मुरादाबाद में भूख हड़ताल पर 70 साल की लीलावती:BSP सांसद के रिश्तेदार ने हड़पी जमीन, इंसाफ मांगते परिवार के 3 लोगों की मौत

मुरादाबाद3 महीने पहले
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मुरादाबाद में 70 साल की लीलावती कलेक्ट्रेट के सामने बुधवार को भूख हड़ताल पर बैठ गईं। 6 महीने पहले उनके पति भी इंसाफ के लिए भूख हड़ताल पर बैठे थे। उन्हें इंसाफ तो नहीं मिला। भूख हड़ताल पर बैठे-बैठे उनकी मौत जरूर हो गई।

दंपति की पौने 3 बीघा जमीन BSP (बहुजन समाज पार्टी) के एक सांसद के रिश्तेदार महेंद्र सिंह (बर्खास्त सिपाही) ने 10 साल पहले हड़प ली थी। उस समय बसपा की सरकार थी। तब महेंद्र सिंह सिविल लाइंस थाने में तैनात था। 10 साल से यह परिवार इंसाफ मांग रहा है। अब तक लीलावती के पति, बेटे और देवरानी की मौत हो चुकी है।

इकरारनामा कराकर धोखे से हड़पी जमीन

धीमरी निवासी लीलावती ने बताया कि 2011 में महेंद्र सिंह उनके घर आया था। उसने अच्छे रेट में जमीन खरीदने की बात कही। इसके बाद उसने पौने 3 बीघा जमीन का इकरारनामा करा लिया। सिपाही ने कहा था कि वह इस पर प्लाटिंग करेगा। प्लाट बिकते जाएंगे और वह पैसे देकर उनसे सीधे खरीदार के नाम बैनामा कराता रहेगा।

लीलावती बताती हैं कि 2 साल बाद सिपाही महेंद्र ने खेत के पेड़ कटवाने शुरू किए। उन्होंने विरोध किया। लेकिन सिपाही ने उन्हें भगा दिया। पता चला कि इकरारनामे से धोखाधड़ी करके वह जमीन की रजिस्ट्री करा चुका है।

मुरादाबाद में भूख हड़ताल पर लीलावती। उनकी पौने 3 बीघा जमीन BSP के एक सांसद के रिश्तेदार महेंद्र सिंह (बर्खास्त सिपाही) ने 10 साल पहले हड़प ली थी।
मुरादाबाद में भूख हड़ताल पर लीलावती। उनकी पौने 3 बीघा जमीन BSP के एक सांसद के रिश्तेदार महेंद्र सिंह (बर्खास्त सिपाही) ने 10 साल पहले हड़प ली थी।

जमीन छिनने पर हार्ट अटैक से हुई थी देवरानी की मौत लीलावती बताती हैं कि महेंद्र सिपाही उन दिनों अपने रिश्तेदार को मंत्री जी कहकर बुलाता था। यह नेता उन दिनों मंडल की एक सीट से BSP विधायक थे। BSP सरकार होने से स्थानीय प्रशासन विधायक को मंत्री की तरह ही ट्रीट करता था। लीलावती ने बताया कि महेंद्र ने उनकी देवरानी वीरवती की जमीन भी धोखे से हड़प ली थी।

जब उसे जमीन छिनने का पता चला, तो उसकी हार्ट अटैक से मौत गई। लीलावती ने बताया कि उन्होंने काफी कोशिशें कीं। लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की।

लीलावती को समझाने पहुंचे पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी। इन लोगों की काफी कोशिशों के बाद भी लीलावती ने भूख हड़ताल खत्म नहीं की
लीलावती को समझाने पहुंचे पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी। इन लोगों की काफी कोशिशों के बाद भी लीलावती ने भूख हड़ताल खत्म नहीं की

4 साल पहले बेटे को पीटकर मार डाला था

लीलावती ने बताया कि 4 साल पहले पुलिस जांच के लिए उनके बेटे राजीव को ले गई थी। सिपाही ने जिस जमीन पर कब्जा किया, पुलिस ने उसे दिखाने को कहा था। छानबीन करने के बाद पुलिस वहां से चली गई। राजीव वहीं रह गया। इसके बाद महेंद्र सिंह ने साथियों के साथ मिलकर उसको जमकर पीटा। जिससे राजीव की मौत हो गई। काफी कोशिशों के बाद भी पुलिस ने मुकदमा दर्ज नहीं किया।

6 महीने पहले भूख हड़ताल पर बैठे पति की मौत

लीलावती बताती हैं कि 6 महीने पहले उनके पति शेर सिंह इंसाफ के लिए भूख हड़ताल पर बैठे थे। भूख हड़ताल पर बैठे-बैठे उनकी मौत हो गई। लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। शेर सिंह की मौत के बाद तत्कालीन CO ने उल्टा लीलावती को ही धमकाया। शव के श्मशान में पहुंचने के बाद उन्हें अपने ऑफिस में बैठाकर रखा।

इस दौरान CO सिविल लाइंस की अधिवक्ताओं से नोंकझोंक हुई।
इस दौरान CO सिविल लाइंस की अधिवक्ताओं से नोंकझोंक हुई।

सिक्योरिटी गार्ड भी कर चुका है सुसाइड

महेंद्र की वजह से मंगूपुरा में एक सिक्योरिटी गार्ड ने भी 2010 में आत्महत्या की थी। उसने अपनी लाइसेंसी रायफल से खुद को गोली मारकर जान दे दी थी। उसने सिपाही महेंद्र को मौत के लिए जिम्मेदार बताया था। सुसाइड नोट में लिखा था- 'महेंद्र दीवान जी ने धोखे से मेरी जमीन हड़प ली। फिर मदद के बहाने मेरी पत्नी को साथ ले गए। उसके साथ गलत काम किया। फिर मेरी पत्नी को लखनऊ ले जाकर मंत्री जी से गलत काम कराया। मैं शर्मिंदा हूं इसलिए जान दे रहा हूं।'
सुसाइड नोट में नाम होने के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
मंगूपुरा में हुई इस आत्महत्या में दो पन्ने का सुसाइड नोट मिला था। लेकिन फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। तत्कालीन ASP/CO सिविल लाइंस विनोद कुमार सिंह इस सुसाइड नोट को ले गए थे। प्रदेश में तब भी BSP की सरकार थी। इसलिए पुलिस ने इस मामले को दबा दिया था।

कई लोगों की जमीन हड़प चुका है महेंद्र

2010 के आसपास अपने रिश्तेदार की वजह से महेंद्र किसी से नहीं डरता था। उसने मुरादाबाद व आसपास कई लोगों की जमीनें ऐसे ही धोखाधड़ी से हड़पीं। पुलिस की वर्दी पहनने के बावजूद वह प्रॉपर्टी डीलर की तरह काम करता था। BSP नेता का हाथ सिर पर होने से पुलिस के बड़े अफसर भी उससे डरते थे। अगवानपुर क्षेत्र में भी उसने कई जमीनें हड़पीं। हालांकि बसपा सरकार जाने के बाद सिपाही को बर्खास्त कर दिया गया। लेकिन उसने जिन लोगों पर जुल्म किए, उन्हें आज तक न्याय नहीं मिला।

लीलावती को भूख हड़ताल से उठाने पहुंचे अधिकारी।
लीलावती को भूख हड़ताल से उठाने पहुंचे अधिकारी।