मेरठ के सरधना का हेल्थ अपडेट:सरकारी अस्पतालों में न्यूरो सर्जनों के अभाव, अधिकांश की जिंदगी राम भरोसे, प्राइवेट अस्पतालों का भरोसा

सरधना, मेरठ5 दिन पहले
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मेरठ

यूपी में सड़क हादसों और अन्य दूसरी घटनाओं में रोजाना बड़ी संख्या में लोगों को हेट इंजूरी के जख्म मिल रहे हैं। लेकिन सरकारी अस्पतालों में न्यूरो सर्जनों के अभाव में अधिकांश की जिंदगी राम भरोसे ही रहती है। लाखों की आबादी पर यूपी में स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधीन दो अस्पतालों में न्यूरो सर्जन उपलब्ध नहीं हैं। जिससे तीमारदारों को मजबूरन अपने गंभीर मरीजों को उचित इलाज के लिए प्राइवेट अस्पताल ले जाना पड़ रहा है।

सरकारी अस्पतालों में न्यूरो सर्जनों का अभाव

मेरठ में हर हफ्ते 25-30 के बीच सड़क हादसों के घायल पहुंच रहे हैं। इसमें बड़े हादसों में घायलों की संख्या बढ़ जाती है। इनमें रोजाना 4-5 मामले हेड इंजूरी के शामिल होते हैं। जिसमें गंभीर मरीजों को तुरंत न्यूरो सर्जरी की जरूरत होती है। लेकिन अधिकांश मामलों में तीमारदारों को न्यूरो सर्जरी का इंतजार ही करना पड़ता है।

कंसलटेंट दे रहे सेवाएं

जिले स्तर पर सिर्फ सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में ही न्यूरो सर्जरी की सुविधा उपलब्ध है। स्वास्थ्य विभाग के अधीन अस्पताल में एक भी न्यूरो सर्जन उपलब्ध नहीं हैं। लेकिन नियमों के तहत यहां सर्जरी की व्यवस्था न होने से वह कंसलटेंट ही सेवाएं दे रहे हैं। मेरठ जिले के लोगों को न्यूरो सर्जरी के लिए एकमात्र प्राइवेट अस्पताल पर निर्भर रहना पड़ रहा है। जिला स्तर पर किसी भी अस्पताल में न्यूरो सर्जन न होने के कारण सिर की छोटी बड़ी चोट के लिए मरीजों को मजबूरन शहरी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है। मेरठ जिले में सरधना, सरूरपुर, रोहटा, दौराला, आदि अस्पताल हैं। इससे मरीजों के रेफर सिस्टम पर कोई अंकुश नहीं लग पाया है।