मछली पालन कर किसान से बना कारोबारी:मेरठ में युवक ने पॉयलेट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया फिशिंग कल्चर, अब डिमांड पूरी करना मुश्किल

मेरठ4 महीने पहलेलेखक: शालू अग्रवाल

मेरठ के शहजाद ने 2 साल पहले खेती छोड़ दी। खेती छोड़ उसने अपने खेतों को तालाब में बदल दिया और फिर उसमें मछली पालन का काम करना शुरू कर दिया। जामिया से इकोनॉमिक्स ग्रेजुएट शहजाद कहते हैं फिश फार्मिंग एक अच्छा कांसेप्ट है। अनाज उगाने वाले किसान मछली पालन पर जा सकते हैं, क्योंकि इसमें मुनाफा ज्यादा और मेहनत कम है।

लॉकडाउन में जिम, एक्सपोर्ट बंद तब यह किया

शहजाद ने 3 एकड़ के दो तालाबों में 25 हजार मछलियों का पालन किया है, जिन्हें अच्छे दामों पर बाजार में आसानी से बेचेंगे।
शहजाद ने 3 एकड़ के दो तालाबों में 25 हजार मछलियों का पालन किया है, जिन्हें अच्छे दामों पर बाजार में आसानी से बेचेंगे।

शहजाद खेती के अलावा जिम चलाते हैं, एक्सपोर्ट बिजनेस भी करते हैं। कहते हैं "लॉकडाउन में एक्सपोर्ट, जिम कारोबार बंद हो गया। अकेले खेती से चलना मुश्किल था। तब सोचा कुछ ऐसा करूं जिसकी डिमांड कभी खत्म न हो। काफी सर्च के बाद फिशरीज पसंद आया। फिश कल्चर यानी मछली को लाकर बड़ा करके बाजार में बेचने का काम रास आया।"

पहले साल में ही 15 लाख का मुनाफा
शहजाद बताते हैं "इस काम में 40 फीसदी मुनाफा है। लागत कम है इसलिए यह पसंद आ गया। बाजार में मछलियों की अच्छी कीमत मिल रही है। पहले जिस खेत से खेती करके 25 लाख सालाना कमाता था अब उस खेत से पहले ही साल में मछली पालकर 15 लाख की कमाई पर आ गया हूं, जो अगले साल और बढ़ जाएगी।"

अब जानें शहजाद ने कैसे शुरू किया फिश कल्चर

जामिया से ग्रेजुएट शहजाद ने लॉकडाउन में शुरू किया फिश कल्चर अब हो रहा अच्छा मुनाफा
जामिया से ग्रेजुएट शहजाद ने लॉकडाउन में शुरू किया फिश कल्चर अब हो रहा अच्छा मुनाफा

"फिश कल्चर की शुरूआत के लिए सबसे पहले मैंने फिशरीज की सारी ट्रेनिंग ली। अपने खेत में ही दो तालाब खुदवाए। दो तालाब इसलिए अगर एक तालाब की मछली खराब हो गई तो कम से कम दूसरे की बच जाए। इस खौफ से मैंने दो तालाब तैयार कराए। चूंकि ये नेचुरल पौंड नहीं थे इसलिए इनमें पानी भरना था। पानी के लिए बोरिंग कराया।

बोरिंग के पानी में अमोनिया निकल आया जिसे हम यूज नहीं कर सकते थे। दोबारा रीबोर कराया। काफी मेहनत के बाद हमें अच्छा पानी मिला जो हम मछली पालन में इस्तेमाल कर सकते थे। बाजार से अच्छा बीज खरीदकर उसे तालाबों में छोड़ा। फिश की देखभाल के लिए केयर टेकर रखा। इनके लिए प्रोटीन फूड मैनेज किया इस तरह इसकी शुरूआत हुई।"

दिन में चार बार देते हैं खाना, ओवरईटिंग खतरनाक

शहजाद के भाई सईद कहते हैं पायलेट प्रोजेक्ट के लिए अभी 3 एकड़ में तालाब बनाकर फिश कल्चर शुरू किया है, आगे इसे और बढ़ाएंगे।
शहजाद के भाई सईद कहते हैं पायलेट प्रोजेक्ट के लिए अभी 3 एकड़ में तालाब बनाकर फिश कल्चर शुरू किया है, आगे इसे और बढ़ाएंगे।

ये 25 हजार मछलियां हैं। जब ये छोटी थीं तो इन्हे कम खाना मिलता था। मछली बड़ी होती है तो फूड कॉस्ट भी बढ़ती है। क्योंकि वो ज्यादा खाती हैं। दिन में लगभग 4 बार इनको दाना डाला जाता है। ये दाना फिश वेस्ट और प्रोटीन से बना होता है। यही इन्हें देते हैं। तालाब में वेस्टेज, गंदगी, प्लास्टिक न जाए इसका ध्यान खासतौर पर रखना पड़ता है। लेकिन मछली ज्यादा न खा ले इसका ध्यान देना जरूरी है। क्योंकि ओवर ईटिंग से मछली मर जाती है। नपी तुली डाइट देनी होती है।

