कार्तिक की तूफानी गेंदबाजी उड़ाती है पिता की नींद:हापुड़ के कार्तिक त्यागी के ऐतिहासिक प्रदर्शन से रात भर जागा परिवार, पिता बोले- खेलता ये है बीपी मेरा बढ़ता है

मेरठ8 महीने पहलेलेखक: शालू अग्रवाल
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हापुड़ के कार्तिक त्यागी ने IPL में पंजाब किंग्स के खिलाफ मैच के आखिरी ओवर में राजस्थान रॉयल्स को जीत दिलाई थी - Dainik Bhaskar
हापुड़ के कार्तिक त्यागी ने IPL में पंजाब किंग्स के खिलाफ मैच के आखिरी ओवर में राजस्थान रॉयल्स को जीत दिलाई थी

IPL में मंगलवार को पंजाब किंग्स के मुंह से जीत छीनकर राजस्थान रॉयल्स को जीत दिलाने वाले हापुड़ के तेज गेंदबाज कार्तिक त्यागी के प्रदर्शन ने सभी को चौंका दिया है। 2000 के बाद क्रिकेट के मैदान में दर्शकों को ऐसा तूफानी अंदाज़ देखने को मिला। यूपी के हापुड़ जिले के धनौरा गांव में कार्तिक का परिवार रहता है। यूएई के मैदान में बेटे की जीत से गर्वित पिता योगेंद्र त्यागी ने दैनिक भास्कर से कार्तिक के बारे में बातचीत की...

कार्तिक क्रिकेट की दुनिया का नया सितारा बन चुके हैं, लेकिन इस मैच से पहले हार की घबराहट और मैच के बाद जीत की खुशी में उनका परिवार जागता रहा।
कार्तिक क्रिकेट की दुनिया का नया सितारा बन चुके हैं, लेकिन इस मैच से पहले हार की घबराहट और मैच के बाद जीत की खुशी में उनका परिवार जागता रहा।

जिस दिन मैच था दिनभर बेचैनी रही
पिता योगेंद्र कहते हैं कि जब भी बेटे का मैच होता है हमारा पूरा घर चिंता में रहता है। मंगलवार को भी वही हुआ। मैच से पहले मुझे बैचेनी थी कि प्लेइंग-11 में जगह मिलेगी या नहीं। प्लेइंग-11 में जगह मिली तो बेचैनी और बढ़ गई क्योंकि टीम हार रही थी। अंतिम ओवर में जिस तरह कार्तिक ने 2 विकेट चटकाए, उसे देखकर मैं खुद को रोक नहीं सका। भगवान को जीत का शुक्रिया कहा। जीत के बाद कार्तिक से बात करने की बेचैनी थी। रात ढ़ाई बजे वीडियो कॉल पर बात हुई, तब हम सभी रिलेक्स हुए। मैच वह खेल रहा होता है, डरता मैं हूं। मंगलवार को हुए मैच के बाद हमारा पूरा घर जागता रहा।

बहन नंदिनी कहती है कि भैया हमेशा अच्छा खेलें यही प्रार्थना है
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7 साल की उम्र में थाम लिया बल्ला
पिता योगेंद्र कहते हैं कि हमारे घर से कोई क्रिकेटर निकलेगा, ये कभी नहीं सोचा था। कार्तिक 7 साल का था तभी से गली क्रिकेट खेलता था। गांव में 2 बीघा जमीन पर ये 20-30 लड़के मिलकर संडे को क्रिकेट खेलते हैं। मैने देखा कि इसका मन पढ़ाई में बिल्कुल नहीं लगता बस सारा दिन खेल। तब फैसला किया अब इसे खेल ही खिलाना है।

हापुड़ में तब क्रिकेट की कोई खास सुविधा नहीं थी। जिस स्कूल में कार्तिक पढ़ने जाता था, वहीं एक क्रिकेट सेंटर था उसमें एडमिशन करा दिया। कुछ दिन बाद इसने कहा पापा इस एकेडमी में कुछ नहीं सिखाते। फिर मैंने दूसरी एकेडमी खोजी तो किसी ने गाजियाबाद का पता दिया, वहां एडमिशन करा दिया। कुछ दिन बाद वहां भी इसे अच्छा नहीं लगा। मजबूरन हमें तीसरी एकेडमी खोजनी पड़ी।

