पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

मेरठ में केंद्रीय गौवंश अनुसंधान संस्थान के अस्तित्व पर खतरा:जुलाई में खत्म हो रही लीज, मंत्री और सांसद ने इंस्टीटयूट के लिए पीएम से मांगी 90 साल की लीज पर 300 एकड़ जमीन

मेरठ14 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
सेंट्रल इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च ऑन कैटल में देशी नस्लों की गायों के अनुवांशिक सुधार व दूध उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर काम होता है। - Dainik Bhaskar
सेंट्रल इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च ऑन कैटल में देशी नस्लों की गायों के अनुवांशिक सुधार व दूध उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर काम होता है।

मेरठ में बने केंद्रीय गौवंश अनुसंधान संस्थान के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है। जुलाई के अंत में संस्थान बंद भी हो सकता है। क्योंकि संस्थान सेना की जिस जमीन पर चल रहा है। उसकी लीज जुलाई के अंत में खत्म हो रही है। रिसर्च इंस्टीट्यूट को संचालन के लिए 300 एकड़ जमीन चाहिए, जमीन नहीं मिली तो संस्थान पर ताला लग सकता है। बता दें कि केंद्रीय गौवंश अनुसंधान संस्थान की स्थापना के पीछे मकसद देश में गायों की अच्छी नस्लें तैयार करना व उनकी दुग्ध उत्पादन क्षमता को बढ़ाना था।

रिसर्च इंस्टीट्यूट को संचालन के लिए 300 एकड़ जमीन चाहिए।
रिसर्च इंस्टीट्यूट को संचालन के लिए 300 एकड़ जमीन चाहिए।

विकसित की गई गाय की नई नस्ल
सेंट्रल इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च ऑन कैटल में देशी नस्लों की गायों के अनुवांशिक सुधार व दूध उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर काम होता है। संस्थान में गिर, कांकरेज, साहीवाल नस्ल की गायों पर काफी रिसर्च हुए हैं। साथ ही साहिवाल, होल्सटीन फ्रीजियन नस्लों को मिलाकर एक अच्छी नस्ल फ्रीजवाल भी तैयार की है। जिसकी दूध उत्पादन क्षमता 3628 है।

संस्थान में पशुओं की गुणवत्ता में सुधार पर ज्यादा फोकस किया जाता है।
संस्थान में पशुओं की गुणवत्ता में सुधार पर ज्यादा फोकस किया जाता है।

गायों की दुग्ध उत्पादन क्षमता पर शोध
भारत में 50 नस्लों की 193.8 मिलियन गाय हैं। दुनिया के कुल दुग्ध उत्पादन का 20 प्रतिशत दूध भारत में होता है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद्- केंद्रीय गौवंश अनुसंधान संस्थान मेरठ में देश का अकेला रिसर्च इंस्टीट्यूट है जहां 34 सालों से स्वदेशी गायों के उत्पादन बढ़ाने पर रिसर्च होता है। संस्थान का दावा है कि यहां पिछले 10 सालों में जो शोध हुए उससे गायों की दूध उत्पादन क्षमता 24-30 प्रतिशत बढ़ी है। संस्थान कम लागत में पशु उर्वरता पर काम कर रहा है।

जमीन नहीं मिली तो रिसर्च इंस्टीट्यूट होगा बंद
इंस्टीट्यूट रक्षा मंत्रालय के सैन्य फार्म की 32.5 एकड़ जमीन पर लीज पर चल रहा है। लीज 2021 जुलाई में खत्म हो रही है। इंस्टीट्यूट को अब 300 एकड़ जमीन चाहिए। अगर यह जमीन खरीदी जाती है तो इसकी कीमत 1204 करोड़ रुपए होगी। अगर संस्थान किसी दूसरी जगह शिफ्ट करें तो उसमें काफी खर्च होगा। लीज का वार्षिक किराया 2.5 प्रतिशत किराया के अनुसार 30 करोड़ रुपए सालाना होगा। किराए की इतनी रकम संस्थान दे नहीं सकता इसलिए 1500 एकड़ जमीन में से 300 एकड़ जमीन 90 साल के लिए लीज पर दी जाए।

अगर संस्थान किसी दूसरी जगह शिफ्ट करें तो उसमें काफी खर्च होगा।
अगर संस्थान किसी दूसरी जगह शिफ्ट करें तो उसमें काफी खर्च होगा।

संस्थान ने की सीएम और पीएम से 300 एकड़ जमीन देने की मांग
रिसर्च इंस्टीटयूट इस समय सेना की 32.5 एकड़ रक्षा भूमि पर चल रहा है। इंस्टीटयूट को नई लैब बनानी है इसके लिए ज्यादा जगह चाहिए। संस्थान ने सीएम, पीएम से 300 एकड़ जमीन देने की मांग की है। जमीन 1 रुपए प्रति एकड़ की दर से लीज पर दिलाई जाए। ताकि यहां देश, विदेश की गायों की नस्ल सुधार व उत्पादन क्षमता पर काम हो सके।

मंत्री और सांसद ने पीएम से मांगी 90 साल की लीज पर 300 एकड़ जमीन
सांसद राजेंद्र अग्रवाल के अनुसार प्रधानमंत्री को रिसर्च इंस्टीट्यूट को 300 एकड़ जमीन 90 साल की लीज पर दिलाने की मांग की है। यह संस्थान देश के लिए जरूरी संस्थान है। इसका संचालन जरूरी है। कैबिनेट मंत्री डॉ. संजीव बालियान ने बताया कि वेस्टर्न यूपी ही नहीं हरियाणा, पंजाब, दक्षिण भारत कृषि प्रधान इलाके हैं। हमारे देश में अच्छी नस्लों की गायें हों उनकी क्षमता बढ़े इसलिए यह संस्थान चलना चाहिए। यहां शोधार्थियों को भी नई जानकारियां मिलती हैं। राज्यसभा सांसद विजयपाल ताेमर भी जमीन की मांग उठा चुके हैं।

खबरें और भी हैं...