BSP छोड़ने वाले पूर्व सांसद वीर सिंह का इंटरव्यू:बोले- बहनजी लगातार कर रही थीं अपमान, अपने भतीजे को तो स्थापित कर दिया, मैंने बेटे को टिकट मांगा तो बोलीं परिवारवाद मंजूर नहीं

मुरादाबाद3 महीने पहले
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बसपा छोड़ समाजवादी पार्टी में शामिल हुए पूर्व राज्यसभा सांसद वीर सिंह का फाइल फोटो। - Dainik Bhaskar
बसपा छोड़ समाजवादी पार्टी में शामिल हुए पूर्व राज्यसभा सांसद वीर सिंह का फाइल फोटो।

वेस्ट UP में बसपा का बड़ा चेहरा माने जाने वाले पूर्व सांसद वीर सिंह एडवोकेट BSP छोड़ने के बाद दैनिक भास्कर से अपना दर्द बयां किया है। दैनिक भास्कर को दिए इंटरव्यू में वीर सिंह ने कहा कि बहनजी (मायावती) के इशारे पर पार्टी में उनका लगातार अपमान हो रहा था।

मायावती के भतीजे आकाश आनंद का नाम लिए बगैर वीर सिंह ने कहा कि उन्हें बेहद जूनियर लोगों के अंडर में काम करने को कहा गया। बोले- 'जिन्हें जिन्हें मैंने खुद राजनीति में ट्रेंड किया उन्हीं के अंडर में आत्मा को मारकर काम करना पड़ रहा था।

दम घुटने लगा तो छोड़ी BSP

ये जूनियर लोग बहनजी के इशारे पर मेरा लगातार अपमान कर रहे थे।' बोले- 'मेरा दम घुटने लगा तो मैंने बसपा छोड़ दी।' बता दें कि आकाश आनंद इस समय बसपा के नेशनल कोर्डिनेटर हैं। जबकि वीर सिंह काफी पहले इस पद पर रह चुके हैं।

बसपा सुप्रीमो मायावती के करीबी लोगों में गिने जाते रहे हैं वीर सिंह। (फाइल फोटो में एक कार्यक्रम में मंच पर)
बसपा सुप्रीमो मायावती के करीबी लोगों में गिने जाते रहे हैं वीर सिंह। (फाइल फोटो में एक कार्यक्रम में मंच पर)

अपने भतीजे को सेट किया, मेरे बेटे को टिकट नहीं

वीर सिंह बोले- 'मैंने BSP के गठन से उसके सत्ता तक पहुंचने के संघर्ष में साथी रहा हूं। इसलिए BSP छोड़ने का फैसला बिलकुल भी आसान नहीं था। लेकिन मान सम्मान को जब लगातार कुचला जाए तो कोई और विकल्प नहीं बचता।' बोले- बहन जी ने अपने भतीजे को तो पार्टी के शीर्ष पर स्थापित कर दिया। लेकिन मैंने अपने बेटे के लिए टिकट मांगा तो परिवारवाद बताकर डांट दिया। वीर सिंह कहते हैं, 'हर इंसान अपनी औलाद के लिए ही संघर्ष करता है। मैंने पूरा जीवन बहनजी के इशारे पर घर से बाहर गुजार दिया। अब यदि मैं अपने बच्चों के लिए ही कुछ नहीं कर पाता तो फिर पार्टी में रहने का क्या फायदा था।'

SP जहां से टिकट देगी, बेटे को लड़ाऊंगा

समाजवादी पार्टी में कैसा भविष्य नजर आता है ? इस सवाल पर वीर सिंह कहते हैं, मुझे तो चुनाव लड़ना नहीं है, लेकिन बेटे को 2022 में चुनाव लड़ाऊंगा। बोले- मैं BSP से बेटे को मुरादाबाद से लड़ाना चाहता था। अब समाजवादी पार्टी मुरादाबाद जिले में जहां से भी टिकट देगी वहां से बेटे को उतारेंगे। वीर सिंह का कहना है कि समाजवादी पार्टी बहुजन समाज को साथ लेकर उनकी तरक्की के लिए काम करेगी। बता दें कि बसपा के राष्ट्रीय महासचिव और महाराष्ट्र के प्रभारी पूर्व सांसद वीर सिंह ने रविवार को बसपा छोड़ सपा ज्वाइन कर ली है। लखनऊ में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उन्हें पार्टी ज्वाइन कराई। इस दौरान वीर सिंह के बड़े बेटे विवेक भी उनके साथ में थे।

बसपा के गठनके पहले से वीर सिंह बहुजन समाज मूवमेंट से जुड़े थे। वामसेफ और फिर DS-4 के लिए भी काम किया। - फाइल फोटो
बसपा के गठनके पहले से वीर सिंह बहुजन समाज मूवमेंट से जुड़े थे। वामसेफ और फिर DS-4 के लिए भी काम किया। - फाइल फोटो

परिवार को पॉलिटिक्स में सेट नहीं कर पा रहे थे वीर सिंह

पूर्व सांसद वीर सिंह चाहकर भी अपने परिवार को राजनीति में सेट नहीं कर पा रहे थे। वह अपनी पत्नी विनयवीर सिंह या बेटे अरुण कुमार को जिला पंचायत अध्यक्ष बनाना चाहते थे। 2016 में दोनों को जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ाया। दोनों जीते भी थे। जनवरी 2016 में हुए चुनाव में वीर सिंह ने अपने बेटे अरुण कुमार को जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव लड़ाया। लेकिन BSP के जिला पंचायत सदस्यों की क्रास वोटिंग की वजह से 2 वोटों से अरुण चुनाव हार गए थे। 2017 में उन्होंने अपने बड़े बेटे विवेक सिंह को बिजनौर के नहटौर से BSP से विधानसभा चुनाव लड़वाया। लेकिन विवेक जीत नहीं पाए। पूरी कोशिश के बाद भी वीर सिंह के दोनों बेटे और पत्नी राजनीति में सेट नही हो सके। हालांक उनकी पत्नी विनयवीर 2000 से 2005 तक अमरोहा के जोया ब्लॉक की ब्लॉक प्रमुख रहीं।

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