कार्तिक की मां नीलम बेटे का कोई मैच नहीं छोड़ती कहती हैं उसे देखती हूं तो उम्मीद बंधी रहती है
कार्तिक की मां नीलम बेटे का कोई मैच नहीं छोड़ती कहती हैं उसे देखती हूं तो उम्मीद बंधी रहती है

पीके और भुवी के कोच ने निखारा हुनर
हापुड़ और गाजियाबाद की क्रिकेट एकेडमी पसंद न आने पर कार्तिक को मेरठ में प्रवीण कुमार और भुवनेश्वर के कोच विपिन वत्स के बारे में पता चला। पिता के साथ कार्तिक मेरठ आया। जहां विपिन वत्स ने कार्तिक के 3 ट्रायल लिए। हर ट्रायल में कार्तिक का तूफानी अंदाज देखकर विपिन वत्स ने उसे शिष्य स्वीकार कर लिया।

पिता योगेंद्र कहते हैं। 11 साल की उम्र में कार्तिक विपिन सर के पास पहुंचा, आज भी उन्हीं का छात्र है। टूर पर नहीं होता तो मेरठ में रहकर एकेडमी में अभ्यास करता है। कोरोना काल में भी वहीं से ट्रेनिंग लेता रहा। कोच विपिन कहते हैं कि कार्तिक में क्रिकेट का जो पैशन है, वही उसकी गेंदबाजी को रफ्तार देता है। वो अनुशासन और नियमों को मानने वाला खिलाड़ी है।

प्रवीन कुमार और भुवनेश्वर कुमार के बाद कार्तिक त्यागी कोच विपिन वत्स की मेहनत से तराशे हीरे हैं
प्रवीन कुमार और भुवनेश्वर कुमार के बाद कार्तिक त्यागी कोच विपिन वत्स की मेहनत से तराशे हीरे हैं

पिता रहे हैं शूटिंग बॉल के नेशनल चैंपियन
पिता योगेंद्र ने बताया कि घर का पहला बच्चा है जो क्रिकेट में गया है। आज तक हमारे घर से किसी ने क्रिकेट नहीं खेला। हां, मैं शूटिंग बॉल में पांच साल नेशनल चैंपियन रहा हूं। पारिवारिक जिम्मेदारी के कारण अपने खेल करियर को रोकना पड़ा। शायद खुद न खेल पाने की कसक मेरे मन में थी। जब मैंने कार्तिक की रुचि खेलों में देखी तो इसे दूसरी चीजों से दूर कर दिया। मैं किसान हूं, आज भी खेती करता हूं। लेकिन कार्तिक को ये भी नहीं पता हमारे खेत कहां हैं और कितने हैं। कब कौन-सी फसल बोई जाती है। वे आगे जोड़ते हैं कि मैंने उससे कभी खेतों में काम नहीं कराया।

वर्कआउट में विदेशी टाइमटेबल ही फॉलो करता है
कार्तिक घर पर रहकर भी विदेशी टाइमटेबल फॉलो करता है। ताकि टूर के समय परेशानी न हो। पूरे कोरोना काल में घर पर रहा मगर वर्कआउट टाइम अन्य देशों वाला रहा। रात 12 बजे से ढाई बजे तक वर्कआउट करना। 3 बजे सोना। दोपहर 12 बजे उठकर फिर 2 घंटे का वर्कआउट। वर्कआउट में वह रनिंग, जिम, स्ट्रेंदिंग एक्सरसाइज, योग करता है। शाम 4 बजे से फील्ड पर अभ्यास करता है। घर पर उसके लिए जिम बनाया है, उसी में व्यायाम करता है। कोचिंग के लिए मेरठ जाता है।

मां और बहन ने बांटी मिठाई
कार्तिक की मां नीलम बेटे का हर मैच देखती हैं और जब भी वह अच्छा करता है तो प्रसाद जरूर चढ़ाती हैं। छोटी बहन कहती है कि इस बार रक्षाबंधन पर भैया मेरे साथ थे, बहुत अच्छा लगा। उनको जब भी जीतते हुए देखती हूं, तो खुशी से उछल पड़ती हूं।

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