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मुरादाबाद की हैंडीक्राफ्ट इंडस्ट्री में बूम, 60 हजार भर्तियां हुई:कोरोनाकाल की मंदी के दौरान यहां इंडस्ट्री 24 घंटे चली, नई यूनिट लगी, वेयर हाउस बने, 80 देशों को 12 हजार करोड़ का एक्सपोर्ट किया

लखनऊ7 महीने पहलेलेखक: उमेश शर्मा
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लॉकडाउन में मुरादाबाद के हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्ट में करीब 2000 करोड़ रुपये का बूम आया है। अमेरिका, स्वीडन, नार्वे समेत करीब 10 से अधिक देशों से आर्डर्स की भरमार है। विदेशों से मिल रहे आर्डर्स की तादाद इतनी ज्यादा है कि इन्हें पूरा करने के लिए निर्यातकों ने नई प्रोडक्शन यूनिटें लगाई हैं। तैयार माल को रखने के लिए नए वेयर हाउस भी बनाए जा रहे हैं। पहले से करीब 3 लाख श्रमिकों को रोजगार देने वाली इंडस्ट्री में पिछले छह माह में करीब 60 हजार नए कर्मचारियों की भर्ती की गई है। ओवरटाइम कर रही फैक्टरियों को अभी भी बड़ी तादाद में स्किल्ड लेबर की दरकार है।

ट्रेंड बदला, रिटेल कंपनियां दे रहीं आर्डर

ईपीसीएच के पूर्व चेयरमैन और द हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के सचिव सतपाल बताते हैं कि बिजनेस करीब 30 फीसदी अप हुआ है। मार्च के बाद देश में जब लॉकडाउन लगा तब यूएसए से मिलने वाले आर्डर्स में अचानक वृद्धि हुई। अमेरिका की एक रिटेल कंपनी ने प्योर ब्रास से बने एक क्रिसमस ऑर्नामेंट के 60 लाख पीस आर्डर किए। 6 करोड़ का वन टाइम पेमेंट दिया। वेयर हाउस कम पड़ गए हैं। लेबर बढ़ानी पड़ी है और प्रोडक्शन यूनिट भी बढ़ाई हैं। उन्होंने कहा कि पहले इंपोर्टर होते थे लेकिन अब ऑनलाइन बिजनेस कर रही यूएसए की रिटेल कंपनियां सीधे आर्डर दे रही हैं। अमेरिका की टीजेएक्स रिटेल कंपनी अकेले मुरादाबाद से 2000 करोड़ का इंपोर्ट कर रही है। जर्मनी से भी बड़े कारोबारी आर्डर मिल रहे हैं। आर्डर समय से पूरा करने के लिए फैक्टरी ओवरटाइम चल रही हैं।

अमेरिका- चीन की तल्खियों से बढ़ा मुरादाबाद का एक्सपोर्ट

निर्यातक अजय पुगला का कहना है कि अमेरिका और चीन के बीच की तल्खियों की वजह से अमेरिका के बायर्स ने शायद चीन के बजाय इंडिया का रुख किया है। होम डेकोर में मुरादाबाद ही एक्सपोर्ट करता है इसलिए इसका सीधा फायदा मुरादाबाद की इंडस्ट्री को मिला है। अजय बताते हैं कि उनके एक्सपोर्ट में 30 फीसदी से ज्यादा का इजाफा हुआ है। नवेद उर रहमान का भी कहना है कि यूएसए और यूरोप में लोग यह मानते हैं कि कोरोना वायरस का जन्म चीन में हुआ इसलिए उन्होंने होम डेकोर आइटम्स के लिए चीन से दूरी बना ली है। चीन में दुनिया का सबसे बड़ा एक्सपोर्ट फेयर (कैंटोन फेयर) लगता है जो 2020 से बंद है।

प्रोडक्ट की फोटो और ट्रस्ट पर हजारों करोड़ का कारोबार

कोविड से पहले निर्यातकों को विदेशी बायर्स से आर्डर लेने के लिए दुनियाभर में होने वाले एक्सपोर्ट फेयर में हिस्सा लेना पड़ता था। जर्मनी में फ्रैंकफर्ट फेयर, एम्बियंते फेयर, हांगकांग फेयर और दिल्ली में साल में दो बार होने वाले आईएचजीएफ फेयर में निर्यातक अपने उत्पादों का प्रदर्शन करते थे। इन फेयर्स में करोड़ों रुपये खर्च होते थे। कोविड की वजह से सारे फेयर बंद हैं। ऐसे मे सारा बिजनेस प्रोडक्ट की फोटो, वर्चुअल मीटिंग और क्वालिटी को लेकर आपसी भरोसे पर ही चल रहा है।

