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मेरठ में दवा खरीद घोटाले में 15 साल बाद FIR:तत्कालीन सीएमओ, अपर निदेशक समेत 17 के खिलाफ मेरठ में दर्ज हुआ है केस, ज्यादातर अफसर अब रिटायर हो चुके हैं

मेरठ3 महीने पहलेलेखक: मनु चौधरी
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मेरठ में 15 साल पहले हुए दवाई घोटाले में शासन ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। शासन ने जहां पूरे मामले में गोपनीय जांच कराई। वहीं इस मामले में तत्कालीन सीएमओ और एसीएमओ स्टोर समेत 17 के खिलाफ संगीन धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है। यह एफआईआर लंबे समय की जांच के बाद शासन के निर्देश पर दर्ज हुई है। एफआईआर दर्ज होने के बाद अफसरों में हड़कंप की स्थिति मची है।

साल 2004 से साल 2006 तक मेरठ में दवा खरीद में भारी घोटाला किया गया था। इस मामले में लगातार जांच एजेंसियों ने जांच की। शासन लगातार इस मामले में जांच कराता रहा। जबकि घोटाले में शामिल स्वास्थ्य विभाग के बड़े अधिकारी अपने बचाव में जुट गए। जांच में सामने आया की घोटाले में उस समय तैनात रहे सभी अधिकारियों ने मिलीभगत से दवाइयों की खरीद में भारी हेराफेरा की।

शासन ने कराई गोपनीय जांच

एक अधिकारी के अनुसार 2004 - 05 व 2005 - 06 में तत्कालीन सीएमओ, अपर निदेशक, वरिष्ठ डॉक्टरों न अन्य कर्मचारियों ने मिलीभगत करके यूपीडीपीएम फर्म में फर्जी डायवर्जन लेटर बनाकर वितरक द्वारा नकली दवाईयों की आपूर्ति करने की गंभीर अनियमितता व शासकीय धन को गबन करने की जांच लखनऊ द्वारा कराई गई। जांच एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट शासन को भेजी। जांच में सामने आया है की इन अधिकारियों ने आपस में मिलकर सरकारी धन की बंदरबाट की। इसमें सभी की भूमिका रही है। जिसके बाद शासन ने निर्देश दिए की सभी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की जाए। एफआईआर दर्ज होते ही आरोपियों पर गिरफ्तारी का खतरा मंढरा रहा है। इनमें तत्कालीन सीएमओ व अपर निर्देशक और प्यारेलाल जिला अस्पताल की मुख्य अधीक्षिका समेत अधिकांश आरोपी सेवानिवृत भी हो चुके हैं।

मेरठ मंडल के सभी 5 जिलों में दवाई सप्लाई की गईं

जांच में सामने आया कि यूपीडीपीएल की दवाइयों को मेरठ मंडल के सभी जिलों में फर्जी तरह से सप्लाई किया गया। मेरठ, बागपत, बुलंदशहर, गौतमबुद्धनगर, गाजियाबाद के मुख्य चिकित्साधिकारियों के स्टोर द्वारा सही वितरण नहीं किए जाने व दवाइयों का गलत तरह से दुरुपयोग किया गया। मेरठ मंडलीय स्टोर की दवाइयों की बुक रजिस्टर, वितरण रजिस्टर व उनसे संबंधित बाउचर बुक भी गायब कर दिए गए। मेरठ के महिला जिला अस्पताल में कार्यरत मुख्य चिकित्सा अधीक्षिका डॉ कल्याणी गुप्ता तथा स्टोर कीपर आरके सक्सेना पर दवाइयों को मोटी हेराफेरी की गई। उस समय हापुड़ जिला नहीं था।

गंभीर धाराओं में केस दर्ज

एक अधिकारी ने बताया की शासन के निर्देश पर मेरठ में गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया है। इनमें तत्कालीन सीएमओ डॉ एके त्यागी, तत्कालीन अपर निदेशक और तत्कालीन मुख्य चिकित्सा अधीक्षिका भी शामिल हैं। इन सभी 17 आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988, धारा 201, 204, 409, 420, 467, 468, 471, 120 बी के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।

पूर्व सीएमओ एके त्यागी समेत 17 नामजद

  • पूर्व सीएमओ डॉक्टर एके त्यागी
  • डॉ. जीके गुप्ता एसीएमओ स्टोर
  • शंभूलाल शुक्ला फार्मासिस्ट
  • दर्शनलाल बहुगुणा उपमहाप्रबंधक विपनन
  • भरत सिंह रावत अधिशासी वाणिज्यियक अधिकारी
  • डॉ हंस कुमार तत्कालीन चिकित्सा अधीक्षक
  • डॉ डीसी सक्सैना
  • डॉ नाहर सिंह पाल एसएमओ स्टोर
  • मोहम्मद मुस्तकीम फार्मासिस्ट
  • सुरेश चौरसिया
  • राजेंद्र किशोर अरोड़ा
  • डॉ रामकिशुन
  • डॉ एके त्यागी अपर निदेशक
  • डॉ सुनील कुमार जैन नेत्र चिकित्सक
  • अनिल कुमार
  • डॉ कल्याणी गुप्ता चिकित्सा अधीक्षिका
  • राजेंद्र कुमार सक्सेना फार्मासिस्ट
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