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मेरठ में ब्लैक फंगस का कहर:15 दिन में 20 मौतें, जिन्हें कोरोना नहीं हुआ वे भी हो रहे हैं फंगस का शिकार

मेरठ6 दिन पहले
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कोरोना के बाद अब ब्लैक फंगस मेरठ के लोगों के लिए मुसीबत बन गया है। मेडिकल अस्पताल में रोजाना ब्लैक फंगस के 04-05 नए मरीज भर्ती हो रहे हैं। बीते 15 दिन में 20 से ज्यादा मौतें भी हुई हैं।

निजी अस्पतालों के अलावा मेडिकल अस्पताल में नियमित ब्लैक फंगस के मरीज आ रहे हैं। मरीज अगर ठीक होकर जा रहे हैं तो नए केस भी भर्ती हो रहे हैं। वहीं मरीजों को ऑपरेशन करके सही किया जा रहा है। मौतें भी लगातार हो रही हैं।

दवा की कमी से बढ़ता संक्रमण बना मौत का कारण

ब्लैक फंगस के मरीजों को इलाज के लिए दवा नहीं मिल रही है। मेडिकल अस्पताल में अभी भी एंफोटेरोसीन-बी की किल्लत बनी हुई है। लखनऊ से हर दूसरे, तीसरे दिन पर जिले में दवा आती है। उसे पूरे मंडल में बांटा जाता है। मरीज को जिस अनुपात में एंफोटेरोसीन -बी की डोज चाहिए वो नहीं मिलने के कारण संक्रमण बढ़ रहा है। इसकी वजह से भी मौतें हो रही हैं।

कोरोना पॉजिटिव रह चुके लोग हाईरिस्क पर

पोस्ट कोविड की दिक्कतों में ब्लैक फंगस भी शामिल हो चुका है। म्यूकरमाइकोसिस के मरीजों में ऐसे मरीजों की संख्या अधिक है जो कोरोना से ठीक हुए फिर ब्लैक फंगस ने उन्हें घेरा। आनंद अस्पताल में ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. पुनीत भार्गव के अनुसार ऑपरेशन ही म्यूकरमाइकोसिस का बड़ा इलाज है। कोविड निगेटिव ऐसे मरीजों में संक्रमण बढ़ने का प्रमुख कारण ऑक्सीजन पाइप की सही सफाई न होना, व इलाज के दौरान उचित सफाई न रखना है। मरीजों को समय पर दवा न मिलने के कारण संक्रमण बढ़कर दिमाग तक पहुंच रहा है।

संक्रमण मस्तिष्क तक पहुंचने पर गंभीर हो जाती है स्थिति

अगर समय पर इलाज मिले और संक्रमण को ऑपरेशन कर निकाल दिया जाए तो मरीज के बचने की गुजाइंश काफी रहती है। मगर इलाज समय पर न मिलने के कारण संक्रमण ब्रेन तक पहुंचता है, ब्रेन में संक्रमण पहुंचते ही मरीज का बचना मुश्किल हो जाता है

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