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यादों के झरोखे से:55 साल पहले 'दिल दिया दर्द लिया' फिल्म के प्रमोशन पर मेरठ आए थे दिलीप कुमार, इस फोटोग्राफर ने खींची थी फोटो

मेरठ2 महीने पहले
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बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता दिलीप कुमार का बुधवार सुबह करीब 7:30 बजे निधन हो गया। वे 98 साल के थे। उन्होंने मुंबई के हिंदुजा हॉस्पिटल में अंतिम सांस ली। सांस लेने में दिक्कत होने पर उन्हें यहां 29 जून को भर्ती किया गया था। 55 साल पहले दिलीप कुमार 1966 में फिल्म 'दिल दिया दर्द लिया' के प्रमोशन के लिए मेरठ आए थे। मेरठ में निगार सिनेमा में फिल्म का प्रमोशन हुआ और शहर के संभ्रांत लोगों ने दिलीप कुमाार का जोर-शोर से स्वागत किया था। निगार सिनेमा के मालिक मेरठ की मशहूर नादिर अली शाह कंपनी के संचालक सईद साहब फिल्म डिस्ट्रीब्यूटर थे।

मेरठ के ज्ञान दीक्षित का दिलीप कुमार से खासा नाता रहा है। वरिष्ठ फोटोजर्नलिस्ट ज्ञान दीक्षित ने दिलीप कुमार के फिल्मी सेट पर लाइव फोटो क्लिक किए, जिन्हें वे आज भी दिल से लगाए हुए हैं। दिलीप कुमार की चर्चित फिल्में लीडर, मशाल, बैराग की शूटिंग के दौरान ज्ञान दीक्षित ने फोटो क्लिक किए जिन्हें बाद में दिलीप कुमार को उन्होंने तोहफे के रूप में मुंबई भिजवाया। ज्ञान आज भी उन फोटो को सहेजे हुए हैं।

फिल्म बैराग की शूटिंग के दौरान क्लिक किया फोटो।
फिल्म बैराग की शूटिंग के दौरान क्लिक किया फोटो।

दिलीप साहब ने नाम पूछा और दिया तोहफा

फोटोग्राफर ज्ञान दीक्षित।
फोटोग्राफर ज्ञान दीक्षित।

ज्ञान दीक्षित कहते हैं 1964 के आसपास का वक्त होगा जब आगरा में दिलीप साहब फिल्म लीडर की शूटिंग के लिए आए थे। फिल्म का बेहद चर्चित गीत किस शहंशाह ने बनवाके हंसी ताजमहल की शूटिंग चल रही थी, लोकेशन थी रियल ताजमहल जहां गाना शूट हो रहा था। इस शूटिंग में मेरे दोस्त गोपाल मिश्रा जो उस वक्त मेरठ के एनएएस कॉलेज में मेरे साथ बीए कर रहा था उसके पिता एसएस मिश्रा हमें ले गए। दरअसल एसएस मिश्रा यूपी पुलिस में अफसर थे, उस वक्त उनकी ड्यूटी वहां लगी थी। गाने की शूटिंग के दौरान सुरक्षा व्यवस्था का जिम्मा उन पर ही था, तब मैं और गोपाल दोनों मिलकर वहां शूटिंग देखने गए। चूंकि मुझे फोटोग्राफी का शौक था, वहां कैमरा चलाने लगा। गाने के दौरान कुछ फोटो शूट किए, तब दिलीप साहब से पहली भेंट हुई, उन्होंने नाम पूछा और पास रखा फूलों का गुलदस्ता मुझे भेंट कर दिया। बोले ज्ञान बहुत आगे जाओ खूब नाम कमाओ। आगरा में तीन दिन रहा, हर रोज शूटिंग पर जाता और दिलीप साहब को देखता। कमाल की शख्यसियत थे।

फिल्म लीडर की शूटिंग के दौरान खींची तस्वीरें वैजयंती माला और दिलीप कुमार।
फिल्म लीडर की शूटिंग के दौरान खींची तस्वीरें वैजयंती माला और दिलीप कुमार।

अदायगी में खो जाते थे दिलीप साहब
ज्ञान दीक्षित कहते हैं कि दिलीप साहब से दूसरी मुलाकात 1983 में फिल्म मशाल के सेट पर हुए। मुंबई नटराज स्टूडियो में फिल्म मशाल के होली गीत की शूटिंग हो रही थी। एक सीनियर फोटोग्राफर के साथ वहां मैं पहुंचा, देखते ही दिलीप साहब पहचान गए बोले आप तो आगरा में मिले थे। वहां एक दिन रहा, उनकी कुछ तस्वीरें भी खींची जिसे उन्होंने काफी पसंद किया। तब ब्लैक एंड व्हाइट फोटो होते थे, स्टिल शूट नहीं था इसलिए चुनिंदा तस्वीरें ही खींची जाती थी और अपने पास रखी जाती थीं। इसके बाद मुंबई में बैराग फिल्म की शूटिंग में दिलीप साहब की तस्वीरें उतारीं। सायरा बानो और दिलीप साहब दोनों फिल्म में साथ थे, पति-पत्नी की वो मेमोरेबल तस्वीर मैं खींच पाया इसके लिए खुशकिस्मत हूं।

मेरठ को बहुत मानते थे दिलीप कुमार
ज्ञान दीक्षित कहते हैं, मैं जब भी दिलीप साहब से मिला वो बड़े खुश होते थे, मैंने बताया मेरठ से हूं तो बेहद सम्मान देते। कहते तुम तो उस शहर से हो जहां से बैजूबावरा, बहादुर शाह जफर जैसी फिल्में करने वाले मशहूर अभिनेता भारत भूषण हुए हैं। भारत भूषण जैसे अभिनेता बालीवुड में हो नहीं सकते।

पॉपुलर मेरठी ने सुनाया दिलीप कुमार से जुड़ा किस्सा

हास्य कवि पापुलर मेरठी।
हास्य कवि पापुलर मेरठी।

शहर के अंतराष्ट्रीय हास्य कवि व शायर डॉ. पापुलर मेरठी बताते हैं कि मेरे बड़े भाई सरफरुजुद्दीन शाह के सईद साहब से करीबी ताल्लुकात थे। हमारा परिवार तब खैरनगर में रहता था, भाई सरकारी ठेकेदार थे। तो सईद साहब ने हमारी भेंट दिलीप साहब से कराई। नादिर अली शाह की जली कोठी की ऐतिहासिक बिल्डिंग में हम सबकी भेंट हुई। उनके साथ सईद साहब का परिवार, सरफारुजुद्दीन शाह की पत्नी सैय्यदा अकीला, बहन सैय्यदा रुखसाना निजामी ने फोटो खिंचाई थी।

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