआ। 2019 में गांवड़ी में पहला कूड़ा निस्तारण प्लांट लगा। जो 15 टन कूड़ा प्रति घंटे की क्षमता का प्लांट है। लेकिन, यहां केवल पुराना कूड़ा निस्तारित होता है। इसी तरह 2021 में लोहिया नगर में 30 टन प्रति घंटे की क्षमता वाला प्लांट चालू हुआ है। लेकिन, ताजे कूड़े का निस्तारण आज भी शहर में नहीं है।

शहर में जगह-जगह लगे हैं कूड़े के ढेर। स्पोर्ट्स सिटी और इंडस्ट्रियल सिटी होने के बाद भी मेरठ नगर निगम, जिला प्रशासन सफाई में पिछड़ा है।
शहर में जगह-जगह लगे हैं कूड़े के ढेर। स्पोर्ट्स सिटी और इंडस्ट्रियल सिटी होने के बाद भी मेरठ नगर निगम, जिला प्रशासन सफाई में पिछड़ा है।

2000 डेरियां, 50 मीट्रिक टन गोबर का कोई मैनेजमेंट नहीं
शहर में आज भी 2000 डेरियों से रोजाना 50 मीट्रिक टन गोबर निकलता है। लेकिन, इसके मैनेजमेंट का कोई हल नगर निगम नहीं कर सका है। रोजाना यह गोबर नालियों में बहाया जाता है या फिर कूड़ा घरों में फेंक दिया जाता है। शहर में 56 ढलाव घर हैं। नगर निगम सीमा में 146 अस्थायी खुले कूड़ा घर हैं। जहां गोबर फेंका जाता है।

केंद्र की स्मार्ट सिटी नहीं बन सका मेरठ
2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद स्वच्छता सर्वेक्षण के आधार पर प्रमुख शहरों को स्मार्ट सिटी में शामिल किया गया। लेकिन, मेरठ आज तक उसमें नहीं आ सका। 2014 में केंद्र में मोदी और यूपी में सपा सरकार थी। भाजपा और सपा नेता मेरठ को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए एक-दूसरे का विरोध करते रहे। मगर सफाई पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। हाल में राज्य के स्मार्ट सिटी योजना में मजबूरन नाम शामिल किया गया।

NCR का हिस्सा, मगर गंदगी का अंबार
दिल्ली से सटा मेरठ NCR के बड़े शहरों का हिस्सा है। नेशनल कैपिटल रीजन की सभी योजनाओं में मेरठ का नाम आता है। रैपिड रेल, मेट्रो ट्रेन, ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, गंगा एक्सप्रेस-वे, आईटी पार्क, स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी जैसे बड़े डेवलपमेंट प्रोजेक्ट होने के बाद भी शहर में गंदगी का अंबार है। स्पोर्ट्स सिटी और इंडस्ट्रियल सिटी होने के बाद भी मेरठ नगर निगम, जिला प्रशासन सफाई में पिछड़ा है।

मेरठ कैंट, मेरठ सिटी को मिलेगा सम्मान
स्वच्छता सर्वेक्षण में 20 नवंबर को मेरठ कैंट और शहर को स्वच्छता के लिए सम्मानित किया जाएगा। यूपी में वाराणसी कैंट और मेरठ कैंट सहित कुल 11 शहरों को यह सम्मान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद देंगे। सम्मानित होने वाले 11 शहरों में हापुड़ भी शामिल है। यह पहली बार है जब मेरठ शहर को स्वच्छता के लिए सम्मानित किया जाएगा। केंद्र सरकार ने स्वच्छता सर्वेक्षण-2021 और स्वच्छ अमृत महोत्सव की सूची में वाराणसी, मेरठ, हापुड़, गाजियाबाद, नोएडा, लखनऊ, पटियाला, गजरौला, हसनपुर, आवागढ़, कन्नौज के नगर निकाय को शामिल किया है।

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