मेरठ में नई बीमारी की दस्तक:महिला में स्क्रब टाइफस की पुष्टि, शरीर के कई अंगों को करता है प्रभावित; एक्सपर्ट्स ने बताए बचाव के उपाय

मेरठ3 महीने पहले

कोरोना, डेंगू और वायरल बुखार के बीच अब स्क्रब टाइफस ने भी दस्तक दे दी है। मेरठ में इसका पहला मामला सामने आया है। एक महिला में स्क्रब की पुष्टि हुई है। महिला ने लक्षण मिलने पर गाजियाबाद में इसकी जांच कराई थी। चिंता की बात ये है कि ये बीमारी भी कोरोना की तरह ही है। ये ओरिएंटिया त्सुत्सुगामुशी बैक्टीरिया के कारण होती है। लोगों में यह संक्रमित चिगर्स (लार्वा माइट्स) के काटने से फैलता है। इसे बुश टाइफस के नाम से भी जाना जाता है। इसके चलते मरीज के सेंट्रल नर्वस सिस्टम, कार्डियो वस्कुलर सिस्टम, गुर्दे, सांस से जुड़ी और गैस्ट्रोइन्टेस्टाइनल सिस्टम को प्रभावित हो जाता है। यहां तक की मल्टी ऑर्गन फेल्योर से रोगी की मौत भी हो सकती है।

LLRM मेडिकल कॉलेज में शुरू होगी जांच
मेरठ के LLRM मेडिकल कॉलेज में फिलहाल डेंगू और कोरोना की जांच की व्यवस्था है। अब स्क्रब टाइफस का मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग जल्द ही स्क्रब की जांच भी शुरू करने जा रहा है। ताकि रोगी को जल्द उपचार मिल सके। इसके लिए मेडिकल अस्पताल में जांच किट भी आ चुकी हैं।

कीट, गिलहरी, चूहे से फैलता है स्क्रब टाइफस
स्क्रब टाइफस घुन, छोटे कीट, गिलहरी और चूहे के काटने से फैलता है। बरसात के मौसम में इन सभी इंसेक्ट्स से बचाव करें। समय पर इलाज न मिले तो यह बीमारी बढ़ सकती है। पशुओं के मल-मूत्र में बैठने वाले कीटों, खराब भोज्य पदार्थों में लगे कीटों के कारण भी यह बीमारी फैल सकती है। इसलिए बरसात के मौसम में सफाई का सबसे ज्यादा ख्याल रखें। बाहर का भोजन न खाएं। भोजन खाते, बनाते समय पूरी सफाई रखें।
डॉक्टर्स के अनुसार, अगर कोई स्क्रब टाइफस से संक्रमित हो जाता है, तो उसका इलाज एंटीबायोटिक डॉक्सीसाइक्लिन से करना चाहिए। ऐसे इलाज से आमतौर पर एक हफ्ते के अंदर मरीज ठीक हो सकता है।

अभी तक कोई वैक्सीन नहीं
स्क्रब टाइफस के मरीज में बुखार, ठंड लगने की परेशानी होती है। सिरदर्द, शरीर और नसों में दर्द होता है। शरीर में जिस स्थान पर कीड़े ने काटा हो वहां का रंग गहराना, नीला पड़ना। कुछ समय बाद उस स्थान पर पपड़ी जमाना। त्वचा पर लालिमा और चकत्ते आना। स्क्रब टाइफस को रोकने के लिए अभी कोई वैक्सीन नहीं है। भारत के अलावा इंडोनेशिया, चीन, जापान और उत्तरी ऑस्ट्रेलिया के ग्रामीण इलाकों से स्क्रब टाइफस के मामले सामने आ चुके हैं।

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