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मानवता अभी मरी नहीं:अर्थी को कंधा देने में रिश्तेदारों ने किया किनारा तो पड़ोस में रहने वाले मुस्लिम बने सहारा, करवाया अंतिम संस्कार

मेरठ5 महीने पहले
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कोरोना महामारी के डर ने लोगों की बीच दूरी बढ़ा दी है। नैचुरल डेथ के मामले में भी रिश्तेदार दूरी बना रहे हैं। ऐसा ही एक मामला मेरठ जिले के रामनगर मोहल्ले में गुरुवार को देखने को मिला। यहां एक महिला का बीमारी के चलते निधन होने पर रिश्तेदारों ने किनारा कर लिया। तब पड़ोस में रहने वाले मुस्लिम आगे आए और अर्थी को कंधा देकर शव का अंतिम संस्कार कराकर सौहार्द की मिसाल पेश की।

मौत के वक्त बेटा और पति बाहर थे
हापुड़ अड्डा स्थित रामनगर मोहल्ले की रहने वाली महिला सुषमा कुछ दिनों से बीमार चल रही थी। मंगलवार देर रात अचानक अधिक तबियत खराब होने पर उनका निधन हो गया। घर पर नौकर और नाती के अलावा कोई नहीं था। बेटा नोएडा में था और पति काम के सिलसिले में कई दिनों से बनारस गए हुए थे।

बुजुर्ग की नैचुरल डेथ हुई थी।
बुजुर्ग की नैचुरल डेथ हुई थी।

परिवार ने रिश्तेदारों को बुलाया मगर कोई नहीं आया
बुधवार सुबह पति और बेटा दोनों मेरठ पहुंच गए और रिश्तदारों को इसकी सूचना दी। लेकिन, रिश्तेदारों ने कोरोना संक्रमण फैला होने की बात कहकर अंतिम संस्कार में आने के लिए इंकार कर दिया। तब मोहल्ले में रहने वाले मुस्लिम समाज के लोग आगे और महिला के पति और बेटे के साथ मिलकर अंतिम संस्कार की तैयारी कराई।

कंधा देकर दिखाई मानवता की राह।
कंधा देकर दिखाई मानवता की राह।

कंधा देकर शव श्मशान पहुंचवाया
मुस्लिम समाज के लोगों ने ही अर्थी को कंधा देकर श्मशान तक पहुंचाया, जहां उनका रीति रिवाज के साथ अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम संस्कार में शामिल हुए तसलीम, शकील अहमद, जावेद आदि का कहना है कि दुख की इस घड़ी में यदि पड़ोसी ही पड़ोसी के काम नहीं आएगा तो फिर मानवता कहां बचेगी?

मृतका का बेटा।
मृतका का बेटा।
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