टोक्यो ओलिंपिक: बॉक्सिंग में मेडल की उम्मीदें टूटी:उज्बेकिस्तान के खिलाड़ी से हारे बुलंदशहर के सतीश, हाथ और चेहरे पर गंभीर चोट के बावजूद डटकर मुकाबला किया

मेरठ/बुलंदशहर3 महीने पहले
बुलंदशहर के रहने वाले सतीश ओलंपिक में मेडल की रेस से बाहर हो गए हैं।

ओलंपिक में भारतीय बॉक्सर सतीश कुमार हैवीवेट में वर्ल्ड नंबर वन जलोलोव बखोदिरि से हार कर मेडल की रेस से बाहर हो गए। उज्बेकिस्तान के जलोलोव बखोदिरि को पहले राउंड में सभी जजों ने 10-10 अंक दिए। दूसरे राउंड में भी फैसला बखोदिरि के पक्ष में रहा। तीसरे राउंड में भी वह आसानी से जीत गए। सतीश ने काफी कोशिश की लेकिन जलोलोव के आगे टिक नहीं सके।

पिता बोले- बेटे पर गर्व, चोटिल होने के बावजूद खेले
बॉक्सर सतीश के पिता किरनपाल सिंह यादव ने कहा, प्री क्वार्टर में सतीश ने 4-0 से प्रतिद्वंदी खिलाड़ी को हराया था। इस मैच में सतीश को काफी चोटें आई थी। चिन (ठोड़ी) पर छह टांके और आइब्रो पर पांच टांके आए थे। इससे वह बुरी तरह हताश हो गए थे। हम सब परिवारवालों ने उनका हौसला बढ़ाया और खेलने के लिए प्रेरित किया। यही वजह रही कि चोटिल होने के बाद भी सतीश क्वार्टर फाइनल में अच्छे ढंग से खेले। मुझे अपने बेटे पर गर्व है। अगली बार ओलिंपिक में वह भारत के लिए मेडल जरूर लाएगा।
सतीश के चाचा राजपाल यादव ने कहा कि सतीश के चेहरे पर दो जगह चोटें थी। फिर भी वह खेले, यही अपने आप में बड़ी बात है। हम खुद को सौभाग्यशाली समझते हैं कि सतीश इतने बहादुर हैं। पूरा गांव सतीश का हमेशा उत्साहवर्धन करता रहेगा।

ओलंपिक में गोल्ड जीतने के लिए सतीश रिंग में खूब पसीना बहाया था।
ओलंपिक में गोल्ड जीतने के लिए सतीश रिंग में खूब पसीना बहाया था।

क्वालीफाइंग राउंड की इंजरी बनी बाधा
बॉक्सर सतीश यादव ने क्वालीफाइंग राउंड में शानदार प्रदर्शन करते हुए जमैका के खिलाड़ी ब्राउन रिकार्डो को मात देकर क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई थी। लेकिन क्वालीफाइंग राउंड में सतीश को हाथ और चेहरे पर काफी इंजरी हुई थी। ब्लड लॉस के साथ सतीश को टांके भी लगे थे। यही इंजरी क्वार्टर फाइनल में सतीश के लिए मुसीबत बन गई। इसके बावजूद सतीश यादव ने पूरे दमखम के साथ मुकाबला किया।

क्वालीफाइंग राउंड में सतीश को हाथ और चेहरे पर काफी इंजरी हुई थी।
क्वालीफाइंग राउंड में सतीश को हाथ और चेहरे पर काफी इंजरी हुई थी।

पहले राउंड में किस्मत ने दिया था साथ
सतीश ने क्वालीफाइंग राउंड में 91 किलो वर्ग के अंतिम-16 में 4-1 से जीत हासिल की थी। क्वालीफाइंग का पहला राउंड 5-0, दूसरा और तीसरा 4-1 से जीता था। इससे पहले बॉक्सिंग के पहले राउंड में बाय मिली थी और प्रतिद्वंदी खिलाड़ी ने अपना नाम मैच से वापस ले लिया था।

