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मेरठ में राहत के साथ नई आफत:कोरोना के मरीज ठीक हो रहे लेकिन ब्लैक फंगस का खतरा बढ़ा, मेडिकल कालेज में 80 के पार पहुंची मरीजों की संख्या

मेरठ22 दिन पहले
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मेरठ में कोरोना से ज्यादा ब्लै - Dainik Bhaskar
मेरठ में कोरोना से ज्यादा ब्लै

उत्तर प्रदेश के मेरठ में ब्लैक फंगस के मरीजों की बढ़ती संख्या ने विभाग को बैचेन कर दिया है। यहां पर मेडिकल कालेज के अस्पताल में मरीजों की संख्या अब कोरोना मरीजों से आगे निकल गई है। कोरोना मरीज ठीक होकर घर जा रहे हैं, मगर कोरोना मरीजों के घटने के साथ जिले में म्यूकरमाइकोसिस के मरीजों की संख्या बढती जा रही है जिसने अधिकारियों की चिंताएं बढ़ा दी है।

रविवार को आई संक्रमितों की रिपोर्ट में मेडिकल अस्पताल में कोरोना के कुल 72 मरीज थे, जबकि ब्लैक फंगस के मरीजों की संख्या 86 हो चुकी है। इसमें 11 मरीज बेहद गंभीर हालत में हैं जिन्हें आईसीयू में भर्ती किया गया है।

कोविड निगेटिव और पाॅजिटिव दोनों को काला फंगस
लाला लाजपत राय मेडिकल अस्पताल में भर्ती ब्लैक फंगस के 86 मरीजों में 40 मरीज कोरोना पाॅजिटिव हैं शेष 46 मरीज ऐसे हैं जो कोरोना से उबर चुके हैं। कोरोना ठीक होने के बाद उन्हें ब्लैक फंगस हुआ है। जांच में फंगस होेने का मुख्य कारण स्टेराॅयड की हैवी खुराक और उचित सफाई न रखना आया है।

कोरोना के 24 मरीज ठीक होकर घर भी गए मगर काला फंगस से कोई ठीक नहीं हुआ, नए मरीज भर्ती हुए। मेडिकल में 28 मई को ब्लैक फंगस के 68 मरीज थे, जो आज बढकर 86 हो गये। अब तक मेरठ मेडिकल में 12 मरीजों की मौत ब्लैक फंगस से हो चुकी है।

एंफोटेरोसीन-बी नहीं पोसोकोनाजोले के सहारे मरीज़
मेडिकल अस्पताल में ब्लैक फंगस के मरीजों को इलाज में कारगर दवा एंफोटेरोसीन-बी नहीं मिल रही। दवा की लगातार कमी बनी हुई है। चिकित्सक पोसोकोनाजोले 100 की डोज देकर मरीजों को संक्रमण से बचा रहे हैं। मगर गंभीर संक्रमितों पर पोसोकोनाजोले का असर धीमी गति से हो रहा है जो इलाज के लिए पर्याप्त नहीं।

ऐसे में मरीजों में संक्रमण लगातार बढ रहा है। फंगस नाक से होते हुए ब्रेन में पहुंच रहा है। फंगस के दिमाग मे पहुचने पर मरीज का बचना मुश्किल होता है। मेडिकल अस्पताल में अब तक 5 मरीजों की मौत ब्रेन में फंगस पहुंचने के कारण हो चुकी है।