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हॉकी के जादूगर के परिवार का अपमान:मेरठ में मेजर ध्यानचंद खेल विश्वविद्यालय के शिलान्यास में उन्हीं के परिवार के किसी सदस्य को न्योता नहीं

मेरठ6 महीने पहले
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मेजर ध्यानचंद के बेटे अशोक ध्यानचंद। - Dainik Bhaskar
मेजर ध्यानचंद के बेटे अशोक ध्यानचंद।

हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद के नाम पर मेरठ में खेल विश्वविद्यालय बन रहा है। मगर, इसमें उन्हीं के परिवार का अपमान भाजपा ने किया है। खेल विश्वविद्यालय के शिलान्यास समारोह में मेजर ध्यानचंद के परिवार के किसी भी सदस्य को न्योता नहीं दिया गया है। आयोजन में उत्तर प्रदेश के हर जिले से छोटा-बड़ा खिलाड़ी होगा। मगर ध्यानचंद के परिवार का कोई सदस्य इसमें नहीं होगा, जिनके नाम से यह विश्वविद्यालय बन रहा है।

दो जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मेरठ, सलावा में यूपी के पहले खेल विश्वविद्यालय का शिलान्यास करने आ रहे हैं। मेजर ध्यानचंद के बेटे अशोक ध्यानचंद को खेल निदेशालय ने हॉकी खिलाड़ी के तौर पर आयोजन में शामिल होने के लिए बुलाया था। मगर, मेजर ध्यानचंद के बेटे होने के नाते उन्हें निजी रूप से कोई न्योता नहीं दिया गया। उनके परिवार के किसी भी सदस्य को समारोह का निमंत्रण नहीं मिला है।

हॉकी खिलाड़ी की हैसियत से बुलाना चाहते हैं

मेजर ध्यानचंद के नाम पर मेरठ में बन रहा है खेल विश्वविद्यालय।
मेजर ध्यानचंद के नाम पर मेरठ में बन रहा है खेल विश्वविद्यालय।

झांसी में मेजर ध्यानचंद का परिवार रहता है। उनके बेटे अशोक ध्यानचंद से दैनिक भास्कर ने जब आयोजन के सिलसिले में बात की तो उन्होंने अपना दर्द बयां किया। कहा कि चार दिन पहले मेरे पास खेल डायरेक्टर का कॉल आया था। बताया गया कि दो जनवरी को मेरठ में मेजर ध्यानचंद खेल विश्वविद्यालय का शिलान्यास समारोह है। उसमें पीएम नरेंद्र मोदी शामिल होने आ रहे हैं।

यूपी के कई खिलाड़ी वहां पीएम से मिलेंगे, चूंकि आप भी हॉकी खेलते हैं इसलिए आप भी आयोजन में आइए। उन्होंने मुझे यूपी के खिलाड़ी की हैसियत से आने को कहा। यूपी के खिलाड़ी के तौर पर मुझे आयोजन के लिए बुलाया। वो प्रदेश के सभी खिलाड़ियों को फोन कर रहे थे, इसलिए मुझे भी फोन कर दिया कि आप भी आएं।

यदि मैं खिलाड़ी नहीं होता तो शायद मुझे भी फोन नहीं करते। बहरहाल, मैं दो जनवरी को मैं रीवा की एक यूनिवर्सिटी में स्पोर्ट्स इवेंट में बतौर अतिथि दो महीने पहले ही अपनी डेट दे चुका हूं। मेरा वहां जाना जरूरी है, इसलिए मैंने मेरठ आने से इंकार कर दिया।

पिता के नाम पर यूनिवर्सिटी बनना गर्व की बात

हॉकी स्टिक पर बॉल आने के बाद सीधे गोल में ही जाती थी।
हॉकी स्टिक पर बॉल आने के बाद सीधे गोल में ही जाती थी।

अशोक ध्यानचंद ने कहा कि मेरे पिता के नाम पर खेल विश्वविद्यालय बन रहा है। इससे बड़े सम्मान और गर्व की बात मेरे या मेरे परिवार के लिए नहीं हो सकती। उनका बेटे होने के नाते मुझे या मेरे परिवार को आयोजन के लिए कोई निमंत्रण पत्र नहीं भेजा गया। आप ही बताएं कि इसे पिता का सम्मान समझें या परिवार का अपमान।

अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित हैं अशोक ध्यानचंद

71 वर्षीय अशोक ध्यानचंद 1974 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित हो चुके हैं। उन्होंने तीन विश्व कप खेले हैं। साल 1975 में विश्व कप जीतने वाली भारतीय हॉकी टीम में अशोक भी शामिल थे। उन्होंने दो बार 1972 में म्यूनिख में और 1976 में मॉट्रिंयल में ओलंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया है। अशोक ध्यानचंद कहते हैं यूपी में स्पोर्ट्स विश्वविद्यालय और बनने चाहिए। स्पोर्ट्स कॉलेज, स्पोर्ट्स स्कूल भी यूपी में बनने चाहिए।

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