नई शिक्षा नीति के विरोध में उतरा NSUI:मेरठ से शुरू हुआ  शिक्षा बचाओ देश बचाओ अभियान, कहा निजीकरण को बढ़ावा है नई नीति

मेरठएक वर्ष पहले
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नई शिक्षा नीति के विरोध में एनएसयूआई ने मेरठ से की देश बचाओ शिक्षा बचाओ अभियान की शुरूआत - Dainik Bhaskar
नई शिक्षा नीति के विरोध में एनएसयूआई ने मेरठ से की देश बचाओ शिक्षा बचाओ अभियान की शुरूआत

भाजपा सरकार में तैयार हुई नई शिक्षा नीति के खिलाफ एनएसयूआई ने उत्तर प्रदेश में शिक्षा बचाओ देश बचाओ अभियान शुरू किया है। मेरठ सहित अन्य जिलों में एनएसयूआई कार्यकर्ता इस अभियान को चलाएंगे। यह नई शिक्षा नीति निजीकरण को बढ़ावा देने वाली नीति है। बुधवार को मेरठ में नेशनल स्टूडेंट यूनियन ऑफ इंडिया के कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस जिला कार्यालय पर अभियान का आगाज किया।

केंद्रीकरण और शिक्षा के निजीकरण को बढ़ावा
मेरठ में एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष रोहित राणा ने कहा कि नयी शिक्षा नीति केंद्रीकरण व शिक्षा के निजीकरण को बढ़ावा देती है। साथ ही यह शिक्षा विरोधी नीति तब लायी गयी जब पूरे देश में कोविड कहर का दौर था। उद्देश्य साफ है मोदी सरकार शिक्षा को भी सिर्फ अमीरों के लिए एक सुविधा जैसा बनाना चाहती है। गरीब बच्चों के भविष्य के साथ यह सीधा खिलवाड़ है। इस नीति से शिक्षा का मॉडल ही बर्बाद हो जाएगा। सरकारी संस्थानों के निजीकरण से देश के युवाओं के लिए स्थायी रोजगार के अवसर खत्म हो जाएंगे। अब तो नयी शिक्षा नीति भी निजीकरण को बढ़ावा दे रही या है तो गरीब जाए तो जाए कहाँ।

छात्र विरोधी है ये सरकार
रोहित राणा ने कहा कि SSC, NEET, JEE जैसे सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में घोटाले सामने आ रहे हैं, युवाओं को वर्षों तक नौकरी नहीं मिल रही। इससे साफ है कि मोदी सरकार छात्र विरोधी है। अगर हम छात्र वर्ग के लिए कोई नीति बना रहें हैं तो हमारा कर्तव्य बनता हैं कि हम उनसे चर्चा करे लेकिन वर्तमान सरकार की आदत बन चुकी हैं कि सभी कार्य तानाशाही तरीके से लागू करते हैं। जब से बीजेपी सरकार सत्ता में आई हैं तब से छात्रों की फैलोशिप एवं स्कॉलरशिप रोकी जा रहीं हैं, प्रवेश परीक्षाओं में घोटाले हो रहें हैं तथा परीक्षाओं के परिणाम देरी से आ रहे हैं। जिसके कारण छात्रों के 2 से 3 साल बर्बाद हो जाते हैं।

प्रतियोगी परीक्षाओं में छात्रों को मिले 2 साल की छूट
एनएसयूआई ने केंद्र सरकार से मांग की है कि केंद्रीय स्तर एवं प्रदेश स्तर पर छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं में आयु सीमा में कम से कम 2 साल की छूट दी जाए। क्योंकि कोरोना काल में छात्रों के 2 साल पूरी तरह बर्बाद हो चुके हैं। कोरोना काल के नुकसान के बाद छात्र अब तक नुकसान से नहीं उबर पाए हैं। इसलिए छात्रों को दो साल की मोहलत दी जाए।

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