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मेरठ में 3 जुलाई को है जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव:वेस्ट यूपी में भाजपा की नाक का सवाल बना इलेक्शन, बागपत- मुजफ्फरनगर पर विशेष फोकस

मेरठएक वर्ष पहले
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2022 के चुनाव में भाजपा को वेस्ट यूपी फतह के लिए किसानों, जाटों और गुर्जरों को साधना जरूरी है। - Dainik Bhaskar
2022 के चुनाव में भाजपा को वेस्ट यूपी फतह के लिए किसानों, जाटों और गुर्जरों को साधना जरूरी है।

वेस्ट यूपी में जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव भाजपा की नाक का सवाल बन गया है। मेरठ, सहारनपुर सहित पश्चिम की 7 सीटों पर निर्विरोध जीतने के बाद पार्टी के सामने 7 सीटों पर जीत की बड़ी चुनौती बाकी है। 3 जुलाई को इन 7 सीटों पर होने वाले जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में बागपत, मुजफ्फरनगर दो ऐसी सीटें हैं जहां जीतने के लिए पार्टी एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है। पार्टी हाईकमान ने 14 जिलों के सांसद, विधायकों और बड़े नेताओं को इन जिलों में चुनाव जिताने की जिम्मेदारी सौंपी है। स्वयं प्रदेश अध्यक्ष और संगठन इन सीटों पर नज़रें गढ़ाए हैं, पल-पल का अपडेट ले रहा है।

3 जुलाई के चुनाव में 07 सीटें जीतना चुनौती
26 जून को जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए नामांकन और स्क्रूटनी थी। 26 जून को मेरठ में भाजपा निर्विरोध जीत गई। 26 से 1 जुलाई तक पार्टी ने वेस्ट की 14 में से 6 और सीटों को निर्विरोध जीत लिया है। इसमें बुलन्दशहर, गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर, मुरादाबाद, अमरोहा, सहारनपुर प्रमुख है। बुलंदशहर में जीत के लिए पार्टी ने सारे घोड़े खोल दिए। कुछ यही हाल सहारनपुर, मेरठ में भी था। 3 जुलाई को बागपत, मुजफ्फरनगर, शामली, हापुड़, संभल, रामपुर और बिजनौर में अध्यक्ष पद का चुनाव है, इसे जीतने के लिए पार्टी पुरजोर कोशिश में लगी है।

किसानों के गढ़ में मजबूत पकड़ की तैयारी
2022 के चुनाव में भाजपा को वेस्ट यूपी फतह के लिए किसानों, जाटों और गुर्जरों को साधना जरूरी है। बागपत, मुजफ्फरनगर और शामली तीनों किसानों के प्रमुख गढ़ हैं। गुर्जर बाहुल्य सहारनपुर और गौतमबुद्धनगर में पार्टी जीत चुकी है। अब चुनौती बागपत, मुजफ्फरनगर, शामली की है। शामली में पिछले एक महीने से गन्ना मंत्री सुरेश राणा को फील्ड पर उतारा है। बागपत में पूर्व मंत्री सतपाल सिंह, मुजफ्फरनगर में कैबिनेट मंत्री संजीव बालियान मोर्चा संभाले हैं। प्रदेश अध्यक्ष से लेकर संगठन के बड़े नेता स्वयं इन जिलों में जाकर चुनावी तपिश भांप रहे हैं।

इसके बावजूद पार्टी किसानों को साध नहीं पा रही। तीनों जिलों में रालोद, भाकियू पार्टी को कड़ी टक्कर दे रहे हैं। 7 में से 3 सीटों को जीतने के लिए पार्टी ने अन्य जिलों के सांसदों, विधायकों से लेकर बड़े नेताओं को उतार दिया है। जनप्रतिनिधियों को लोगों से संपर्क बनाने और सदस्यों को साधने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं, पार्टी किसी भी हाल में ये चुनाव जीतना चाहती है।

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