मिर्जापुर में भक्तों ने किए मां विंध्यवासिनी के दर्शन:अष्टमी पर महागौरी स्वरूप का दर्शन-पूजन करने उमड़े भक्त, गूंजे मां विंध्यवासिनी के जयकारे

मिर्जापुर2 महीने पहले
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मिर्जापुर में भक्तों ने किए मां विंध्यवासिनी के दर्शन। - Dainik Bhaskar
मिर्जापुर में भक्तों ने किए मां विंध्यवासिनी के दर्शन।

मिर्जापुर जिले में शारदीय नवरात्र की अष्टमी तिथि पर महागौरी स्वरूप मां विंध्यवासिनी के दर्शन को विंध्याचल धाम में आस्था का संगम दिखा। भक्तों ने दर्शन-पूजन कर पुण्य की कामना की। मंगला आरती के बाद भक्तों के दर्शन-पूजन का सिलसिला शुरू हुआ, जो अनवरत चलता रहा। अष्टभुजा और कालीखोह मंदिरों में भी अन्य दिनों की अपेक्षा बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। मंदिरों में मत्था टेकने के बाद भक्त त्रिकोण परिक्रमा को निकल पड़े।

श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान कर किए मां के दर्शन

शारदीय नवरात्र के अष्टमी तिथि को मां का दर्शन-पूजन करने के लिए गैर प्रांतों के श्रद्धालु मंगलवार की रात ही विंध्याचल धाम पहुंच गए थे। विंध्याचल धाम के होटलों और अतिथि गृहों में विश्राम के बाद श्रद्धालु गंगा स्नान कर मां विंध्यवासिनी के दर्शन को मंदिर की तरफ निकल पड़े और कतारबद्ध हो गए। सुबह जैसे-जैसे दिन ढलता गया, श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती गई।

त्रिकोण मार्ग पर रही तगड़ी सुरक्षा व्यवस्था

मंगलवार की रात महानिशा पूजा होने के कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालु विंध्याचल धाम पहुंचे थे। मां विंध्यवासिनी, मां काली व मां अष्टभुजा के दर्शन के बाद शिवपुर स्थित रामेश्वरम मंदिर और तारा मंदिर में दर्शन-पूजन कर त्रिकोण परिक्रमा पूरी की। त्रिकोण मार्ग पर सुरक्षा की तगड़ी व्यवस्था रही।

विंध्य पर्वत पर रही रौनक

शारदीय नवरात्र के अष्टमी के दिन विंध्य पर्वत पर रौनक रही। त्रिकोण करने वाले भक्तों की संख्या अन्य दिनों की अपेक्षा दोगुनी रही। कालीखोह मंदिर से अष्टभुजा मंदिर होते हुए तारा मंदिर जाने वाले मार्ग पर पूरे दिन भक्तों की टोली दिखी। डॉ. राजेश मिश्र ने बताया कि प्राचीन काल में देवी की कोल भील जनजाति पूजा करते थे। वन देवी से माता जन देवी के रूप मे पूजित हुईं। पृथ्वी के केंद्र बिंदु पर आसीन होने के कारण उन्हें बिंदु वासिनी के रूप में जाना गया। वर्तमान में माता रानी की विंध्यवासिनी के रूप में पूजा अर्चना करने के लिए दूर दराज से भक्त आते हैं।

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