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पहली बार गैंगस्टर को मिली सजा:सपा नेता हत्याकांड में पश्चिमी UP के कुख्यात सुंदर भाटी समेत 12 को उम्रकैद; मारे गए गनर के परिवार को 1 लाख भी देना होगा

ग्रेटर नोएडा2 महीने पहले
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अभी तक सुंदर भाटी मामलों में पक्षकारों व गवाहों को डरा-धमकाकर बच निकलता था। लेकिन इस बार उसकी एक न चली और उम्रकैद की सजा सुनाई गई। फिलहाल वह जेल में है। - Dainik Bhaskar
अभी तक सुंदर भाटी मामलों में पक्षकारों व गवाहों को डरा-धमकाकर बच निकलता था। लेकिन इस बार उसकी एक न चली और उम्रकैद की सजा सुनाई गई। फिलहाल वह जेल में है।

उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्धनगर जिले में पांच साल पहले हुए समाजवादी पार्टी के नेता हरेंद्र नागर और उनके सरकारी गनर की हत्या मामले में सोमवार को जिला सत्र न्यायालय ने अपना फैसला सुनाया। इस प्रकरण में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुख्यात गैंगस्टर सुंदर भाटी और उसके 11 गुर्गों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। वहीं, गोलीकांड में मारे गए पुलिसकर्मी के परिजनों को 1 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने का भी आदेश दिया है। बता दें कि सुंदर भाटी को पहली बार किसी मामले में सजा सुनाई गई है।

8 फरवरी 2015 को हुई थी हत्या
8 फरवरी 2015 को समाजवादी पार्टी सरकार के दौरान कासना कोतवाली क्षेत्र स्थित नियाना गांव में एक शादी समारोह से लौटते समय दादूपुर के ग्राम प्रधान हरेंद्र नागर जो कि सपा नेता भी थे, उनपर जानलेवा हमला किया गया था। जिसमें हरेंद्र नागर और उनके सरकारी गनर भूदेव शर्मा की मौत हो गई थी। साथ ही इस गोली बारी में एक बदमाश जतिन खत्री भी मारा गया था। दरअसल, हरेंद्र प्रधान और सुंदर भाटी के बीच सरिया चोरी, फैक्ट्री के स्क्रैप व पीने के पानी की सप्लाई को लेकर दुश्मनी हो गई थी। सुंदर भाटी चाहता था कि हरेंद्र उसके रास्ते में न आए और ठेके लेना बंद कर दे। लेकिन वर्चस्व की जंग व ठेके के विवाद में सुंदर भाटी ने उसकी हत्या करवा दी।

25 मार्च को कोर्ट ने दोषी करार दिया था, एक बरी

इस प्रकरण में सुंदर भाटी समेत 13 लोगों के खिलाफ केस दर्ज हुआ था। पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार किया था। तब से अब तक कुल 22 गवाह पेश किए गए। बीते 25 मार्च को इस बहुचर्चित केस में न्यायालय ने सुंदर भाटी, सिंघराज व उसके गिरोह के ऋषि पाल, कालू, बिल्लू, अंकित, विकास 12 अभियुक्तों को दोषी करार दिया था। आज सभी दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। वहीं, साकीपुर निवासी मनोज को केस से बरी कर दिया गया। वह घटना के दौरान राजस्थान के मेहंदीपुर बालाजी गया था।

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