मुरादाबाद में शंकराचार्य बोले:भारत में रहने वाले सभी लोगों के पूर्वज सनातनी आर्य हिंदू हैं; कहा- हिंदू राष्ट्र बने भारत, मठ - मंदिरों में दखल बंद करे सरकार

मुरादाबाद12 दिन पहले
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मुरादाबाद रेलवे स्टेडियम में आयोजित धर्मसभा में गोवर्धन मठपुरी पीठ के जगद्गुरू स्वामी निश्चलानंद सरस्वती। - Dainik Bhaskar
मुरादाबाद रेलवे स्टेडियम में आयोजित धर्मसभा में गोवर्धन मठपुरी पीठ के जगद्गुरू स्वामी निश्चलानंद सरस्वती।

गोवर्धन मठपुरी पीठ के जगद्गुरू शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने कहा कि उन्हें यह बिल्कुल संभव लगता है कि भारत हिंदू राष्ट्र बनेगा। मुरादाबाद के रेलवे स्टेडियम में आयोजित धर्म सभा में शंकराचार्य अपने संबोधन के बाद लोगों के प्रश्नों के उत्तर दे रहे थे। शंकराचार्य ने कहा कि मोहम्मद साहब और ईसामसीह के पूर्वज कौन थे, इस पर विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत में रहने वाले सभी लोगों के पूर्वज सनातनी वैदिक आर्य हिंदू हैं। शंकराचार्य ने कहा कि भारत को हिंदू राष्ट्र बनना चाहिए। सभी के पूर्वज हिंदू ही हैं इसलिए लोगों को मुख्य धारा में आकर इसका स्वागत करना चाहिए। शंकराचार्य ने कहा जब दुनिया में मुस्लिम और ईसाई देश हैं तो फिर हिंदू राष्ट्र में आपत्ति क्यों है?

धर्मनिरपेक्ष सिर्फ शब्द, इसका कोई अर्थ नहीं
शंकराचार्य ने कहा कि धर्मनिरपेक्ष सिर्फ एक शब्द है। इसका कोई अर्थ नहीं है। उन्होंने वर्ण व्यवस्था को भी समाज के लिए उचित बताया। बोले- जाति के उन्माद को दूर करना चाहिए, लेकिन वर्ण व्यवस्था को खत्म नहीं किया जा सकता। शंकराचार्य ने भगवान राम, युधिष्ठर, शिवाजी, विक्रमादित्य आदि का उदाहरण कहा कि जिन शासकों की आप प्रशंसा करते हैं उनके समय में वर्ण व्यवस्था थी या नहीं ? ये सभी शासक सनातनी वर्ण व्यवस्था को मानने वाले और उसके संरक्षक थे। बोले- भगवान राम के रामराज्य की स्थापना कौन से संविधान से हुई थी ? सनातनी वर्ण व्यवस्था ही इसका आधार था।

मठ - मंदिरों पर अधिकार न जमाए सरकार
शंकराचार्य ने कहा कि शासन तंत्र को धार्मिक अध्यात्मिक जगत में मठ मंदिरों में हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं है। शासन का अधिकार सिर्फ सहभागिता का बनता है। देश में जैन, बौद्ध, सिख धर्मों के आध्यात्मिक और धार्मिक प्रतिष्ठानों पर सरकार का कोई प्रभुत्व नहीं है। लेकिन सनातनी और आर्य समाज के मठ मंदिरों पर शासन तंत्र ने अपना अधिकार जमा रखा है। यह अनुचित है। शंकराचार्य ने कहा कि सरकार मठ मंदिरों में हस्तक्षेप न करे। मठ मंदिरों में आने वाले चढ़ावे का उपयोग सिर्फ हिंदुओं के धार्मिक कार्यों व हिंदू गतिविधियों में ही खर्च किया जाए।

पूरी तरह गो रक्षा का समर्थक नहीं कोई दल
शंकराचार्य ने कहा कि राजनीतिक दल समाचार पत्रों में तो गोवंश की रक्षा की बात करते हैं। लेकिन कोई भी ऐसा राजनीतिक दल नहीं है जो पूरी तरह से हृदय से गोवशं की रक्षा का समर्थक हो।

गृहस्थ आश्रम सर्वोत्कृष्ट
शंकराचार्य ने कहा कि गृहस्थ आश्रम सर्वोत्कृष्ट है। यह नारायण और लक्ष्मी की आराधना का वैकल्पिक स्वरूप है। बोले- भगवान भी सद्गृहस्थ माता - पिता के द्वारा की प्रकट होते हैं। उनके घर जन्म लेते हैं। इसलिए गृहस्थ आश्रम को सर्वोत्कृष्ट माना गया है। इसमें पुरुष को नारायण और स्त्री को लक्ष्मी रूप में देखा जाता है।

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