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ओलंपिक के बाद स्पोर्ट्स मार्केट में बूम:मेरठ में एथलेटिक्स आइटम के कारोबार में 15% की बढ़ोत्तरी, कोविड के बाद बढ़ी होम जिम की मांग, घरेलू और विदेशी दोनों बाजारों से मिल रहे ऑर्डर

मेरठ8 महीने पहले

कोरोना की दूसरी लहर के बाद कमजोर पड़े खेल उद्योग में ओलंपिक ने जोश भरा है। मैदान, स्कूल और कॉलेज खुलते ही खेल से जुड़े उपकरणों की मांग बढ़ने लगी है। बाजार से लेकर खेल निर्माता कंपनियों तक के पास सामान के ऑर्डर आने लगे हैं। बड़ा बदलाव एथलेटिक्स आइटम के कारोबार में आया है। खेल उद्यमियों की मानें तो ट्रैक एंड फील्ड उपकरणों की मांग में 15 फीसदी इजाफा हुआ है।

ओलंपिक खेलों को अभी एक महीना बीता है, लेकिन उसका असर भारतीय खेल उपकरणों के बाजार पर साफ दिख रहा है। हिंदुस्तान की सबसे बड़ी स्पोर्ट्स सिटी मेरठ में एथलेटिक्स उपकरणों की मांग बढ़ी है। निर्माताओं के अनुसार भाला, गोला, तवा और चक्का जैसे उपकरणों की घरेलू मांग में तेजी आई है। जो भारत में ट्रैक एंड फील्ड इंडस्ट्री के लिए अच्छे संकेत हैं।

कोरोना की पहली लहर के बाद से होम जिम के प्रति बढ़ा है रुझान
कोरोना की पहली लहर के बाद से होम जिम के प्रति बढ़ा है रुझान

नीरज चोपड़ा के स्वर्ण पदक का बड़ा असर है
सूरजकुंड स्पोर्ट्स मार्केट में मीशा स्पोर्ट्स के संचालक गौरव महाजन कहते हैं कि ओलंपिक और पैरालंपिक में भारतीय एथलीट्स के दमदार प्रदर्शन ने भारत में एथलेटिक्स को पुर्नजीवन दिया है। नीरज चोपड़ा ने भाला फेंक में गोल्ड जीता। इससे लोगों की सोच बदली है। कोरोना से पहले हम दिनभर में 4 भाले बेच पाते थे, लेकिन अब एक दिन में 8 से 10 भाले बिक रहे हैं। इन उपकरणों के बड़े ऑर्डर भी आने लगे हैं। कई स्कूल पहले एथलेटिक्स से जुड़े आइटम मंगाते ही नहीं थे, लेकिन अब वो ये आइटम मंगा रहे हैं।

सरकार खेल उपकरणों पर जीएसटी घटाए तो भारत इस क्षेत्र में बादशाह बन सकता है
सरकार खेल उपकरणों पर जीएसटी घटाए तो भारत इस क्षेत्र में बादशाह बन सकता है

अंतराष्ट्रीय स्तर पर कई देशों ने चाइना से आइटम मंगाना कम किया है, कुछ ने तो बिल्कुल बंद कर दिया है। ये देश अब भारत से खेल उपकरण मंगा रहे हैं। अगर भारतीय सरकार स्पोर्ट्स इंडस्ट्री को सुविधा दे, तो भारतीय खेल उद्योग आने वाले 4 सालों में खेल कारोबार में बड़ी शक्ति बन सकता है। सरकार खेल उपकरणों पर जीएसटी की दरें कम करे।

स्कूल खुलने से उपकरणों की मांग बढ़ी है
30 साल से क्रिकेट की गेंद, बल्ला, किट बनाने वाली कंपनी प्रीमियर लेगगार्ड के एमडी सुमनेश अग्रवाल कहते हैं कि खेल उपकरणों की बड़ी मांग स्कूलों में होती है। कोरोना में स्कूलों में खेल गतिविधियां पूरी तरह बंद थीं। ऐसे में खेल उपकरणों की मांग काफी घट गई। स्कूल और कॉलेज खुलने से खेल गतिविधियां शुरू हुई हैं। इसलिए उपकरणों की मांग बढ़ी है। अब क्रिकेट उपकरणों के अलावा स्कूलों से ट्रैक एंड फील्ड की डिमांड अच्छी आ रही है। हर्डल, रिंग, शॉटपुट, डिस्कस और जैवलिन सभी की मांग में 10 से 15 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है। अब स्कूल क्रिकेट से अलग बच्चों को कुछ सिखाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।

क्रिकेट आइटम के अलावा अब फिटनेस और एथलेटिक्स उपकरणों की मांग बढ़ी है
क्रिकेट आइटम के अलावा अब फिटनेस और एथलेटिक्स उपकरणों की मांग बढ़ी है

स्टेडियम, स्पोर्ट्स एकेडमी और कमर्शियल एक्टिविटी में बहार
तीन दशक से ट्रैक एंड फील्ड में डील कर रही कंपनी नेलको के एमडी अंबर आनंद के मुताबिक दुनिया के सभी स्पोर्ट्स इवेंट में हमारा ब्रांड आपको दिखेगा। हम जैवलिन, शॉटपुट, डिस्कस से लेकर ट्रैक एंड फील्ड का हर आइटम सप्लाई करते हैं। कोविड-19 में केवल इनडोर आइटम की मांग थी।

