माता विंध्यवासिनी के दरबार में भक्तों का तांता VIDEO:दूसरे दिन मां अपने भक्तों को ब्रह्मचारिणी स्वरूप का देती है दर्शन

मिर्जापुर2 महीने पहले
विंध्याचल धाम में भक्तों की सेवा में समर्पित एसपी सन्तोष कुमार मिश्र

नवरात्र में आदिशक्ति माता विंध्यवासिनी के नौ रूपों की आराधना की जाती है। पहले दिन हिमालय की पुत्री पार्वती अर्थात शैलपुत्री के रूप में मां का पूजन करने का विधान है, वहीं दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी के रूप में पूजन किया जाता है। इंसानों को सदमार्ग पर प्रेरित वाली मां का यह स्वरूप बड़ा दिव्य है। माता सफेद वस्त्र धारण कर एक हाथ में कमंडल और दूसरे हाथ में माला लिए हुए सभी के लिए आराध्यनीय है। विन्ध्य पर्वत और मां गंगा के तट पर विराजमान माँ विंध्यवासिनी ब्रह्मचारिणी के रूप सभी भक्तों का कष्ट दूर करती है।

महिला श्रद्धालुओं से वार्ता करती जिलाधिकारी दिव्या मित्तल
महिला श्रद्धालुओं से वार्ता करती जिलाधिकारी दिव्या मित्तल

अनादिकाल से आस्था का केन्द्र रहा है विंध्याचल धाम
अनादिकाल से विंध्याचल धाम भक्तों के लिए आस्था का केंद्र रहा है। विन्ध्याचल में विन्ध्य पर्वत व पवन पावनी मां भागीरथी के संगम तट पर विराजमान मां विंध्यवासिनी का दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी के रूप में पूजन व अर्चन किया जाता है। विन्ध्यक्षेत्र में मां को विन्दुवासिनी अर्थात विंध्यवासिनी के नाम से भक्तों के कष्ट को दूर करने वाला माना जाता है।

माता विंध्यवासिनी के दरबार में दर्शन के लिए कतारबद्ध खड़े भक्तगण
माता विंध्यवासिनी के दरबार में दर्शन के लिए कतारबद्ध खड़े भक्तगण

भक्तों की पूरी होती है मनोकामना
नवरात्रि के नौ दिन में माँ सभी भक्तों के मनोकामना को पूरा करती है। आचार्य राजन मिश्र ने बताया कि भक्तों को अपने गृहस्थ जीवन में जिस - जिस वस्तुओं की जरूरत होता है वह सभी मां प्रदान करती है। मां की सविधि पूजा अर्चना कर जप करने वाले भक्तो की सारी मनोकामना पूरी होती है। माता रानी के दरबार में आने वाले भक्तों को निराश नहीं होना पड़ता।

आचार्य राजन मिश्र, विंध्याचल
आचार्य राजन मिश्र, विंध्याचल

मां पूरी करती है सभी मुरादें

माता का दर्शन करने के लिए भक्तों का ताँता लगा है। आदि शक्ति मां विंध्यवासिनी के दर्शन के लिए भक्त लालायित रहते हैं। दूर दराज से आने वाले बहुत से भक्त 9 दिनों तक विंध्याचल क्षेत्र में ही निवास कर मां की आराधना पूरे तन मन से करते हैं। जिससे प्रसन्न होकर मां उनकी सभी मुरादें पूरी करती हैं। माता के किसी भी रूप का दर्शन करने मात्र से प्राणी के शरीर में नई ऊर्जा, नया उत्साह और सदविचार का संचार होता है। भक्तों को परम शांति मिलती है।

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