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निगम STP की DPR बनाता रहा, जमीन नेताजी ने कब्जाई:रिकार्ड में छेड़छाड़ कर नगर निगम की 55 बीघा जमीन हड़पने की साजिश, निगम के अहम ओहदेदार कठघरे में, STP बनाने पहुंचे तो जमीन ही नहीं मिली, अफसरशाही बैकफुट पर

मुरादाबाद3 महीने पहले
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मुरादाबाद में नगर निगम की 55 बीघा भूमि रिकार्ड में टैंपरिंग करके हड़पने की कोशिश का मामला सामने आया है। - Dainik Bhaskar
मुरादाबाद में नगर निगम की 55 बीघा भूमि रिकार्ड में टैंपरिंग करके हड़पने की कोशिश का मामला सामने आया है।

मुरादाबाद में सरकारी जमीन का एक बड़ा घोटाला सामाने आया है। रामगंगा से सटी नगर निगम की 55 बीघा जमीन रिकार्ड में छेड़छाड़ करके दूसरे लोगों के नाम दर्ज कर दी गई। निगम सूत्रों का कहना है कि इस खेल में सत्ताधारी दल का एक नेता शामिल है।

नगर निगम को इसी जमीन पर स्मार्ट सिटी परिजयोजना के तहत सीवर ट्रीटमेंट प्लांट (STP) बनाना था। लेकिन विवाद की वजह से STP प्रोजेक्ट बीच में फंस गया है।

DPR तैयार करने के बाद जब जमीन पर काम शुरू करने की बारी आई तो जमीन का यह घोटाला सामने आया। मामला सत्ताधारी दल से जुड़ा होने की वजह से अफसर एक्शन की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं।्र

अलबत्ता कमिश्नर/ स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के CEO आन्जनेय कुमार सिंह ने इतनी पुष्टि जरूर की है कि मामला उनकी जानकारी में है। STP के लिए जमीन क्लियर कराने का जिम्मा DM और नगर आयुक्त को सौंपा गया है।

अरबों रुपये की है रामगंगा किनारे की यह जमीन

जिस जमीन पर STP का प्लान तैयार किया गया था। वह रामगंगा से एकदम सटी हुई है। तकनीकि रूप से STP इसी जमीन पर बन सकता है। रामंगगा किनारे यह भूमि CL गुप्ता आई इंस्टीट्यूट से आगे है। इसमें से करीब 1.833 हेक्टेयर भूमि STP के लिए रिजर्व की गई थी। यह जमीन शुरू से ही नगर निगम के नाम पर दर्ज थी। इस पर नगर निगम का कब्जा अभी तक बरकरार है। लेकिन निगम के रिकार्ड में छेड़छाड़ करके अब्दुल मजीद और कल्लन आदि का नाम चढ़ा दिया गया। नगर निगम सूत्रों का कहना है कि ये नाम सिर्फ मोहरे की तरह इस्तेमाल किए गए हैं। असल खेल पर्दे के पीछे से नेताजी ने खेला है। इस एरिया में जमीन के रेट 50 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर तक हैं। ऐसे में यह जमीन अरबों रुपये की है।

राजस्व परिषद से एक पक्षीय आदेश करा लाए

निगम के रिकार्ड में टैंपरिंग कर अपना नाम अंकित करा लेने के बाद राजस्व परिषद से भी एकपक्षीय आदेश करा लिए गए। नगर निगम ने अपने नाम और कब्जे वाली इस भूमि को बचाने की कोई कोशिश नहीं की। निगम सूत्रों का कहना है कि पूरे खेल में निगम के कुछ खास ओहदेदार शामिल हैं। जिन दो लोगों अब्दुल मजीद और कल्लन के नाम भूमि अंकित की गई है। वह सामान्य लोग हैं। इनकी हैसियत राजस्व परिषद से इस तरह अपने पक्ष में आर्डर लाने की नहीं है।

मामला जानकारी में है, डीएम - नगर आयुक्त कर रहे जांच: कमिश्नर

कमिश्नर आन्जनेय कुमार सिंह।
कमिश्नर आन्जनेय कुमार सिंह।

कमिश्ननर आन्जनेय कुमार सिंह ने पुष्टि की है कि STP की भूमि को लेकर कुछ विवाद सामने आया है। उन्होंने कहा कि STP के लिए भूमि क्लियर करने का जिम्मा DM और नगर आयुक्त काे सौंपा गया है। दोनों अधिकारी इस मामले में अपने स्तर से कदम उठाएंगे। दोनों से कहा गया है कि शीघ्र STP पर काम शुरू कराएं।

STP नहीं बनने से लोगों में गुस्सा

STP नहीं बनने की वजह से लोगों में आक्रोश है। क्योंकि जब तक STP का काम पूरा नहीं होगा तब तक शहर में सीवर लाइन के लिए टूटफूट होती रहेगी। सीवर लाइन का काम STP बनने पर ही फाइनल हाेगा। आए दिन तोड़ी जा रही सड़कों से लोग परेशान है। स्मार्ट सिटी परियोजना की कई सड़कें और नालों पर इसी STP की वजह से काम शुरू नहीं हो पा रहा है। जब तक STP नहीं बनेगा तब तक स्मार्ट सिटी परियोजना के कई दूसरे बडे़ काम शुरू नहीं हो सकते।

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