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दंगल के आयोजकों ने पहलवान के परिवार को धमकाया:FIR लिखाने गए तो दूसरे बेटे को भी मार देंगे, मौत के लाइव वीडियो के बावजूद मुरादाबाद पुलिस ने नहीं लिया एक्शन, कठघरे में अफसर

मुरादाबाद3 महीने पहले
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मुरादाबाद में हुए दंगल में उत्तराखंड के पहलवान की मौत के मामले में आयोजकों ने उत्तराखंड जाकर पीड़ित परिवार को धमकी दी है। - Dainik Bhaskar
मुरादाबाद में हुए दंगल में उत्तराखंड के पहलवान की मौत के मामले में आयोजकों ने उत्तराखंड जाकर पीड़ित परिवार को धमकी दी है।

मुरादाबाद में हुए दंगल में उत्तराखंड के पहलवान की मौत के मामले में पुलिस ने 10 दिन बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की है। उधर, पहलवान के भाई का कहना है कि दंगल के आयोजकों और प्रधान ने उनके घर जाकर उन्हें धमकाया है। समझौते से इंकार करने पर आयोजकों ने धमकाया कि FIR लिखाने गए तो दूसरे बेटे को भी मार देंगे।

ठाकुरद्वारा के फरीदनगर में 2 सितंबर को बिना अनुमित हुए दंगल में उत्तराखंड के एक पहलवान की मौत हो गई थी। आयोजक जख्मी हाने के बाद उसे अखाड़े में ही तड़पता हुआ छोड़कर फरार हो गए थे।
ठाकुरद्वारा के फरीदनगर में 2 सितंबर को बिना अनुमित हुए दंगल में उत्तराखंड के एक पहलवान की मौत हो गई थी। आयोजक जख्मी हाने के बाद उसे अखाड़े में ही तड़पता हुआ छोड़कर फरार हो गए थे।

पहले समझौते को कहा फिर महिलाओं को धमकाया

दंगल में जान गंवाने वाले पहलवान महेश के बड़े भाई विक्की ने बताया कि शनिवार को दंगल के आयोजक और फरीदनगर के प्रधान समेत करीब 20-25 लोग उनके घर गंगापुर पहुंचे। विक्की के मुताबिक उस समय वह और उनके पिता काम पर गए थे। घर पर उनकी मां पार्वती, भाभी और बहन थी। दबंगों ने मामले में फैसला करने का दबाव डाला। इंकार करने पर धमकी दी कि थाने में रिपोर्ट लिखाने गए तो दूसरे बेटे को भी मार देंगे। विक्की का आरोप है कि उनके घर पहुंचने वालों में उनके गांव गंगापुर का प्रधान और फरीदनगर का प्रधान भी शामिल थे।

लापरवाह अफसरों पर भी नहीं हुआ एक्शन

मुरादाबाद के ठाकुरद्वारा थाना क्षेत्र में फरीद नगर गाव में हुए दंगल के मामले में जिले के आला पुलिस प्रशासनिक अफसर भी कठघरे में खड़े हैं। 2 सितंबर को इस दंगल का आयोजन बिना अनुमति के हुआ था। कोविड के मद्देनजर ऐसे आयोजनों पर पूरी तरह से प्रतिबंध है। दंगल में न तो प्रशक्षित रेफरी था न ही वहां डाक्टर आदि की व्यवस्था थी। जहां दंगल हुआ वहां नौमी का मेला भी था। ऐसे में यह मानने की कोई वजह नहीं है कि स्थानीय पुलिस और प्रशासन को इस दंगल की जानकारी नहीं थी। पुलिस - प्रशासनिक अफसरों की लापरवाही से युवक की जान चली गई। लेकिन आला अफसरशाही ने अभी तक इसमें किसी की जिम्मेदारी तय नहीं की है। उल्टा मामले को दफन करने की कोशिशें की जा रही हैं।

खुलेआम घूम रहे पहलवान की मौत के जिम्मेदार

पहलवान महेश की मौत के जिम्मेदार दंगल के आयोजक अभी तक खुलेआम घूम रहे हैं। पहलवान महेश की मौत का लाइव वीडियो सोशल मीडिया पर घूम रहा है। इसके बावजूद पुलिस का हर बार रटा रटाया जवाब है कि मामला उनकी जानकारी में नहीं है। सूत्रों का कहना है कि पुलिस सियासी दबाव की वजह से इस मौत में एक्शन लेने से बच रही है। इसके अलावा यदि इस मामले में FIR होती है तो संबंधित पुलिस वालों की भी गर्दन फंसेगी। इंस्पेक्टर ठाकुरद्वारा ने फिर से दोहराया है कि उनके पास इस घटना से संबंधित कोई तहरीर नहीं है।

विक्की की मां पार्वती का कहना है कि उनके बेटे को कुश्ती के बहाने जानबूझकर मारा गया है।
विक्की की मां पार्वती का कहना है कि उनके बेटे को कुश्ती के बहाने जानबूझकर मारा गया है।

मेरे बेटे को जानबूझकर मारा

उत्तराखंड में काशीपुर कोतवाली क्षेत्र के गंगापुर गांव में अपनी झोंपड़ी के बाहर बिलख रही पार्वती इंसाफ मांग रही हैं। पार्वती का कहना है कि उनका बेटा महेश पहलवानी करने गया था। लेकिन वहां अखाड़े में कुश्ती के बहाने उसे जानबूझकर मार दिया गया। बोलीं- वो हमारा बुढ़ापे का सहारा था। उसे छीन लिया। पार्वती का कहना है कि वह आरोपियों के खिलाफ मुकदमा लिखाना चाहती हैं। जिसने बेटे को मारा उसे जेल में देखना चाहती हैं।

2 सितंबर को फरीदनगर में हुई थी घटना

बता दें कि मुरादाबाद में ठाकुरद्वारा कोतवाली क्षेत्र के फरीदनगर गांव में 2 सितंबर को हुए दंगल में उत्तराखंड के पहलवान महेश की गर्दन टूटने से मौत हो गई थी। उसका मुकाबला फरीदनगर के साजिद अंसारी पहलवान से था। 5 सेकेंड में ही साजिद ने महेश को सिर के बल पटक दिया था। जिससे महेश की गर्दन टूट गई थी। 8 सितंबर को दंगल में लाइव मौत का यह वीडियो सामने आया था।

मृतक पहलवान महेशा के पिता भोपाल।
मृतक पहलवान महेशा के पिता भोपाल।

हम पहुंचे तो अखाड़े में पड़ी मिली भाई की लाश

दंगल में मरे पहलवान महेश के भाई विक्की ने दैनिक भास्कर को पूरा वाकया बताया। विक्की ने बताया कि उनका गांव यूपी और उत्तराखंड का बार्डर है। उनके गांव गंगापुर से फरीदनगर (जहां दंगल हुआ) की दूरी महज 3 किमी है।

बोले- उनका भाई महेश(16 साल) दसवीं का छात्र था। 2 सितंबर को फरीदपुर में नौमी का मेला था तो वह गांव के ही विशाल और अभिषेक के साथ मेला देखने गया था। रात में करीब साढ़े आठ बजे विशाल और अभिषेक का फोन आया और बताया कि तुम्हारे भाई की मौत हो गई है। विक्की बोले- हम दौड़कर पहुंचे तो देखा कि वहां कोई नहीं था। सन्नाटे के बीच अखाड़े में महेश का शव पड़ा था।

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