बिछड़े नवजात शावक के मां से मिलने का VIDEO:महाराष्ट्र के रेस्क्यू वीडियो से मेरठ के लोगों को सीख दे रहा वन विभाग

मेरठ7 महीने पहले

महाराष्ट्र में अपनी मादा तेंदुआ मां से बिछड़े दो दिन के नवजात शावक को साहा वन विभाग ने बड़ी चतुराई से मिला दिया। मादा तेंदुआ से भूलवश अपना दो दिन का नवजात शावक खेत में छूट जाता है। ग्रामीणों की सूचना पर साहा वन विभाग की टीम इस नवजात शावक को रेस्क्यू कर उसकी मां से मिलाने का जतन करती है। अंत में मां खेत में आकर बच्चे को ले जाती है। महाराष्ट्र वन विभाग 2 मिनट के इस सफल रेस्क्यू ऑपरेशन की वीडियो को मेरठ की जनता को दिखाकर जागरूक कर रहा है। विभाग ने इस वीडियो को सोशल मीडिया के अलावा सेमिनार में भी दिखाया है। इसका प्रमुख कारण मेरठ में 2 महीने पहले अप्रैल, 2022 में घटी ऐसी ही एक घटना है। जिसमें ग्रामीणों की गलती के चलते मादा तेंदुआ अपना 20 दिन का बच्चा खेत में ठुकरा कर चली गई। उसके बच्चे में इंसानी गंध आ चुकी थी, जिससे मादा तेंदुआ अपने बच्चे को पहचान नहीं पाई थी।

नन्हीं सिंबी को मां से मिलाने के लिए वन विभाग का हर प्रयास इसलिए विफल रहा क्योंकि सिंबी के शरीर में आदम महक आ चुकी थी।
नन्हीं सिंबी को मां से मिलाने के लिए वन विभाग का हर प्रयास इसलिए विफल रहा क्योंकि सिंबी के शरीर में आदम महक आ चुकी थी।

मुंबई के ऑपरेशन से मेरठ में दे रहे सीख

मुंबई के साहा वन सेंचुरी में दो दिन का जन्मा तेंदुए का बच्चा अपनी मां से बिछड़ गया था। मुंबई वन विभाग ने इस बच्चे को मां से मिलाने के लिए तमाम प्रयास किए। उसे गन्ने के खेत में टोकरी से कवर करके भी रखा। अंत में मादा तेंदुआ आई और बच्चे की गंध को टोकरी के अंदर से भी पहचान गई। मां ने बच्चे की गंध को पहचानकर तुरंत टोकरी हटाई और बच्चे को अपने साथ ले गई।

मेरठ की सिंबी को नहीं पहचान सकी थी मादा तेंदुआ

अप्रैल, 2022 में मेरठ में खेत में किसानों को मिली नन्हीं शावक को उसकी मां ने नहीं पहचान पाई थी। मादा तेंदुआ बार-बार बच्चे के पास खेत में आई। टोकरी के पास पहुंची, लेकिन बच्चे में बसी इंसानी गंध ने मां को बच्चे की पहचान भुला दिया। मां बिना बच्चे को लिए ही जंगल में लौट गई। मां के ठुकराने के बाद सिंबी को मेरठ वन विभाग की टीम ने गोरखपुर चिड़ियाघर भेज दिया। जहां अब सिंबी का पूरा जीवन गुजरेगा।

ग्रामीणों ने शावक को छुआ, वही बना अभिशाप

दरअसल, अप्रैल में मेरठ के किठौर में खेत में किसानों ने नन्हें शावक को घूमते देखा। उन्हें लगा कि यह बिल्ली का बच्चा है। इसी उत्साह में किसान तेंदुए के बच्चे को गांव ले आए। पूरे गांव ने उस बच्चे को गोद में उठाया, दुलारा, पुचकारा। उसके साथ सेल्फी लेकर ‘भारत मां की जय’ का नारा भी लगाया। बाद में वन विभाग की टीम को सूचना देने पर पता चला कि यह बिल्ली नहीं, तेंदुए का बच्चा है। तब तक बच्चे के शरीर पर इंसानी स्पर्श के कारण आदम गंध आ चुकी थी। जिसकी वजह से मां उसे नहीं पहचान सकी।

डीएफओ राजेश कुमार ने बताया कि जब भी कैट फैमिली के मेंबर देखें, तो उनको खुद न छुएं। पहले विभाग को जानकारी दें। अगर छुएं भी तो कपड़ा या दस्ताने पहनकर छुएं। ताकि उनके शरीर में हयूमन स्मेल न जाए। कैट फैमिली अपने सदस्यों को शरीर की गंध से ही पहचानती है। इंसानी गंध आने से इनकी परिवार में स्वीकार्यता नहीं रहती। इसलिए हम साहा का ये रेस्क्यू वीडियो लोगों को दिखा रहे हैं, ताकि वो अवेयर हों। जैसा सिंबी के साथ हुआ, वैसा किसी दूसरे बच्चे के साथ न हो।

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