टोक्यो ओलिंपिक...फाइनल में थ्रोअर कमलप्रीत:कोच राखी को टोक्यो नहीं जा पाने का मलाल, मेडल के लिए मेरठ से कर रही दुआएं, बोलीं- मुकाबले की घड़ी में कोच का साथ जरूरी

मेरठ4 महीने पहले

डिस्कस थ्रो एथलीट कमलप्रीत कौर टोक्यो ओलिंपिक में इतिहास रचने के करीब हैं। 25 साल की कमलप्रीत चक्का फेंक स्पर्धा में 64 मीटर दूर चक्का फेंक फाइनल में पहुंच गईं। यह ओलिंपिक में किसी भारतीय का अभी तक सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है।

कमलप्रीत की कोच राखी त्यागी मेरठ में रहती हैं। वे कमलप्रीत के जीतने की दुआ कर रही हैं। हालांकि इस ऐतिहासिक पल में वे कमलप्रीत के साथ नहीं हैं। इसका उन्हें मलाल है। अंतिम समय तक कमलप्रीत कोच को टोक्यो साथ लेकर जाने के लिए प्रयास करती रहीं। लेकिन अनुमति नहीं मिली। आखिर में कमलप्रीत बिना अपने कोच के टोक्यो गई हैं। राखी कहती हैं आज कमलप्रीत ने अच्छा खेला, हम दोनों वहां साथ होते तो कमलप्रीत रिकार्ड बनाती। मुकाबले की घड़ी में अपनी शिष्या से दूर राखी त्यागी ने इस दर्द को दैनिक भास्कर के साथ साझा किया...

मुश्किल समय में उसे मेरी जरूरत

राखी ने कहा, कमलप्रीत की परफार्मेंस क्वालिफाइंग राउंड के अनुसार अच्छी है, लेकिन अप टू द मार्क उसे खुद को और अच्छा करना होगा। जो ट्रेनिंग वो करके गई हैं उस परफार्मेंस पर कमलप्रीत अभी तक नहीं पहुंची हैं। इतने बड़े मुकाबले में खिलाड़ी पर मानसिक दवाब बहुत होता है उसे प्रेरणा की जरूरत होती है। इसमें कोच की अहम भूमिका होती है। कमलप्रीत को अब खुद को मोटिवेट करना होगा। जो कुछ छोटे-छोटे फॉल्ट होते हैं उनको बताने वाला एक गाइड इस समय खिलाड़ी को चाहिए होता है। सबसे बड़े खेल मुकाबले में खिलाड़ी के साथ उसका कोच नहीं है इससे परेशानी आती है।

राखी त्यागी 2014 से कमलप्रीत को कोचिंग दे रही हैं।
राखी त्यागी 2014 से कमलप्रीत को कोचिंग दे रही हैं।

ट्रेनिंग सेशन से बढ़कर खेलना होगा

राखी ने बताया कि कमलप्रीत अच्छा खेली है, पदक के लिए उसे बढ़कर खेलना होगा। अभी भी अपने ट्रेनिंग सेशन के थ्रो से दूर है। ट्रेनिंग में कमलप्रीत ने 65 तक थ्रो किया तो उन्हें फाइनल में 67 तक थ्रो करना होगा तभी वो और अच्छा कर पाएंगी। यह मानसिक दवाब का दौर होता है ऐसे में कोच का साथ होना जरूरी है। 10 दिन की लास्ट ट्रेनिंग गेम में मोर इफेक्टिव होती है जब मुझे उसके साथ होना चाहिए तो मैं वहां नहीं हूं, मगर उसकी परफार्मेंस अच्छी रही। कमल फाइनल में अच्छा करेगी यह उम्मीद है।

अंत तक प्रयास किया मगर विफल रहे

राखी त्यागी 2014 से कमलप्रीत को कोचिंग दे रही हैं। ओलिंपिक में खिलाड़ियों के साथ कोच के जाने की सूची में राखी त्यागी का नाम तो पहुंचा मगर बाद में नाम सूची से हटा दिया गया। कमलप्रीत ओर राखी ने लगातार प्रयास किए कि वो टोक्यो साथ जाएं। मेरठ जिला एथलेटिक्स संघ के सचिव अनु कुमार की ओर से भी राखी त्यागी को टोक्यो जाने की अनुमति के लिए प्रयास होता रहा। सचिव अनु कुमार ने बताया राखी कमलप्रीत के साथ जाती तो उनका मनोबल बढ़ता। कमलप्रीत और राखी त्यागी में अच्छा सामंजस्य है। राखी के वहां होने से कमलप्रीत और अच्छा खेलती।