रेग्युलर फार्मिंग से 20 फीसदी ज्यादा मुनाफा ये हमारे ये पुश्तैनी खेत हैं। शुरू से हम यहां गन्ना, मूंझी, मक्का ये ट्रेडिशनल खेती करते आ रहे हैं। आज खेती इतनी महंगी हो गई है कि मुनाफा घटने लगा है। खेती अब खर्चे का सौदा है। खेती में मेहनत और लागत दोनों काफी है। लेकिन फिश कल्चर में मेहनत कम और मुनाफा अच्छा है। मुझे खेती से 20 फीसदी ज्यादा मुनाफा मछली पालन से हो रहा है। इसमें हल नहीं जोतना, पानी नहीं देना, ट्रेक्टर, दवा कुछ नहीं। बस रखवाली करना है।

50 तालाब भी बना लूं तो डिमांड पूरी नहीं कर सकता

भारतीय सी फूड मार्केट में मछली की बहुत बड़ी डिमांड है जो आज भी पूरी नहीं होती, उत्तर भारत जहां समंदर नहीं वहां मछली पालन एक बेहतरीन कारोबार है।
भारतीय सी फूड मार्केट में मछली की बहुत बड़ी डिमांड है जो आज भी पूरी नहीं होती, उत्तर भारत जहां समंदर नहीं वहां मछली पालन एक बेहतरीन कारोबार है।

समंदर वाले इलाकों में मछली आसानी से मिल जाती है। लेकिन जहां समंदर नहीं वहां भी मछली की बेहद डिमांड है। सप्लाई कम है। लोगों को मनपसंद मछली खाने भी नहीं मिलती। वहां से आते-आते मछली की क्वालिटी, रेट में बड़ा फरक आ जाता है। समय पर खाने के लिए नहीं मिलती। मैंने दो तालाबों से यह काम शुरू किया है, आज मैं अगर 50 तालाब बनाकर उसमें मछली पालने लगूं तो भी यहां की मांग पूरी नहीं कर सकता। अब आप सोच सकते हैं कि यहां मछली की डिमांड, सप्लाई में कितना बड़ा गैप है।

दूसरे पोलट्री बिजनेस से कम रिस्क
लॉकडाउन में जब मैं कुछ बिजनेस प्लान करने की सोच रहा था तब पोलट्री बिजनेस पर मैंने डीप रिसर्च किया। मुर्गी या दूसरे मीट प्रोडक्टस के लिए फार्मिंग बहुत रिस्की है। सभी में बीमारी का बहुत खतरा है। एक मुर्गी बीमार हुई तो सारी खराब हो जाती है, यही दूसरे में भी है। लेकिन फिश में ऐसा नहीं हैं। तब मैंने फिशरीज को समझा। भारत में सीफूड में सबसे ज्यादा मांग मछली की है। यहां रिस्क कम है।

सिक्योरिटी गार्ड्स करते हैं रखवाली, ये बिग चैलेंज

मछली पालन करना है तो धैर्य सबसे जरूरी है, क्योंकि जब तक मछली पूरी तरह तैयार न हो जाए उसका पूरा दाम बाजार में नहीं मिलता।
मछली पालन करना है तो धैर्य सबसे जरूरी है, क्योंकि जब तक मछली पूरी तरह तैयार न हो जाए उसका पूरा दाम बाजार में नहीं मिलता।

फिश फार्मिंग में सबसे बड़ा चैलेंज अपनी मछलियों को सेफ रखना है। इसे जंगली जानवरों, कुत्तों से लेकर इंसानों से बचाना है। स्पेशली गार्ड्स रखे हैं जो 24 घंटे तालाबों की सुरक्षा करते हैं। केयर टेकर हैं जो इनको देखते हैं। जल्द यहां सीसीटीवी लगवाने की प्लानिंग है ताकि घर बैठे-बैठे देख सकूं कि मछली ठीक हैं।

लास्ट में जो फिश फार्मिंग शुरू करना चाहते हैं वो ध्यान रखें

फिश कल्चर के लिए शहजाद ने स्पेशली खेत में दो तालाब बनवाए इसके बाद शुरू किया मछली पालन
फिश कल्चर के लिए शहजाद ने स्पेशली खेत में दो तालाब बनवाए इसके बाद शुरू किया मछली पालन
  • फिश फार्मिंग अच्छा है। इसे स्टार्टअप की तरह शुरू नहीं किया जा सकता। जो भी शुरू करना चाहते हैं थोड़ा पेंशेस रखें क्योंकि फिश को तैयार करना पड़ता है। कई फिश को तैयार होने में 2 साल लग जाते हैं।
  • छोटे, बड़े दोनों इंवेस्टमेंट से इसे शुरू कर सकते हैं।
  • हमेशा सर्टिफाइड और अच्छी नर्सरी से बीज लें। मछली का खाना अच्छी कंपनी का ओरिजनल लें। इस लाइन में फ्रॉड्स बहुत हैं उनसे बचें।
  • तालाब को साफ रखें, तालाब में वॉटर लेवल प्रॉपर हो।
  • पानी में पीएच, अमोनिया और ऑक्सीजन का लेवल हर दो दिन पर जरूर चैक करें।
  • हर तीन दिन पर फिश को मेडिकली चैक करें कहीं फिश बीमार तो नहीं हो रही, उसका वेट देखें।
  • सरकार फिश कल्चर के लिए तालाब, जमीन के साथ सब्सीडी भी देती है उसकी हेल्प ले सकते हैं।
  • मछली की नेचुरल लाइफ और एनवायरमेंट देना बहुत जरूरी है। मछली को ओवर ईटिंग नहीं कराना, बीमार न हो पाए, तालाब साफ रहे मछली को अपने घूमने, फिरने के लिए जितनी जगह चाहिए वो सब देना पड़ेगा। तभी मछली अपने पूरे आकार और वजन में ग्रो करेगी।