मिर्जापुर के डॉ. ज्ञानेश को मिला "मलेशिया भारत गौरव सम्मान":बोले- दोनों देश का हजारों वर्षों से मैत्री की भावना अपनत्व का जीता जागता प्रमाण

मिर्जापुर9 दिन पहले
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मिर्जापुर के कोटघाट निवासी प्रोफेसर डॉ. ज्ञानेश चंद्र पांडेय को मलेशिया में आयोजित कार्यक्रम में मलेशिया भारत गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन कुआलालंपुर में आईसीसीआर एवं भारतीय उच्चायोग के तत्वावधान में किया गया। डॉ. ज्ञानेश चंद्र पांडेय बीएचयू गायन विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर और बिनानी महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य डॉ. चन्द्र भूषण पांडेय के बेटे हैं। जिन्हें भारतीय उच्चायुक्त ने कार्यक्रम में सम्मानित किया।

प्रोफेसर डॉ. ज्ञानेश चंद्र पांडेय ने अपने व्याख्यान के दौरान भारत और मलेशिया के सांस्कृतिक विरासत की चर्चा करते हुए कहा कि दोनों देश का हजारों वर्षों से मैत्री की प्रगाढ़ भावना अपनत्व का जीता जागता प्रमाण है। दोनों की सांस्कृतिक विरासत की एकरुपता साझी संस्कृति के साथ ही एक जड़ से जुड़ा होना दर्शाती है। भारत आदिकाल से वसुधैव कुटुंबकम की भावना के साथ अपना परिवार मानता रहा है। एक परिवार की धारणा जीवन के दिनचर्या, सांस्कृतिक उत्सव और संगीत में भी दिखाई पड़ती है। गायन के माध्यम से जितना भारत के लोगों में सुर, लय और ताल उनके जीवन में रचा बसा है। उतना ही मलेशिया के लोगों के जीवन उत्सव में दिखाई पड़ता है।

बीएचयू के प्रोफेसर डॉ ज्ञानेश चंद्र पांडेय को किया गया सम्मानित।
बीएचयू के प्रोफेसर डॉ ज्ञानेश चंद्र पांडेय को किया गया सम्मानित।

नेताजी सुभाष चंद्र बोस इंडियन कल्चरल सेंटर में कार्यक्रम
बीएचयू के प्रोफेसर डॉ ज्ञानेश चंद्र पांडेय साहित्य संचय शोध संवाद फाउंडेशन के आमन्त्रण पर मलेशिया पहुंचे थे। जिनका कार्यक्रम कुआलालंपुर स्थित नेताजी सुभाष चंद्र बोस इंडियन कल्चरल सेंटर हाल में आयोजित किया गया था। लोगों ने काशी में ज्ञान का प्रकाश बिखेरते हुए अध्यापन से जुड़े डॉ ज्ञानेश चंद्र पांडेय का स्वागत किया।

बीएचयू के प्रोफेसर डॉ. ज्ञानेश चंद्र पांडेय मलेशिया में सम्मानित।
बीएचयू के प्रोफेसर डॉ. ज्ञानेश चंद्र पांडेय मलेशिया में सम्मानित।
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