गोल्ड मेडल की लगा दी झड़ी
मेरठ रासना की राखी त्यागी 2014 से पंजाब में स्पोर्ट्स अथारिटी आफ इंडिया (साई) में कोच हैं। पिछले 7 सालों से राखी त्यागी पंजाब की डिस्कस थ्रोअर कमलप्रीत को कोचिंग दे रही हैं। कमलप्रीत ने नेशनल में 66.59 मीटर का रिकार्ड बनाकर ओलिंपिक का कोटा हासिल किया था। राखी के मार्गदर्शन में ही कमलप्रीत के प्रदर्शन में लगातार सुधार हुआ और कम समय में ही उन्होंने अच्छा प्रदर्शन किया। 2017 में राखी को भारत सरकार ने यूनिवर्सिटी आफ बर्मिघम यूनाइटेड किंगडम में स्ट्रेंथ एंड कंडिशनिंग कोर्स करने भेजा था। राखी के निर्देशन में कमलप्रीत अच्छा परफार्म कर रही थी, इसलिए उन्हें सरकार ने यह अवसर दिया। कमलप्रीत ने 2016-2019 तक चार साल लगातार नेशनल लेवल और फेडरेशन कप में तीन गोल्ड मेडल जीते।

राखी के निर्देशन में बेहतरीन खेलती गईं कमलप्रीत
राखी के अनुसार जून 2021 में पटियाला में हुई इंटर स्टेट नेशनल एथलेटिक्स चैंपियनशिप में कमलप्रीत ने 66.59 मीटर की दूरी नाप कर नया राष्ट्रीय रिकार्ड बनाया। वर्ष 2015 के जूनियर नेशनल में 49.89 मीटर दूरी के साथ भी रिकार्ड बनाया था। 2016 में आल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी में 55.11 मीटर दूरी का रिकार्ड भी कमलप्रीत के नाम है। 2017 व 2019 की एशियन चैंपियन में पांचवें स्थान पर रहीं। वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स 2017 में छठे स्थान पर रहीं और वहां तक पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला बनीं।

कमलप्रीत हैं राखी की पहली प्रशिक्षु
ये संयोग है कि राखी और कमल दोनों का साथ एक दूसरे की सफलता बना। राखी को पहली प्रशिक्षु कमलप्रीत ही मिली थी। राखी के पिता विजेंद्र प्रकाश त्यागी मेरठ रोहटा में रासना गांव के निवासी हैं। राखी के मामा का घर भी मेरठ में वेस्टर्न कचहरी रोड असौड़ा हाउस में है। इत्तेफाक से राखी की शादी दिसंबर 2020 में मेरठ में ही हुई। राखी की स्कूली शिक्षा मुरादाबाद में हुई है। यहीं से स्कूल स्पोर्ट्स में ऊंची कूद में हिस्सा लिया करती थी।

ओलिंपिक में साथ न जाने के बाद राखी अपने पिता के घर मुरादाबाद चली गईं, अभी वहीं हैं। राखी के पति अखिल त्यागी सहारनपुर देववंद के गांव साधारणपुर के रहने वाले हैं। 2003 में लखनऊ साई सेंटर में बतौर प्रशिक्षु चयनित हुईं। इसके बाद लखनऊ में ही किशन कालेज से बीपीएड व एमपीएड किया। 2011 में पटियाला से एनआइएस किया जिसके बाद 2014 में साई में बतौर कोच नियुक्ति मिली। पहली पोस्टिंग साई ट्रेनिंग सेंटर बादल, पंजाब में मिली।​​​​​​​

कोच राखी ने कहा- कोच के साथ खिलाड़ी की बांडिंग होती है जो उसे खेलने में काम आती है।
कोच राखी ने कहा- कोच के साथ खिलाड़ी की बांडिंग होती है जो उसे खेलने में काम आती है।

कमलप्रीत जीतेगी ये दुआ है
राखी के पति अखिल त्यागी ने बताया राखी को आज कमलप्रीत के साथ वहां न होने का बहुत दुख है। वो काफी परेशान है, इसलिए पिता के घर मुरादाबाद में हैं। लेकिन राखी लगातार कमलप्रीत की जीत की प्रार्थना कर रही है। उसे पूरी उम्मीद है कि कमलप्रीत देश को ओलिंपिक में पदक दिलाकर नाम रोशन करेगी। राखी की मेहनत भी काम आएगी। राखी कहती हैं अगर कमलप्रीत के साथ टोक्यो में होती तो उसका मनोबल बढ़ता। दरअसल कोच के साथ होने से खिलाड़ी पर मानसिक असर होता है। खिलाड़ी जिस कोच के साथ तैयारी करते हैं उनके मार्गदर्शन व प्रोत्साहन की जरूरत अंतिम क्षणों में सबसे ज्यादा होती है। कोच को ओलंपिक में भेजने का निर्णय अच्छा है। कोच के साथ खिलाड़ी की बांडिंग होती है जो उसे खेलने में काम आती है।

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