100 साल पुरानी इंडस्ट्री, 80 देशों को करती है निर्यात

इंडस्ट्री करीब 100 साल पुरानी है। अब यहां 2500 हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्ट फैक्ट्री हैं। इनमें बेहतरीन हस्तशिल्प दस्तकारों समेत करीब 3 लाख श्रमिक काम करते हैं। लॉकडाउन में यह संख्या बढ़कर 3.60 लाख हो गई है। पहले यहां सिर्फ पीतल से ही बर्तन व होम डेकोर आइटम बनते थे। लेकिन अब पीतल, ग्लास, एल्युमीनियम, लकड़ी और आयरन का इस्तेमाल करके होम डेकोर आइटम बनाए जाते हैं। लाइट्स, ट्रे, वाइन होल्डर, कैंडल स्टैंड, फर्नीचर समेत हजारों तरह के उत्पाद यहां बनते हैं। मुरादाबाद से यूरोप, अमेरिका और गल्फ कंट्रीज समेत दुनियाभर के करीब 80 देशों को 10 हजार करोड़ रुपये सालाना का एक्सपोर्ट होता है। जिसमें अब 30 फीसदी का बूम दर्ज किया गया है। देश का कुल हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्ट 25550 करोड़ रुपये सालाना है। इसमें अकेले मुरादाबाद की हिस्सेदारी अब करीब 48 फीसदी की है।

पहले 26 फीसदी गिरा फिर बढ़ा व्यापार

ईपीसीएच महानिदेशक राकेश कुमार ने बताया कि अप्रैल 2020 से सिंतबर तक छह माह में देश का हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्ट 26 फीसदी गिरा था। लेकिन अगले छह माह में हुई ग्रोथ ने पुरानी रिकवरी भी कर दी। अब ओवरआल हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्ट में करीब 1.5 फीसदी की वृद्धि है। जबकि मुरादाबाद में मार्च तक पिछले साल की तुलना में 12 फीसदी की वृद्धि दर्ज हो चुकी थी।

ऐसा बूम पहली बार, 60 हजार नए श्रमिकों को रोजगार

मुरादाबाद हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष नवेद उर रहमान का कहना है कि मुरादाबाद से होने वाले एक्सपोर्ट में करीब 30 फीसदी का बूम है। आर्डर इतने हैं कि उन्हें पूरा करने के लिए निर्यातकों को करीब 20 फीसदी लेबर बढ़ानी पड़ी है। लॉकडाउन में करीब 60 हजार नए श्रमिकों को इंडस्ट्री में काम मिला है। इतना बड़ा बूम पहली बार देखने को मिला है। फैक्टरियों की प्रोडक्शन यूनिट और वेयर हाउस छोटे पड़ गए हैं। इसलिए नई प्रोडक्शन यूनिट बन रही हैं और तैयार माल को रखने के लिए रातोंरात नए अस्थायी वेयर हाउस बनाए जा रहे हैं।

विश्व में वर्क फ्राम होम के कल्चर ने बढ़ाया मुरादाबाद का एक्सपोर्ट: राकेश

एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल फॉर हैंडीक्राफ्ट (ईपीसीएच) के महानिदेशक राकेश कुमार का कहना है कि कोविड में वर्क फ्रॉम होम के कल्चर ने मुरादाबाद का एक्सपोर्ट बढ़ा दिया है। दुनियाभर में लोगों ने घर से ही आफिस का काम किया। ऐसे में उन्हें घरों की नए सिरे से साज सज्जा की जरूरत पड़ी। लोगों ने पुराने सामान हटाकर होम डेकोर की नई चीजें लॉकडाउन में आर्डर कीं। मुरादाबाद से होम डेकोर के हैंडीक्राफ्ट आइटम एक्सपोर्ट होते हैं इसलिए यहां निर्यात में बूम आया है।

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