बिलारी में दरगाह शेख सलाउद्दीन के सालाना उर्स का शुभारंभ:सूफी संतों की दरगाह से अमन और मोहब्बत का पैगाम मिलता है - इमाम मोहम्मद शायर रजा

बिलारी, मुरादाबाद2 महीने पहले
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बिलारी तहसील क्षेत्र के गांव तिसावा चांदपुर के जंगल में हजरत शेख सलाउद्दीन की दरगाह पर सालाना उर्स का शुभारंभ चादर पोशी करके किया गया। इस मौके पर अनेक अकीदतमंदों ने विशेष दुआएं की।

रविवार को शाम के छह बजे आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रुप में पहुंचे प्रधान संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष हाजी मोहम्मद उस्मान और विधायक प्रतिनिधि मोहम्मद वसीम ने अनेक अकीदतमंदों के साथ चादर पोशी कर विशेष दुआएं की। इस मौके पर दरगाह मस्जिद के इमाम मोहम्मद शायर रजा ने नूरानी खिताब किया।

संतों की दरगाह पर मिलता मोहब्बत का पैगाम

उन्होंने कहा कि सूफी संतों की दरगाह से अमन और मोहब्बत का पैगाम मिलता है। क्योंकि यहां सभी वर्गों के लोग हाजिरी दे देते हैं, मन्नते पूरी होने पर चादर पोशी कर शुक्रिया हाजिरी देने आते हैं। इस मौके पर उन्होंने दरगाह से पैगाम दिया कि अपने बुजुर्गों की खिदमत करें, सोशल मीडिया पर किसी भी वर्ग को आहत करने वाली कमेंट करने से बचें, समाज में एकता कायम करने का काम करें, अपने बच्चों को अच्छी तरबीयत दें।

लोगों ने अमन चैन के लिए दुआएं मांगी।
लोगों ने अमन चैन के लिए दुआएं मांगी।

विदेशों से आते हैं जायरीन

इसके अलावा दरगाह परिसर में सलातों सलाम पढ़ा गया और इसके बाद मुल्क और कारोबार की तरक्की के लिए विशेष दुआएं की गईं। दरगाह के सज्जादा नशीन खलील अहमद ने बताया कि हजरत शेख सलाउद्दीन के सालाना उर्स का कुल शरीफ बुधवार को सुबह साढ़े दस बजे होगा। जिसमें सभी लोग अपनी उपस्थिति दर्ज कराएं। इसके अलावा उन्होंने बताया कि हजरत शेख सलाउद्दीन की दरगाह पर कई राज्यों के अलावा विदेशों से भी जायरीन हाजिरी देने आते हैं।

चादर पोशी करते जायरीन।
चादर पोशी करते जायरीन।

दरगाह से जुड़े हैं कई लोग

इस दरगाह से अनेक लोग जुड़े हैं। दरगाह परिसर के बाहर छोटे बड़े झूले खेल खिलौनों की दुकानें, मीना बाजार आदि पर बच्चों के अलावा महिलाओं ने जमकर खरीदारी की। इस दौरान मुख्य रूप से दरगाह मस्जिद के इमाम मोहम्मद शाहिद रजा, ग्राम प्रधान पुत्र मोहम्मद अकरम, मोहम्मद कासिम, नाजिम सलमानी, असलम, नासिर हुसैन अंसारी, फरमान अली अंसारी, मस्तान, हाजी मोहम्मद आरिफ, जमील अहमद, जाकिर हुसैन, मोहम्मद नोमान, बाबू, मोहम्मद जावेद आदि सहित अनेकों अकीदत मंद मौजूद रहे।

यहां सभी वर्गों के लोग हाजिरी दे देते हैं।
यहां सभी वर्गों के लोग हाजिरी दे देते हैं।
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