वे कहते हैं कि अब स्टेडियम, ग्राउंड और स्पोर्ट्स एकेडमी शुरू हुए हैं। कमर्शियल एक्टिविटी शुरू होने से उपकरणों की मांग बढ़ी है। लेकिन ओलंपिक से स्पोर्ट्स इंडस्ट्री में बड़ा बदलाव हुआ है। अब लोग अपने बच्चे को भाला, धनुष बाण, हॉकी, डिस्कस खेलते देखना चाहते हैं। केवल अच्छा क्रिकेटर नहीं, अब भारत में अच्छे एथलीट बनने पर भी काम हो रहा है।

कोरोना की पहली लहर में मेरठ से खाड़ी देशों को कैरमबोर्ड का बड़ा निर्यात हुआ
कोरोना की पहली लहर में मेरठ से खाड़ी देशों को कैरमबोर्ड का बड़ा निर्यात हुआ

दूसरी लहर में जो कारोबार घटा था, ओलंपिक से लौटा
मेरठ में सूरजकुंड स्पोर्ट्स गुड्स व्यापार संघ के अध्यक्ष अनुज सिंघल की मानें तो कोरोना की पहली लहर में कैरम बोर्ड की काफी मांग थी। लॉकडाउन की दिक्कतों के कारण मांग पूरी नहीं कर पा रहे थे। कंसाइनमेंट अटके थे। कैरमबोर्ड, शतरंज, लूडो, रैकेट और बैडमिंटन की मांग घरेलू बाजार के साथ-साथ खाड़ी और यूरोपीय देशों में भी थी। निर्यात में सुधार हुआ। दूसरी लहर में बाजार डाउन रहा। वे कहते हैं कि ओलंपिक के बाद से क्रिकेट के अलावा दूसरे उपकरणों की मांग 15 फीसदी तक बढ़ी है।

हर बड़े खेल मुकाबले में मेरठ से खेल उपकरण विदेशों में जाते हैं
हर बड़े खेल मुकाबले में मेरठ से खेल उपकरण विदेशों में जाते हैं

होम जिम और छोटे फिटनेस आइटम की इंडस्ट्री बढ़ी है
जिम और फिटनेस उपकरणों के डीलर सुबोध शर्मा के अनुसार कोरोना की पहली लहर के बाद फिटनेस उपकरणों की मांग में बूम आया। लोगों ने घर पर ही ट्रेडमिल, साइकिल, वेट, डंबल, बॉल और मैट जैसे आइटम रखकर जिम सेटअप कर लिया। ताकि एक्सरसाइज करते रहें। वो डिमांड अभी भी बनी है।

30 से अधिक बड़ी औद्योगिक इकाइयां मेरठ से खेल उपकरण निर्यात करती हैं
30 से अधिक बड़ी औद्योगिक इकाइयां मेरठ से खेल उपकरण निर्यात करती हैं

सरकार ध्यान दे तो हम चाइना को पीछे छोड़ देंगे
सरकार को खेल कारोबार के प्रति सोच बदलनी होगी। खेल उपकरणों पर जीएसटी की दर को 2 से 5 प्रतिशत करना होगा। तभी भारत में खेल कारोबार और खिलाड़ी आगे बढ़ेंगे। ट्रैक एंड फील्ड और फिटनेस से जुड़े उपकरण बनाने में चाइना दुनिया का नंबर वन देश है। कोरोना फर्स्ट बेव से ही चाइना की छवि वैश्विक स्तर पर खराब हुई, इसका असर उसके खेल उद्योग पर भी पड़ा।

मेरठ के खेल उद्योग से जुड़ी कुछ अन्य जरूरी बातें

  • 1947 के विभाजन के बाद पाकिस्तान से आए खेल उद्यमियों के परिवारों ने मेरठ में खेल उपकरण बनाना शुरू किया। आज मेरठ देश की सबसे बड़ी स्पोर्ट्स इंडस्ट्री है।
  • प्रदेश सरकार ने एक जिला एक उत्पाद योजना में मेरठ के खेल उद्योग को चुना है।
  • मेरठ में एसजी, एसएस, एसएफ, नेलको, बीडीएम, स्टैग, नेशनल स्पोर्ट्स, योनेक्स, भल्ला, विनेक्स, एटीई और एचआरएस जैसी अंतराष्ट्रीय स्तर की खेल उपकरण निर्माता इकाइयां हैं, जो खेल उपकरण एक्सपोर्ट करती हैं।
  • एथलेटिक्स, क्रिकेट, फुटबॉल और टेबिल टेनिस के अलावा स्पोर्ट्स वियर, स्पोर्ट्स शूज और जिम एंड फिटनेस से जुड़े उपकरण भी बड़े पैमाने पर बनते हैं।
  • 30 बड़े एक्सपोर्ट हाउस, 3500 स्पोर्ट्स इंडस्ट्री हैं, इनसे डेढ़ लाख वर्कर्स जुड़े हैं।
  • शहर में शोरूम से बिजनेस होता है, इंडस्ट्रियल एरिया में फैक्ट्री हैं, गांवों में बड़ी तादात में कामगार रॉ मटेरियल से खेल उपकरण का फर्स्ट स्टेप पूरा करते हैं।
  • कॉमनवेल्थ, ओलंपिक्स, पैरालिंपिक, वर्ल्ड कप और आईपीएल जैसे खेल के हर बड़े मुकाबले में उपकरण मेरठ से जाते हैं।
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