मेरठ के गरीब बच्चों को फ्री में पढ़ाई का मौका:योगा संस्था ने करवाया बच्चों का एडमिशन, स्टेशनरी और यूनिफॉर्म का भी उठाया खर्च

मेरठ18 दिन पहले
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ये तस्वीर लेबर डे की है जब संगठ� - Dainik Bhaskar
ये तस्वीर लेबर डे की है जब संगठ�

मेरठ में गरीब बच्चों को निशुल्क पढ़ाई करने का अवसर दिया जा रहा है। आर्थिक तंगी के कारण पढ़ाई से दूर रहने वाले इन बच्चों को योग सिखाने वाली एक संस्था शिक्षा की राह दिखा रही है। संस्था अब तक 20 बच्चों को स्कूलों में एडमिशन दिला चुकी है, बल्कि इन बच्चों की स्टेशनरी, यूनिफार्म का खर्चा भी उठा रही है।

बच्चों को स्कूल में एडमिशन कराने के साथ संस्था द्वारा बच्चों को एटिकैट्स और हाइजीन के बारे में भी बताया जाता है
बच्चों को स्कूल में एडमिशन कराने के साथ संस्था द्वारा बच्चों को एटिकैट्स और हाइजीन के बारे में भी बताया जाता है

योग विज्ञान, योग संस्कृति संस्था की पहल
दरअसल विश्व स्तर पर योग का प्रचार प्रसार करने वाली योग विज्ञान संस्था की तमाम शाखाएं मेरठ में चलती हैं। जो शहरवासियों को योग से जोड़ रही हैं। योग विज्ञान संस्थान की शास्त्रीनगर शाखा की सदस्याओं ने मिलकर योग संस्कृति संगठन बनाया है। संगठन का पहला काम कामकाजी महिलाओं, गृहणियों को योग से जोड़ना है। उन्हें फिटनेस के लिए अवेयर करना है। लेकिन कोरोना के बाद इन महिलाओं ने बच्चों की शिक्षा का बीड़ा भी उठाया है। इसी के चलते ये महिलाएं गरीब बच्चों की निशुल्क पढ़ाई करा रही हैं।

संस्था अब तक 20 बच्चों का एडमिशन स्कूल में करा चुकी है स्कूल जाने से बच्चों के चेहरे पर खुशी है
संस्था अब तक 20 बच्चों का एडमिशन स्कूल में करा चुकी है स्कूल जाने से बच्चों के चेहरे पर खुशी है

कोरोना के बाद सरकारी स्कूल भी छूट गया
योग संस्कृति की हेड सीमा अदलखा बताती हैं हमारे आसपास, जगहों में ऐसे तमाम बच्चे होते हैं जो पढ़ना चाहते हैं लेकिन पढ़ नहीं पा रहे क्योंकि उनके पास सीबीएसई स्कूलों की महंगी फीस देने का पैसा नहीं हैं। अब कोरोना के बाद तो हालात और बिगड़ गए लोग आर्थिक तंगी में आ चुके हैं तो सरकारी स्कूल की फीस भरना भी मुश्किल हो रहा है। लेकिन ये बच्चे भी टैलेंटेड हैं। पढ़ना हर बच्चे का हक है। इसलिए हम लोगों ने यह कदम बढ़ाया कि ऐसे बच्चों को संस्था मिलकर पढ़ाएगी उनका खर्च वहन करेगी।

;शेरगढ़ी निवासी प्रीति खुश है क्योंकि अब उसके दोनों बच्चे रोली और राहुल स्कूल जा सकते हैं
;शेरगढ़ी निवासी प्रीति खुश है क्योंकि अब उसके दोनों बच्चे रोली और राहुल स्कूल जा सकते हैं

प्राइवेट, सरकारी दोनों स्कूलों में पढ़ाते
संगठन से जुड़ी कांता बख्शी बताती हैं अब तक 20 बच्चों का एडमिशन हम लोग मिलकर करा चुकी हैं। इसमें 5 बच्चों को प्राइवेट सीबीएसई स्कूल में एडमिशन दिलाया है। क्योंकि इन बच्चों के पेरेंट्स भी फीस में कुछ मदद कर रहे हैं। बाकी 15 बच्चों को सरकारी स्कूलों में प्रवेश कराया है। उनकी फीस का जिम्मा संगठन ने उठाया है। लेकिन बच्चों को पूरी तरह निशुल्क शिक्षा दे रहे हैं। इतना ही नहीं उनकी स्टेशनरी, पढ़ाई की जरूरी चीजों को भी हम लोग दे रहे हैं।

संस्था की हेड सीमा अदलखा बच्चों को खुद पढ़ाती भी हैं
संस्था की हेड सीमा अदलखा बच्चों को खुद पढ़ाती भी हैं
बच्चों के साथ संस्था की महिलाएं समय बिताती हैं उन्हें नई नई जानकारी भी देती हैं
बच्चों के साथ संस्था की महिलाएं समय बिताती हैं उन्हें नई नई जानकारी भी देती हैं

ये हमारा स्कूल चलो अभियान
सरकार ने बच्चों के लिए स्कूल चलो अभियान शुरू किया लेकिन इस संगठन की महिलाओं ने अपने अभियान को भी यही नाम दिया है। कहती हैं हमारे उद्देश्य तो समान हैं इसलिए नाम भी एक होने में हर्ज क्या है। संगठन में निशा सक्सेना सीमा सागर,सीमा साहनी ,शालु सिंघल, कंचन बाटला का विशेष योगदान रहता है। बच्चों को हर इतवार ये महिलाएं संस्कारों की शिक्षा भी देती हैं। अगर किसी गरीब बच्चे को पढ़ाई में किसी तरह की मदद चाहिए तो वो संगठन की महिलाओं से शास्त्रीनगर में संपर्क कर सकता है।