मिर्जापुर में 38 ई-रिक्शा कबाड़:डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन के लिए 75 लाख में खरीदा गया था, 4 साल से लग रहा जंग

मिर्जापुर3 महीने पहले
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मिर्जापुर नगर पालिका परिषद के लालडिग्गी कार्यालय परिसर में कबाड़ में तब्दील हो रही ई रिक्शा - Dainik Bhaskar
मिर्जापुर नगर पालिका परिषद के लालडिग्गी कार्यालय परिसर में कबाड़ में तब्दील हो रही ई रिक्शा

मिर्जापुर में 38 ई-रिक्शा कूड़ा में बदल गया। नगर को 'स्वच्छ और सुन्दर' बनाने के स्लोगन के साथ खरीदा गया था। इसे डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन के लिए मंगाया गया था। यह नगरपालिका परिषद के कार्यालय परिसर में पड़ा है। डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन के नाम पर वसूली का नगर विधायक पंडित रत्नाकर मिश्र ने विरोध किया था।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर कार्रवाई की मांग की थी। वसूली बंद होने के बाद सफाई कर्मचारियों की कमी से सड़क पर निकलने के बजाय ई-रिक्शा कबाड़ बन गया।

14वें वित्त आयोग के 75 लाख में 38 ई-रिक्शा खरीदा गया था।
14वें वित्त आयोग के 75 लाख में 38 ई-रिक्शा खरीदा गया था।

75 लाख में खरीदा गया था 38 ई - रिक्शा ट्राली
नगर पालिका परिषद अध्यक्ष मनोज जायसवाल ने बताया, "नगर में 38 वॉर्ड हैं, इसमें विन्ध्याचल धाम भी शामिल है। 2019 में 14वें वित्त आयोग के मद से 75 लाख रुपये की लागत से 38 ई-रिक्शा खरीद की गई थी। हर वॉर्ड में एक रिक्शा दिया गया था । जिसको घंटाघर स्थित कार्यालय से सादे समारोह में हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया था। वह एबी कूड़ा कलेक्शन के बजाय अब खुद कबाड़ बन गई है।

मिर्जापुर नगर विधायक रत्नाकर मिश्रा।
मिर्जापुर नगर विधायक रत्नाकर मिश्रा।

योजना पर लगा विरोध का ब्रेक
नगर पालिका के अध्यक्ष मनोज जायसवाल ने बताया, "यह वाहन डोर टू डोर कूड़ा उठाने के लिए खरीदी गई थीं। नगर की साफ-सफाई से जुड़ी पूरी व्यवस्था एक संस्था के माध्यम से कराई जानी थी। मामला कोर्ट में जाने और कुछ लोगों के प्रश्नों के चलते काम बंद हो गया। कलेक्शन के लिए तय राशि जनता के नहीं देने पर घाटे के बाद भी काम कर रही संस्था बोरियां बिस्तर समेट लिया।

मनोज जायसवाल, अध्यक्ष, नगर पालिका परिषद, मिर्जापुर
मनोज जायसवाल, अध्यक्ष, नगर पालिका परिषद, मिर्जापुर

नगर विधायक ने वसूली पर जताई थी आपत्ति
नगरपालिका परिषद में डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन में किए जा रहे वसूली को लेकर विरोध किया था। नगर विधायक रत्नाकर मिश्रा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर जांच करवाने की मांग की थी। बिना टेंडर एक संस्था से कार्य कराने का आरोप लगाया था।

बिना हैंड्स, कबाड़ ई-रिक्शा
नगर पालिका बोर्ड की बैठक में प्रति घर कचरा उठाने का रेट तय किया गया था। कूड़ा संग्रह से मिलने वाले पैसे प्रकृति संस्था एजेंसी के पास जमा होता था। काम शुरू होने पर 2 लाख रुपया प्रति माह तक की वसूली की गई थी।

मामला जिला, मंडल से होकर सीएम दरबार में जाने के बाद बिना आदमी के बनाई गई योजना पर पानी फिर गया। इसी के साथ 75 लाख रुपया जनहित में प्रयोग होने के बजाय कबाड़ में तब्दील होकर रह गया।