खिलाड़ियों के आयोजन में खिलाड़ी पीछे, नेता आगे:मेरठ में खेल यूनिवर्सिटी शिलान्यास समारोह में खिलाड़ियों को सबसे आखिर में बैठाया गया

मेरठ9 महीने पहले
मेरठ में खेल यूनिवर्सिटी के शिलान्यास समारोह में खिलाड़ी पीछे नेता आगे।

मेरठ में मेजर ध्यानचंद खेल यूनिवर्सिटी के शिलान्यास समारोह में खिलाड़ियों को ही सबसे पीछे अंत में बैठाया गया। जिन खिलाड़ियों के लिए यह पूरा मंच सजा था। जिस खेल यूनिवर्सिटी की नींव पीए मोदी ने खिलाड़ियों के लिए रखी उन खिलाड़ियों को ही इस समारोह में आखिर में जगह मिली। यूपी के तमाम जिलों से एक दिन का सफर तय कर खिलाड़ियों को मेरठ लाया गया, लेकिन सभा स्थल मे उनको सबसे पीछे जगह दी गई।

सर्दी में दूरदराज से सफर तय कर मेरठ पहुंचे खिलाड़ी पीएम को देख भी नहीं पाए
सर्दी में दूरदराज से सफर तय कर मेरठ पहुंचे खिलाड़ी पीएम को देख भी नहीं पाए

नेता आगे खिलाड़ी सबसे पीछे
पीएम के मंच के ठीक सामने नेताओं और मोर्चे के सदस्यों को बैठाया गया। मंच के एक तरफ संगठन के लोगों के लिए छोटा मंच लगा जिस पर लक्ष्मीकांत वाजपेयी सहित अन्य नेता बैठे। एक तरफ सांस्कृतिक आयोजनों का मंच बनाया गया। कार्यकर्ताओं के पीछे आम जनता थी जनता के पीछे लास्ट में खिलाड़ी बैठाए गए।

हमें पीएम को देखने बुलाया था, भीड़ बना दिया
यूपी के तमाम जिलों से मेरठ में पीएम मोदी को देखने, सुनने पहुंचे स्कूली छात्र और खिलाड़ी बेहद हताश नजर आए। खिलाड़ियों ने कहा खेल यूनिवर्सिटी बन रहा है अच्छी बात है। पीएम खेलों पर ध्यान दे रहे हैं वो भी अच्छा है, लेकिन यहां हमें सर्दी में इसलिए बुलाया था कि हम पीएम को सामने से देखेंगे। उनको सुनेंगे। मौका मिला तो अपनी बात भी कहेंगे। लेकिन यहां हमें रैली का हिस्सा बना दिया है। सबसे पीछे बैठाया है जहां बैठने का कोई मतलब नहीं। हमें बैठाकर कुर्सी भराई गई हैं।

यूपी के 75 जिलों से बुलाए थे खिलाड़ी
इस आयोजन के लिए पिछले 15 दिनों से प्रदेशभर से खिलाड़ियों को बुलाने पर काम हो रहा था। प्रशासन और खेल विभाग सिर्फ इस जद्दोजहद में था कि किस तरह आयोजन में ज्यादा से ज्यादा खिलाड़ी पहुंचे। 25हजार खिलाड़ियों को आयोजन में पहुंचने का लक्ष्य रखा गया था। जिसे एक दिन पहले घटाया गया। लगभग 16 हजार खिलाड़ी सभा में लाए गए, मगर खिलाड़ियों को मंच से बेहद दूर सबसे पीछे बैठाया गया। खिलाड़ियों को बैठाने के लिए पवेलियन नुमा स्ट्रक्चर तैयार किया गया था, जहां खिलाड़ी बैठे। यहां खिलाड़ी न तो मंच देख सके, न ही पीएम को देख सके।

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