हिंसक किसान आंदोलन BJP को पड़ सकता है भारी:सरकारें जब-जब किसानों से टकराईं, उन्हें सत्ता से होना पड़ा बाहर, 2012 में मायावती सरकार को भुगतना पड़ा था खामियाजा

लखनऊ9 महीने पहले
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लखीमपुर खीरी में हिंसक हुआ किसान आंदोलन। - Dainik Bhaskar
लखीमपुर खीरी में हिंसक हुआ किसान आंदोलन।

यूपी के आगामी विधानसभा चुनाव में अब 6 माह से भी कम का वक्त बचा है। 3 नए कृषि कानूनों के विरोध में पिछले दस माह से यूपी, पंजाब और देश के दूसरे राज्यों में किसान आंदोलन कर रहे हैं। रविवार को लखीमपुर खीरी में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा के बेटे ने किसानों पर गाड़ी चढ़ाई, जिसके बाद किसान आंदोलन हिंसक हो उठा।

8 लोगों की मौत के बाद पूरे प्रदेश को अलर्ट कर दिया गया है। आगामी विधानसभा चुनाव से पहले किसान आंदोलन को खत्म करना अब सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। इतिहास गवाह है कि जब-जब सरकारें किसानों से टकराई हैं, तो सरकारों को ही नुकसान उठाना पड़ा है।

अपनी जंग से पीछे नहीं हट रहा किसान

पिछले दस माह से अधिक समय से किसान केंद्र सरकार के 3 नये कृषि कानूनों के खिलाफ धरना दे रहे हैं। सर्दी, गर्मी और बारिश में भी ये दिल्ली की सीमाओं पर डटे रहे। कोरोना की दूसरी लहर के बाद भी आंदोलन नहीं खत्म हुआ। 5 सितंबर 2021 को मुजफ्फरनगर में संयुक्त किसान मोर्चे की महापंचायत हो चुकी है, जिसमें देशभर के किसान शामिल हुए।

सरकार की तरफ से जिन नेताओं को किसानों के बीच मध्यस्थता की जिम्मेदारी दी गई, वह भी कामयाब नहीं हुए। जानकारों की मानें तो जब-जब बड़े किसान आंदोलन हुए हैं, सरकार और किसानों की सहमति से ही वे खत्म हुए। ऐसे में हिंसक होते इस आंदोलन को लेकर भी केंद्र सरकार को जल्द किसी नतीजे पर पहुंचने की जरूरत है।

मई 2011 में भट्टा परसौल में भी हुई थी हिंसा

मई 2011 में गौतम बुद्ध नगर जिले के भट्टा पारसौल में भी किसान आंदोलन हिंसक हो उठा था। ग्रेटर नोएडा के भट्टा पारसौल गांव में जमीन अधिग्रहण के विरोध में 7 मई 2011 को पुलिस और किसानों के बीच टकराव शुरू हो गया। इसमें दो पुलिसकर्मी और 2 किसानों की गोली लगने से मौत हो गई।

लाठीचार्ज व फायरिंग में 50 से अधिक किसान घायल हुए। जिसके बाद किसान आंदोलन उग्र हो गया। उस समय प्रदेश में बसपा की सरकार थी। पूरे प्रदेश में किसान सड़कों पर उतर आए। नतीजा यह हुआ कि 2012 के विधानसभा चुनाव में ही बसपा सत्ता से बाहर हो गई।

अगस्त 2010 में अलीगढ़ के टप्पल की हिंसा

अगस्त 2010 में अलीगढ़ जिले के टप्पल में भी किसान आंदोलन हिंसक हो उठा था। यह विवाद यमुना एक्सप्रेस वे की जमीन अधिग्रहण को लेकर शुरू हुआ था। जिसमें एक सिपाही समेत 5 लोगों की मौत हुई थी। 14 और 15 अगस्त 2010 को जब किसान टप्पल के जीकरपुर गांव में जमीन अधिग्रहण का विरोध कर रहे थे, तो पुलिस की सख्ती के बाद टकराव शुरू हो गया। हिंसा के बाद मायावती सरकार को झुकना पड़ा और उसने अधिग्रहण नीति में बदलाव कर मुआवजा राशि बढ़ा दी।

अब लखीमपुर में किसान आंदोलन में हिंसा

रविवार को लखीमपुर में किसान आंदोलन हिंसक हो उठा, जिसमें 8 लोगों की मौत हो गई। किसान आंदोलन अभी तक पंजाब और दिल्ली की सीमाओं और वेस्ट यूपी के जिलों में चल रहा था। लेकिन, केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा ने किसानों को सुधारने का जो बयान दिया, उससे नाराज होकर रविवार को हजारों की संख्या में किसान सड़कों पर उतर आए। इस दौरान केंद्रीय मंत्री के बेटे ने धरना दे रहे किसानों पर गाड़ी चढ़ा दी। आक्रोशित किसानों ने आगजनी शुरू कर दी।

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