कहानी 1857 की क्रांति की शुरुआत की:मेरठ में जिस जेल को रातोंरात तोड़कर आग के हवाले किया, आज वहां है खेल का मैदान

मेरठ18 दिन पहले
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मेरठ में बना विक्टोरिया पार्क, जहां 1857 में क्रांति की चिंगारी शुरू हुई थी। - Dainik Bhaskar
मेरठ में बना विक्टोरिया पार्क, जहां 1857 में क्रांति की चिंगारी शुरू हुई थी।

10 मई को क्रांति दिवस मनाने के लिए मेरठ इस समय सजने-संवरने लगा है। प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ अमर शहीदों को नमन करने यहां आने वाले हैं। प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की शुरूआत मेरठ से हुई। इसीलिए दुनियाभर में मेरठ को क्रांति के शहर के नाम से जाना जाता है।

मेरठ से हुई थी 1857 की क्रांति की शुरूआत
मेरठ से हुई थी 1857 की क्रांति की शुरूआत

कैंट में जिस स्थान से क्रांति की शुरूआत हुई थी, आज वहां मंदिर और शहीद स्तंभ बना है। जिस जेल को तोड़कर रातों रात कैदियों को छुड़ाया गया और फिर अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ आवाज उठाते हुए जेल को आग के हवाले कर दिया था, आज उस जेल के स्थान पर खेल का लंबा चौड़ा मैदान है। इस पार्क को मौजूद समय में विक्टोरिया पार्क के नाम से जाना जाता है।

औघड़नाथ मंदिर में बना है शहीद स्तंभ

औघड़नाथ मंदिर में बना शहीद स्तंभ
औघड़नाथ मंदिर में बना शहीद स्तंभ

कैंट स्थित औघड़नाथ मंदिर को काली पलटन मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। यहीं से 1857 की क्रांति की शुरुआत हुई थी। मंदिर समित और प्रशासन की तरफ से यहां हर साल 10 मई को शहीदों को नमन करने और गौरव गाथा बताने के लिए कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। औघड़नाथ मंदिर परिसर में शहीद स्तंभ भी बना हुआ है। दो किमी दूर शहीद स्मारक बना है, जहां शहीदों के नाम शिलापट पर दर्ज हैं। हर देश प्रेमी यहां शहीदों को नमन करता है।

औघड़नाथ मंदिर में शहीद स्तंभ पर लगा प्रथम स्वतंत्रता संग्राम का शिलापट।
औघड़नाथ मंदिर में शहीद स्तंभ पर लगा प्रथम स्वतंत्रता संग्राम का शिलापट।

10 मई को फूटी थी आजादी की पहली चिंगारी

वरिष्ठ इतिहासकार प्रो. केके शर्मा बताते हैं कि 10 मई 1857 को रविवार के दिन मेरठ से क्रांति की शुरूआत हुई। बाद में यही क्रांति कानपुर, बरेली, झांसी और अवध तक फैल गई। उस समय सैन्य विद्रोह के रूप में शुरू हुई क्रांति ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ जनव्यापी विद्रोह में बदल गई।

वरिष्ठ इतिहासकार प्रो. केके शर्मा ने मेरठ की क्रांति के बारे में विस्तार से बताया।
वरिष्ठ इतिहासकार प्रो. केके शर्मा ने मेरठ की क्रांति के बारे में विस्तार से बताया।

चर्बी लगे कारतूसों का विरोध करने पर 85 सैनिकों का कोर्ट मार्शल किया गया। उन्हें सजा सुनाते हुए अंग्रेजी हुकुमत ने जेल में बंद कर दिया। उस समय मेरठ में दो जेल थीं। जिस जेल में सैनिकों को भेजा गया आज वह जगह विक्टोरिया पार्क है। दूसरी जेल दिल्ली रोड पर थी, आज वहां केसरगंज बाजार बसा हुआ है।

रातों रात जेल तोड़कर छुड़ाए गए थे बंदी और सैनिक

मेरठ के पांचली निवासी धन सिंह गुर्जर सदर बाजार थाने के कोतवाल थे। 24 अप्रैल को 85 सैनिकों को की परेड हुई। नौ मई 1857 को सजा सुनाई और सैनिकों को जेल भेज दिया गया। दस मई की शाम अंग्रेजी हुकुमत के खिलाफ बगावत शुरू कर दी गई। इसमें कोतवाल धन सिंह गुर्जर ने अपने साथ सैनिकों को लेकर जेल पर हमला कर दिया।

विक्टोरिया पार्क मैदान का मुख्य गेट। 1857 में इसी स्थान पर जेल का गेट था।
विक्टोरिया पार्क मैदान का मुख्य गेट। 1857 में इसी स्थान पर जेल का गेट था।

जेल तोड़ते हुए रात में 85 सैनिकों को भी छुड़ाकर अपने साथ लेते हुए अंग्रेजी हुकुमत के खिलाफ विद्रोह कर दिया गया। यह 85 सैनिक तीसरी अश्वरोही सेना के जवान थे। 10 मई की रात को मेरठ की दोनों जेल तोड़ते हुए कैदियों को छुड़ाया और जेल में आग लगा दी गई। उसके बाद मेरठ की तहसील और कोर्ट भी आग के हवाले कर दी गईं। रात में ही पांचली, गगोल, मवाना, घाट गांव के ग्रामीण भी इस क्रांति में शामिल हो गए और ब्रिटिश हुकुमत के खिलाफ क्रांति में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया।