बिजनौर में RSS v/s POLICE:दरोगा की संघ कार्यकर्ताओं ने बीच बाजार कर दी थी पिटाई, शिकायत की तो थाने में नहीं हुई सुनवाई, फिर इस्तीफा दिया

बिजनौर3 महीने पहले
बिजनौर में निलंबित दरोगा ने पुलिस महकमे से सहायता न मिलने पर अपने पद से दिया इस्तीफा।

बिजनौर में पुलिस विभाग पर आरएसएस के दबाव का मामला सामने आया है। संघ के प्रेशर से परेशान होकर एक दरोगा ने इस्तीफा दे दिया। दरअसल, 5 दिन पहले संघ कार्यकर्ता से हुए झगड़े में पहले दरोगा को लाइन हाजिर किया गया, फिर बिना उसका पक्ष जाने निलंबित कर दिया गया। अगले दिन संघ कार्यकर्ताओं ने सरेराह उसकी पिटाई भी कर दी। दरोगा 3 दिन तक पुलिस महकमे से इंसाफ की उम्मीद में दौड़ता रहा। लेकिन इंसाफ नहीं मिला तो उन्होंने इस्तीफा दे दिया।

हालांकि, एसपी ने उनका इस्तीफा नहीं स्वीकार किया। सोमवार को मामला मीडिया में आने के बाद उच्चाधिकारियों ने तुरंत दरोगा को बहाल कर दिया, साथ ही दो आरोपियों को गिरफ्तार भी कर लिया। हालांकि, इससे पहले पुलिस की फजीहत जरूर हो गई।

चौकी में हुआ था विवाद

मामला हल्दौर थानां क्षेत्र के झालू चौकी का है। जहां पर दरोगा अरुण कुमार राणा तैनात थे। वहां 15 जुलाई को झालू निवासी और आरएसएस का पदाधिकारी उमंग काकरान आया। उसे चरित्र प्रमाण पत्र सत्यापन कराना था। वहां किसी बात पर उमंग काकरान और अरुण कुमार के बीच कहासुनी हो गई। जिसके बाद आरोप है कि दरोगा ने उसे थप्पड़ मार दिया।

आरएसएस के पदाधिकारी से बदसलूकी की सूचना मिलने पर पूर्व सांसद भारतेंद्र सिंह के साथ आरएसएस के लोग एसपी से मिले। 16 जुलाई को एसपी ने पहले दरोगा को लाइन हाजिर किया फिर बिना उसका पक्ष जाने उसे निलंबित भी कर दिया।

15 जुलाई को आरएसएस का पदाधिकारी उमंग काकरान से दरोगा अरुण कुमार राणा का विवाद हुआ था।
15 जुलाई को आरएसएस का पदाधिकारी उमंग काकरान से दरोगा अरुण कुमार राणा का विवाद हुआ था।

बाजार में दरोगा पर हुआ हमला

निलंबित दरोगा 16 जुलाई की शाम को कुछ सामान लेने बाजार जा रहे थे। तभी चार हमलावरों ने उन पर हमला कर दिया। वह लोग उसे लाठी-डंडो से पीटने लग गए। फिर किसी तरह बाजार में मौजूद अन्य लोगों ने उन्हें बचाया। इसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची। पीड़ित को पांव में चोट आई थी। उसे अस्पताल भेजा गया। जहां से उपचार देकर उसे घर भेज दिया गया। अरुण कुमार ने बदमाशों के खिलाफ हल्दौर थाने में नामजद रिपोर्ट दर्ज करवानी चाही लेकिन पुलिस पर आएसएस का इतना दबाव था कि अपने ही दरोगा पर हमले की अज्ञात में रिपोर्ट दर्ज की गयी थी।

पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप

सोमवार की रात निलंबित दरोगा ने अपने महकमे से मायूस होकर अपने पद से इस्तीफा दे दिया। यही नहीं उन्होनें पुलिस पर उनकी सहायता न करने का आरोप लगाया है। उन्होनें कहा कि हमलावरों की पहचान होने पर भी रिपोर्ट में अज्ञात लिख गया। तीन दिन बाद भी किसी आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया गया। उल्टा उस पर समझौते का दबाव बनाया जा रहा है। जिले के अफसरों ने दबाव में आकर उसके खिलाफ कार्रवाई की है। इसी से तंग आकर उसने इस्तीफा दिया है। वह एसपी के पास इस्तीफे का लेटर लेकर गया था। उसे दफ्तर में एसपी नहीं मिले। उनके स्टॉफ ने भी लेटर लेने से मना कर दिया। तो उसने लेटर एसपी को व्हाट्सएप और मेल कर दिया है। साथ ही डीआईजी, आईजी और एडीजी को भी इस्तीफा भेज दिया है।

दरोगा का आरोप है कि 16 जुलाई को उमंग ने अपने साथियों संग बीच बाजार उस पर हमला किया था15 जुलाई को आरएसएस का पदाधिकारी उमंग काकरान से दरोगा अरुण कुमार राणा का विवाद हुआ था।
दरोगा का आरोप है कि 16 जुलाई को उमंग ने अपने साथियों संग बीच बाजार उस पर हमला किया था15 जुलाई को आरएसएस का पदाधिकारी उमंग काकरान से दरोगा अरुण कुमार राणा का विवाद हुआ था।

पुलिस ने की गिरफ्तारी

इस्तीफे का मामला जैसे ही मीडिया में आया पुलिस हरकत में आई। उसने उमंग काकरान और उसके एक साथी को गिरफ्तार कर लिया। साथ ही आनन फानन में दरोगा अरुण को बहाल भी कर दिया गया। एसपी डॉक्टर धर्मवीर सिंह ने बताया कि मामले में जांच चल रही थी। दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

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