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जिंदगी बचाने के लिए 110 KM का ग्रीन कॉरिडोर:मेरठ से 102 मिनट में एंबुलेंस से गुरुग्राम पहुंचाए सैंपल, 350 जवानों ने संभाली कमान; महिला की किडनी का होना है ट्रांसप्लांट

मेरठ4 महीने पहलेलेखक: मनु चौधरी
इसी एंबुलेंस से सैंपल मेरठ से गुरुग्राम तक पहुंचाए गए सैंपल।

48 साल की महिला मरीज की जिंदगी बचाने के लिए आज 27 सितंबर की सुबह मेरठ से गुरुग्राम लैब तक ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। यदि यह सैंपल मेरठ अस्पताल से गुरुग्राम लैब तक 2 घंटे में नहीं पहुंचते तो ब्लड सैंपल खराब हो जाते। मेरठ से लेकर गाजियाबाद, दिल्ली और गुरुग्राम तक 3 राज्यों की पुलिस ग्रीन कॉरिडोर में एंबुलेंस को लेकर चलती रही। महिला का इलाज कर रहे वरिष्ट डॉक्टर संदीप गर्ग ने बताया की 110 किमी की दूरी तक पहुंचने में एंबुलेंस को 102 मिनट लगे।

तड़के 4:43 बजे एंबुलेंस रवाना हुई

मेरठ के इसी अस्पताल में भर्ती है महिला मरीज
मेरठ के इसी अस्पताल में भर्ती है महिला मरीज

27 सितंबर की सुबह 4 बजे मेरठ के न्यूटिमा अस्पताल में डॉक्टर, एंबुलेंस व पूरा स्टाफ अलर्ट था। अस्पताल प्रबंधन ने सुबह 5 बजे से 7 बजे तक ग्रीन कॉरिडोर का समय पुलिस के साथ मिलकर निर्धारित किया। अस्पताल के 2 स्टाफ कर्मी एंबुलेंस से तड़के 4 बजकर 43 मिनट पर रवाना हुए, सुबह 6 बजकर 25 मिनट पर एंबुलेंस महिला मरीज व गुर्दा डोनर करने वाली बेटी के सैंपल लेकर गुरुग्राम लैब पहुंची।

पहली बार ग्रीन कॉरिडोर में भेजे सैंपल
एसपी ट्रैफिक जितेंद्र श्रीवास्तव का कहना है की मेरठ में पहली बार ग्रीन कॉरिडोर में महिला मरीज व डोनर के सैंपल भेजे गए हैं। सवाल महिला की जिंदगी बचाने का है। पुलिस ने इस दौरान बहुत सहयोग किया। मेरठ में 4 टीआई, 12 टीएसआई और 110 सिपाही मेरठ की सीमा में लगाए गये। ट्रैफिक पुलिस की अलग अलग स्थानों पर 16 गाड़ी लगाई गईं।

मेरठ के अस्पताल में अलर्ट खड़ी पुलिस की गाड़ी
मेरठ के अस्पताल में अलर्ट खड़ी पुलिस की गाड़ी

मेरठ से गाजियाबाद, दिल्ली और गुरग्राम तक अलग अलग राज्यों के 350 पुलिसकर्मी लगे। वायरलेस सेट से 15 मिनट पहले ही हाईवे को खाली करा लिया गया था। ग्रीन कॉरिडोर में सिर्फ सैंपल ले जाने वाली एंबुलेंस का काफिला था। एक बड़ी एंबुलेंस रिजर्व में साथ रही।

हापुड़ की रहने वाली है मरीज
48 साल की महिला मरीज हापुड़ जिले की है, जिसके पति शिक्षक हैं। महिला की 22 साल की बेटी अपनी मां के लिए किडनी डोनेट करेगी। मेरठ के न्यूटिमा अस्पताल से गढ़ रोड, यूनिवर्सिटी रोड, कंकरखेड़ा, दिल्ली मेरठ हाईवे, दिल्ली मेरठ एक्सपेस वे से गाजियाबाद की सीमा से दिल्ली पार करते हुए एंबुलेंस गुरुग्राम तक पहुंची। आज शाम ब्लड रिपोर्ट आनी है। जिसके बाद महिला की किडनी ट्रांसप्लांट की जानी है।

