मंगला आरती के साथ विंध्याचल में नवरात्रि मेला शुरू:घंटा की ध्वनि और भक्तों के जयकारे से गूंजा माता विंध्यवासिनी का धाम

मिर्जापुर2 महीने पहले

सोमवार की भोर में मंगला आरती के साथ विंध्याचल धाम में नवरात्रि मेला शुरू हो गया। नौ दिनों तक आदि शक्ति माता विंध्यवासिनी नवदुर्गा के विभिन्न रूपों की पूजा की जाती हैं। आदि शक्ति का परम धाम विंध्याचल केवल एक तीर्थ नहीं बल्कि, प्रमुख सिद्धपीठ है। शारदीय नवरात्रि में लगने वाले मेले में दूर-दूर से भक्त मां के दर्शन के लिए आते हैं। नवरात्रि में आदि शक्ति के नौ रूपों की आराधना की जाती है। पहले दिन हिमालय की पुत्री पार्वती अर्थात शैलपुत्री के रूप में पूजन-अर्चन किया जाता है।

माता विंध्यवासिनी के दरबार में नवरात्रि के पहले दिन दर्शन के लिए कतार में लगे भक्त
माता विंध्यवासिनी के दरबार में नवरात्रि के पहले दिन दर्शन के लिए कतार में लगे भक्त

पहले दिन शैलपुत्री के रूप में की जाती है आराधना
विन्ध्य पर्वत और पाप नाशिनी मां गंगा के तट पर विराजमान हैं। मां विंध्यवासिनी की शैलपुत्री के रूप में दर्शन देकर अपने भक्तों का कष्ट दूर करती हैं। नवरात्रि के पहले दिन श्रद्धालुओं ने पूरी श्रद्धा भक्ति के साथ मां विंध्यवासिनी का दर्शन पूजन करते हैं। घंटे की ध्वनी और जयकारे से विन्ध्य क्षेत्र गुंजायमान हो उठा है। अनादि काल से भक्तों के आस्था का केंद्र विन्ध्य पर्वत और पतित पावनी मां गंगा के संगम तट श्रीयंत्र पर विराजमान मां विंध्यवासिनी का प्रथम दिन शैलपुत्री के रूप में पूजन व अर्चन किया जाता है ।

विंध्याचल मेला क्षेत्र में व्यवस्था देखने पहुंची डीएम दिव्या मित्तल साथ में एडीएम शिव प्रताप शुक्ल।
विंध्याचल मेला क्षेत्र में व्यवस्था देखने पहुंची डीएम दिव्या मित्तल साथ में एडीएम शिव प्रताप शुक्ल।

हिमालय राज की पुत्री हैं शैलपुत्री
शैल का अर्थ पहाड़ होता है । कथाओं के अनुसार पार्वती पहाड़ों के राजा हिमालय की पुत्री थी। पर्वत राज हिमालय की पुत्री को शैलपुत्री भी कहा जाता है। उनके एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे हाथ में कमल का फूल है। भारत के मानक समय बताने वाले बिंदु स्थल पर विराजमान मां को बिन्दुवासिनी अर्थात विंध्यवासिनी के नाम से भक्तों के कष्ट को दूर करने वाला माना जाता है ।

माता विंध्यवासिनी के दरबार में भक्तों की भीड़
माता विंध्यवासिनी के दरबार में भक्तों की भीड़

भक्तों की मनोकामना पूरा करती हैं मां
पंडित राजन मिश्र ने बताया, "भक्त को जिस-जिस वस्तुओं की जरूरत होती है। वह सभी माता रानी देती हैं। आज के दिन साधक के मुलचक्र जागरण होता है। माता विंध्यवासिनी के दरबार में हाजिरी लगाने वाले हर भक्त की मनोकामना पूरी होती है। विन्ध्य क्षेत्र में आदि शक्ति त्रिकोण पर अपने तीन स्वरूपों में विराजमान हैं।

भक्तों की सुरक्षा व्यवस्था में तैनात पुलिस कर्मी
भक्तों की सुरक्षा व्यवस्था में तैनात पुलिस कर्मी

रोज लाखों की तादात में आते हैं भक्त
सिद्धपीठ में देश के कोने-कोने से ही नहीं विदेश से आने वाले भक्त मां का दर्शन पाकर निहाल हो उठते हैं। दर्शन करने के लिए लम्बी-लम्बी कतारों में लगे भक्त मां का जयकारा लगाते रहते हैं। भक्तों की आस्था से प्रसन्न होकर मां उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी कर देती हैं।

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