सतीश ने क्वालीफाइंग राउंड में 91 किलो वर्ग के अंतिम-16 में 4-1 से जीत हासिल की थी।
सतीश ने क्वालीफाइंग राउंड में 91 किलो वर्ग के अंतिम-16 में 4-1 से जीत हासिल की थी।

सोशल मीडिया पर ट्रेंड हुआ था रिंग का शेर
सतीश यादव ने जब क्वालीफाइंग राउंड जीता था तब सोशल मीडिया पर 'रिंग के शेर' ट्रेंड करने लगा था। प्रशंसकों ने सतीश यादव को रिंग का शेर टाइटल दिया है। दोस्त और प्रशंसकों ने लगातार सोशल मीडिया पर सतीश का मनोबल बढ़ाया।

सतीश यादव के गांव के युवा साथी उनकी जीत के लिए चीयर अप करने पहुंचे थे।
सतीश यादव के गांव के युवा साथी उनकी जीत के लिए चीयर अप करने पहुंचे थे।
सतीश यादव के पिता और परिजन उनकी जीत के लिए हौसला बढ़ाते हुए।
सतीश यादव के पिता और परिजन उनकी जीत के लिए हौसला बढ़ाते हुए।

सतीश के पिता किरनपाल सिंह यादव ने बताया कि सतीश 11 कुमायूं रेजीमेंट में सेवारत हैं। सतीश के गांव पचौता के रिटायर्ट फौजी उससे विशेष लगाव रखते हैं। छुट्टी में जब कभी वह गांव आता है तो पूर्व फौजियों से मिलकर उनका आशीर्वाद जरूर लेता है। सतीश के छोटे भाई हरीश यादव भी बॉक्सिंग खिलाड़ी हैं। वह भी राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में जीत हासिल करने के बाद अब नेशनल लेवल पर प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए तैयारी कर रहे हैं।

​​​​पति की जीत के लिए पत्नी सविता ने रखा था व्रत

सतीश यादव की पत्नी और बच्चे, पत्नी सविता ने जीत ने व्रत रखा है।
सतीश यादव की पत्नी और बच्चे, पत्नी सविता ने जीत ने व्रत रखा है।

सतीश की पत्नी सविता यादव बच्चों के साथ नोएडा में रहती हैं। पति के क्वार्टर फाइनल मैच के लिए बच्चों के साथ मंदिर में जाकर उन्होंने पूजा-अर्चना की थी। व्रत भी रखा था।

2010 में जीता पहला पदक फिर मुड़कर नहीं देखा

सतीश कुमार ने पहला गोल्ड मेडल 2010 में उत्तर भारत एशिया चैंपियनशिप में जीता था।
सतीश कुमार ने पहला गोल्ड मेडल 2010 में उत्तर भारत एशिया चैंपियनशिप में जीता था।

सतीश कुमार ने पहला गोल्ड मेडल 2010 में उत्तर भारत एशिया चैंपियनशिप में जीता था। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। सतीश ने पहली नेशनल चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीता। इसके बाद उन्होंने एशियन गेम्स 2014 में ब्रॉन्ज मेडल और 2018 के कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर मेडल जीता। एशियन चैंपियनशिप में 2015 में भी ब्रॉन्ज जीता था।

सतीश कुमार का स्पोर्ट्स प्रोफाइल

  • 2010 में मुक्केबाजी का करियर शुरू किया।
  • 5 नेशनल रिकॉर्ड हासिल कर चुके हैं।
  • 2014 एशियाई खेलों में कांस्य पदक जीता।
  • 2015 एशियन चैम्पियनशिप में कांस्य पदक जीता।
  • 2018 राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक जीता।
  • 2019 एशियन चैम्पियनशिप में कांस्य पदक जीता।

सतीश की मां गुड्‌डी बताती हैं कि सतीश 11 साल की उम्र से अभ्यास कर रहा है। तब संसाधनों का अभाव था, तो मेरा भोलू (सतीश का घर का नाम) ट्यूब् में रेत भरकर प्रैक्टिस करता था। सेना में सतीश के साथी उन्हें खली बुलाते हैं। ​​

सतीश यादव की मां गुड्डी अपने बेटे और बहू की फोटो के साथ।
सतीश यादव की मां गुड्डी अपने बेटे और बहू की फोटो के साथ।
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