पूर्व में खराब हो गए थे सैंपल
डॉक्टर संदीप गर्ग ने बताया की सैंपल लिए जाने के बाद 2 घंटे के भीतर पहुंचने जरूरी थे। इससे पहले एक बार 2 घंटे में सैंपल नहीं पहुंचे, जिससे सैंपल खराब हो गए। आज किसानों का भारत बंद भी है, ऐसे में ग्रीन कॉरिडोर में सैंपल भेजे गए। ग्रीन कॉरिडोर में सिर्फ पुलिस एंबुलेंस को लेकर चलती है। आगे पीछे कोई वाहन नहीं आने दिया जाता।

ग्रीन कॉरिडोर लागू होने से पहले अलर्ट ट्रैफिक पुलिसकर्मी
ग्रीन कॉरिडोर लागू होने से पहले अलर्ट ट्रैफिक पुलिसकर्मी

डॉक्टर बोले- 2 घंटे में लैब पहुंचने इसलिए जरूरी थे सैंपल

मरीज में किडनी ट्रांसप्लांट करने वाले वरिष्ठ डॉक्टर संदीप गर्ग का कहना है कि जब मरीज और किडनी देने वाले डाेनर का ब्लड ग्रुप मैच नहीं करता। ऐसी स्थिति में लंबी प्रक्रिया है। जिसमें पूरा प्रोटाेकॉल फॉलो करना पड़ता है। यदि समय से मरीज व डोनर के सैंपल लैब नहीं पहुंच पायेंगे तो रिपोर्ट आने में देरी हो जाएगी। ऐसी स्थिति में किडनी ट्रांसप्लांट नहीं की जा सकती है।

15 दिन से प्रोटोकॉल को किया जा रहा फॉलो

डॉक्टर संदीप गर्ग ने बताया की अभी तक मेरे द्वारा 188 मरीजों में किडनी ट्रांसप्लांट की जा जुकी हैं। महिला मरीज का ब्लड ग्रुप O है। जबकी किडनी डोनेट करने वाली मरीज की बेटी का ब्लड ग्रुप B है। ऐसी स्थिति में रेंसिपिएंट के प्लाज्मा से एंटी बॉडीज को खत्म करना पड़ता है। मरीज के शरीर में एंटी बॉडीज की मात्रा ज्यादा होने के कारण दूसरे ब्ल्ड ग्रुप के गुर्दे को खराब कर देती है। इसलिए मरीज के अंदर एंटी बॉडीज को खत्म करना होता है। ताकि मरीज की बॉडी किसी भी ब्लड ग्रुप के गुर्दे को स्वीकार कर लेती है।

प्लाजा फेरिसिस के बाद लिए जाते हैं सैंपल

डॉक्टर का कहना है कि प्लाजा फेरिसिस की पूरी प्रक्रिया है। प्लाज्मा फेरिसिस से एंटी बॉडी खत्म करने के बाद ही सैंपल लेने जरूरी हैं, सैंपल लेने से लैब में पहुंचने में 2 घंटे से पहले जरूरी हैं, 7 से 8 घंटे में ऑनलाइन रिपोर्ट लैब से आएगी। शरीर में एंटी बॉडीज तो नहीं बनी यह महत्वपूर्ण है। प्लाज्मा फेरिसिस से लेकर एंटी बॉडी खत्म करना, सैंपल लेना व लैब तक पहुंचना और रिपोर्ट आने में 12 घंटे लगते हैं। उसके बाद गुर्दा ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया शुरू होती है। प्लाज्मा फेरिसिस से लेकर 24 घंटे के अंदर ही गुर्दा टांसप्लांट करना जरूरी होता है।

इसलिए नहीं भेजे गये एयर एंबुलेंस से सैंपल

अस्पताल से सैंपल लेकर तेजी से चलते स्टाफ कर्मी
अस्पताल से सैंपल लेकर तेजी से चलते स्टाफ कर्मी

अस्पताल प्रबंधन व डॉक्टरों ने बताया कि एयर एंबुलेंस से सैंपल इसलिए नहीं भेजे गये क्योंकि जहां लैब है, वहां एयर एंबुलेंस नहीं उतर सकती। किसानों का दिल्ली बॉडर पर धरना है। मेरठ में अस्पताल के आसपास भी एयर एंबुलेंस नहीं उतर सकती थी।

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